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दशम पातशाह के चालीस मुक्तों की याद को समर्पित माघी आज

Thu, 13 Jan 2022 10:30 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Thu, 13 Jan 2022 10:30 PM IST
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Maghi today dedicated to the memory of the forty freedmen of the tenth Patshah
दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के चालीस मुक्तों की याद में ऐतिहासिक मेला माघी शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। शहीदों को नमन करने के लिए मेला माघी वाले दिन 14 जनवरी को लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं और गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब के पवित्र सरोवर में स्नान करने के बाद शहीदों को नमन करते हैं। वहीं अन्य गुरुद्वारा साहिब में भी पहुंचकर नतमस्तक होते हैं।
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देश-विदेश में जग प्रसिद्ध मुक्तसर के इस माघी मेले में संगतों का हुजूम इस कदर उमड़ पड़ता है कि सड़कों पर पांव रखने को जगह तक नहीं बचती। मेला माघी को लेकर गुरुद्वारा साहिब में कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। लोहड़ी की रात से ही संगत ने शहर में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। वहीं गुरुद्वारा साहिब टिब्बी साहिब और निहंगों वाली छावनी के पास भी निहंग-सिंहों ने डेरे डालने शुरू कर दिए हैं। मेले को लेकर गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में श्री अखंड पाठ चल रहे हैं, जिनका भोग 14 जनवरी को माघी वाले दिन पड़ेगा। इस दिन बड़ी संख्या में संगत इन कार्यक्रमों में शामिल होगी। 15 जनवरी को नगर कीर्तन निकाले जाने के साथ ही रवायती तौर पर मेला माघी बेशक संपन्न हो जाएगा, मगर करीब डेढ़ से दो माह तक मलोट रोड पर संगतों का मेला लगा ही रहता है।
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बारिश की मार से इस बार मलोट रोड पर मनोरंजन मेला माघी के दिन शुरू होता नजर नहीं आ रहा, जिससे इस बार संगत गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के बाद मलोट रोड पर लगने वाली स्टालों और बाजार में भ्रमण ही कर सकेगी। ऐसे में मेला आयोजकों को पहले दिन लाखों संगतों के आने से होने वाले मुनाफे से भी वंचित रहना पड़ेगा। जबकि मेले के पहले दो दिन ही मेला प्रबंधक मेले के दाम पूरे कर लेते हैं। मगर इस बार मेला प्रबंधकों के अनुसार मेला 16 जनवरी (रविवार) तक बड़ी मुश्किल से शुरू हो सकेगा।
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कांफ्रेंस न होने से रहेगा पूरी तरह चालीस मुक्तों को समर्पित
मेला माघी इस बार भी निरोल धार्मिक रहेगा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक मेलों में सियासी कांफ्रेंस का चलन बंद ही हो गया है, मगर इस बार तो विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता भी लागू है, ऐसे में किसी दल की सियासी कांफ्रेंस न होने से सियासत का तड़का नहीं लगेगा। मेला माघी पूरी तरह शहीदों को समर्पित रहेगा। बता दें कि एक समय ऐसा भी होता था जब मेला माघी पर सभी दलों की सियासी कांफ्रेंस हुआ करती थी और नई दिल्ली से केंद्रीय नेता तक कांफ्रेंस में पहुंचकर एक-दूसरे पर सियासी छींटाकशी करते थे। मगर अब कुछ वर्षों से मेला माघी पूरी तरह से चाली मुक्तों को समर्पित रहता है।

निहंग सिंहों ने डाले डेरे, कोहरे में भी संगत पहुंचनी शुरू
मेले को लेकर गुरुद्वारा टिब्बी साहिब, गुरु नानक कॉलेज के सामने स्थित छावनी बहादुर बाबा बिधि चंद साहिब में निहंग-सिंहों ने डेरे जमाने शुरू कर दिए हैं। वीरवार को घने कोहरे में भी संगतों ने मुक्तसर पहुंचना शुरू कर दिया। वहीं टिब्बी साहिब गुरुद्वारा के पास भी विभिन्न साजो-सामान की स्टालें लगने लगी हैं। मेले दौरान निहंग सिंह घुड़दौड़ में घुड़सवारी के हैरतअंगेज करतब दिखाएंगे।
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