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तीन माह जिंदगी किश्ती के सहारे
ब्यूरो/अमर उजाला, कपूरथला
Updated Mon, 13 Jul 2015 10:08 PM IST
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दरिया ब्यास के किनारे बसे 10 गांव दुनिया से कट गए हैं। इन्हें जोड़ने
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वालों अस्थायी पैंटून पुल पीडब्ल्यूडी ने हटा दिया है। मानसून के सीजन में
हर साल लगभग तीन माह के लिए इस पुल को समेट लिया जाता है। अब दरिया पार
करने के लिए लोगों को तीन महीने किश्ती का सहारा लेना पड़ेगा।
सुल्तानपुर लोधी के 10 गांव दरिया ब्यास से घिरे हुए हैं। वहीं तरनतारन के भी कुछ गांव दरिया में बसे हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर लोधी ने अस्थायी पैंटून पुल की व्यवस्था कर रखी है। 11 जुलाई को मानसून सीजन के चलते जेसीबी की मदद से पुल को समेट लिया गया। दस मीटर की लंबाई वाले करीब 25 पैंटून को जोड़कर अस्थायी पुल खड़ा किया जाता है, जिनके ऊपर से दरिया में बसे गांवों के करीब पांच हजार लोग आते-जाते हैं।
अब पुल हटने के बाद उनके लिए पार जाने का एकमात्र सहारा किश्ती ही बचा है, लेकिन ब्यास दरिया में मानसून सीजन के दौरान पानी उफान पर आ जाता है। ऐसे में किश्ती का सफर काफी खतरनाक साबित होता है। कुछ अर्से पहले तरनतारन से सुल्तानपुर लोधी के समीपवर्ती गांव में आयोजित वार्षिक मेले में शामिल होने कुछ लोग किश्ती से आ रहे थे। किश्ती पलटने से उनकी मौत हो गई थी। उस समय भी पैंटून पुल हटाया हुआ था। दरिया ब्यास के लक्ख वरिया पत्तन पर पैंटून पुल लगता है। दरिया के उफान पर होने के चलते पैंटून पुल के बहने का खतरा बना रहता है। ऐसे में जुलाई से 30 सितंबर तक पैंटून पुल हटा लिया जाता है।
वैसे यह पैंटून पुल हर साल एक जुलाई को हटा लिया जाता है, लेकिन इस बार दरिया पार किसानों ने मक्की की फसल बीज रखी थी, जो लगभग पककर तैयार थी। इस पर किसानों ने पूर्व वित्तमंत्री डॉ. उपिंदरजीत कौर से गुजारिश की कि पुल कुछ दिनों बाद हटाया जाए ताकि वह अपनी फसल मंडियों तक पहुंचा सके। वहीं लक्ख वरिया पत्तन के पास स्थित पीर की दरगाह के वार्षिक मेले के चलते भी इस बार पुल को देरी से हटाया गया। एसडीओ के मुताबिक दरिया ब्यास में 10 गांव घिरे हैं, जबकि गांवों की संख्या 14 से 19 के बीच है। जिनमें से कुछ बेचिराग गांव भी हैं।
ये गांव बने टापू
सुल्तानपुर लोधी से करीब नौ किलोमीटर दूर दरिया ब्यास का क्षेत्र शुरू हो जाता है। इस दरिया में बसे गांव टापू की तरह हैं। इस एरिया में एक स्कूल है, जहां पर पर बच्चे तो हैं, लेकिन इनको पढ़ाने के लिए टीचर को दरिया पार करके जाना पड़ता है। अब गांव बाऊपुर सांगरा, मंड बाऊपुर, बाऊपुर नया, कंगड़ा, मुहमदाबाद, रामपुर गोढ़ा, भैणीकादर बख्श, भैनी बहादुर, बाउपुर पुराना, पद्दू नया और किशनपुर घड़ता का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है।
---कोट---
एक अक्तूबर को दोबारा जोड़ा जाएगा पुल : एसडीओ
11 जुलाई को पैंटून पुल को खोलकर जेसीबी की मदद से सुरक्षित रख लिया गया है। अब एक अक्तूबर को मानसून सीजन के बाद पैंटून पुल दरिया ब्यास में दोबारा जोड़ा जाएगा। तब तक किश्ती के सहारे आवागमन होगा। दरिया ब्यास में करीब 10 गांव घिरे हुए हैं।
बलबीर सिंह, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर लोधी
गांव के लोगों के आने-जाने के लिए पीडब्ल्यूडी की तरफ से दो किश्तियों का प्रबंध किया गया है, ताकि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरत का सामान ला सकें।
गुरजीत सिंह, एसडीएम, सुल्तानपुर लोधी
सुल्तानपुर लोधी के 10 गांव दरिया ब्यास से घिरे हुए हैं। वहीं तरनतारन के भी कुछ गांव दरिया में बसे हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर लोधी ने अस्थायी पैंटून पुल की व्यवस्था कर रखी है। 11 जुलाई को मानसून सीजन के चलते जेसीबी की मदद से पुल को समेट लिया गया। दस मीटर की लंबाई वाले करीब 25 पैंटून को जोड़कर अस्थायी पुल खड़ा किया जाता है, जिनके ऊपर से दरिया में बसे गांवों के करीब पांच हजार लोग आते-जाते हैं।
अब पुल हटने के बाद उनके लिए पार जाने का एकमात्र सहारा किश्ती ही बचा है, लेकिन ब्यास दरिया में मानसून सीजन के दौरान पानी उफान पर आ जाता है। ऐसे में किश्ती का सफर काफी खतरनाक साबित होता है। कुछ अर्से पहले तरनतारन से सुल्तानपुर लोधी के समीपवर्ती गांव में आयोजित वार्षिक मेले में शामिल होने कुछ लोग किश्ती से आ रहे थे। किश्ती पलटने से उनकी मौत हो गई थी। उस समय भी पैंटून पुल हटाया हुआ था। दरिया ब्यास के लक्ख वरिया पत्तन पर पैंटून पुल लगता है। दरिया के उफान पर होने के चलते पैंटून पुल के बहने का खतरा बना रहता है। ऐसे में जुलाई से 30 सितंबर तक पैंटून पुल हटा लिया जाता है।
वैसे यह पैंटून पुल हर साल एक जुलाई को हटा लिया जाता है, लेकिन इस बार दरिया पार किसानों ने मक्की की फसल बीज रखी थी, जो लगभग पककर तैयार थी। इस पर किसानों ने पूर्व वित्तमंत्री डॉ. उपिंदरजीत कौर से गुजारिश की कि पुल कुछ दिनों बाद हटाया जाए ताकि वह अपनी फसल मंडियों तक पहुंचा सके। वहीं लक्ख वरिया पत्तन के पास स्थित पीर की दरगाह के वार्षिक मेले के चलते भी इस बार पुल को देरी से हटाया गया। एसडीओ के मुताबिक दरिया ब्यास में 10 गांव घिरे हैं, जबकि गांवों की संख्या 14 से 19 के बीच है। जिनमें से कुछ बेचिराग गांव भी हैं।
ये गांव बने टापू
सुल्तानपुर लोधी से करीब नौ किलोमीटर दूर दरिया ब्यास का क्षेत्र शुरू हो जाता है। इस दरिया में बसे गांव टापू की तरह हैं। इस एरिया में एक स्कूल है, जहां पर पर बच्चे तो हैं, लेकिन इनको पढ़ाने के लिए टीचर को दरिया पार करके जाना पड़ता है। अब गांव बाऊपुर सांगरा, मंड बाऊपुर, बाऊपुर नया, कंगड़ा, मुहमदाबाद, रामपुर गोढ़ा, भैणीकादर बख्श, भैनी बहादुर, बाउपुर पुराना, पद्दू नया और किशनपुर घड़ता का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है।
---कोट---
एक अक्तूबर को दोबारा जोड़ा जाएगा पुल : एसडीओ
11 जुलाई को पैंटून पुल को खोलकर जेसीबी की मदद से सुरक्षित रख लिया गया है। अब एक अक्तूबर को मानसून सीजन के बाद पैंटून पुल दरिया ब्यास में दोबारा जोड़ा जाएगा। तब तक किश्ती के सहारे आवागमन होगा। दरिया ब्यास में करीब 10 गांव घिरे हुए हैं।
बलबीर सिंह, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर लोधी
गांव के लोगों के आने-जाने के लिए पीडब्ल्यूडी की तरफ से दो किश्तियों का प्रबंध किया गया है, ताकि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरत का सामान ला सकें।
गुरजीत सिंह, एसडीएम, सुल्तानपुर लोधी