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एलपीयू में नेशनल ओपन फेस्ट यूथ वाइब का दूसरा दिन
अमर उजाला, जालंधर
Updated Tue, 22 Oct 2013 10:17 PM IST
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एलपीयू में चल रहे तीन दिवसीय नेशनल ओपन फेस्ट यूथ वाइब 2013 के दूसरे दिन समाज आधारित विषयों को बोलबाला रहा।
मुकाबला चाहे रंगमंच पर था, पर नाटकों, नुक्कड़ नाटकों, मिमिक्री, कॉमेडी आदि में समाज की समस्याओं को लेकर प्रस्तुतियां की गई। एलपीयू के नाटक केसर गंगा को नाटकों के मुकाबलों में सर्वोच्च घोषित किया गया जिसका विषय एक वेश्या के जीवन पर आधारित था। इस श्रेणी में एक अन्य नाटक कुमार स्वामी को उपविजेता घोषित किया गया तथा आंखें नाटक को भरपूर सराहना मिली।
दूसरी ओर पेंटिंग में चल रहे मुकाबलों में विभिन्न प्रकार के चित्रों में समाज की विकट समस्याएं ही नजर आ रही थीं। एक ओर प्रदूषण संबंधी चित्र थे तो दूसरी ओर ड्रग्स, प्रदूषण, भ्रूण हत्या संबंधी चित्र प्रस्तुत किए गए।
इसी तरह साहित्यिक मुकाबलों में भी इस तरह की बातें ही नजर आई जहां एक्सटेपोर, डिबेट और सिम्पोजियम आदि के लिए धर्म, राजनीति, भ्रष्टाचार मुख्य रहे।
एलपीयू की प्रो. चांसलर रश्मि मित्तल ने विद्यार्थियों तथा उनके अध्यापकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में ऐसी चेतना देखकर बहुत खुशी अनुभव हो रही है कि आने वाले वर्षों में युवा वर्ग के प्रयासों से समाज इन सभी कुरीतियों से मुक्ति पा लेगा।
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मुकाबला चाहे रंगमंच पर था, पर नाटकों, नुक्कड़ नाटकों, मिमिक्री, कॉमेडी आदि में समाज की समस्याओं को लेकर प्रस्तुतियां की गई। एलपीयू के नाटक केसर गंगा को नाटकों के मुकाबलों में सर्वोच्च घोषित किया गया जिसका विषय एक वेश्या के जीवन पर आधारित था। इस श्रेणी में एक अन्य नाटक कुमार स्वामी को उपविजेता घोषित किया गया तथा आंखें नाटक को भरपूर सराहना मिली।
दूसरी ओर पेंटिंग में चल रहे मुकाबलों में विभिन्न प्रकार के चित्रों में समाज की विकट समस्याएं ही नजर आ रही थीं। एक ओर प्रदूषण संबंधी चित्र थे तो दूसरी ओर ड्रग्स, प्रदूषण, भ्रूण हत्या संबंधी चित्र प्रस्तुत किए गए।
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इसी तरह साहित्यिक मुकाबलों में भी इस तरह की बातें ही नजर आई जहां एक्सटेपोर, डिबेट और सिम्पोजियम आदि के लिए धर्म, राजनीति, भ्रष्टाचार मुख्य रहे।
एलपीयू की प्रो. चांसलर रश्मि मित्तल ने विद्यार्थियों तथा उनके अध्यापकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में ऐसी चेतना देखकर बहुत खुशी अनुभव हो रही है कि आने वाले वर्षों में युवा वर्ग के प्रयासों से समाज इन सभी कुरीतियों से मुक्ति पा लेगा।
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