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Jalandhar News: 300 आबादी वाला कालू वाला टापू कभी भी समा सकता है सतलुज दरिया में तीन परिवारों के सदस्यों ने सरकारी प्राइमरी स्कूल में ली पनाह

Tue, 01 Aug 2023 04:22 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर Updated Tue, 01 Aug 2023 04:22 PM IST
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Kalu wala island with 300 population can get absorbed in Sutlej river anytime
सात हजार एकड़ में से लगभग पंद्रह एकड़ जमीन समा चुकी है दरिया में
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गांव की जमीन पर जमी दो फुट रेत, मकान गिर रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर। 300 लोगों की आबादी वाला फिरोजपुर का सीमांत गांव कालू वाला टापू कभी भी सतलुज दरिया में समा सकता है। दरिया में पानी का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों के अनुसार यह बाढ़ 1988 की बाढ़ से ज्यादा खतरनाक है। गांव कालू वाला (टापू) तीन तरफ दरिया से घिरा है और चौथी तरफ पाकिस्तान है। पिछले कई दिनों से गांव में पानी भरा है। गांव और दरिया एक समान हो चुके हैं। पाकिस्तान से भारत में प्रवेश हो रहे पानी वाली जगह से गांव की लगभग आठ एकड़ जमीन दरिया में गिर चुकी है, यही नहीं गांव निहाले किलचे की तरफ से गांव की करीब सात एकड़ जमीन दरिया में मिल गई है। इसी रफ्तार से पानी बढ़ता रहा तो गांव दरिया में समा जाएगा। ऐसे हालात में तीन परिवारों के सदस्यों ने सरकारी प्राइमरी स्कूल में पनाह ली हुई है।

ग्रामीन सतनाम सिंह, मलकीत सिंह, निशान सिंह, चिमन सिंह व रत्तन सिंह का कहना है कि गांव में सात हजार एकड़ जमीन है। यहां पर करीब 65 घर हैं और आबादी 300 लोगों की है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन सप्ताह से गांव में पानी भरा है। पानी धीरे-धीरे गांव की जमीन को दरिया में मिलाता जा रहा है। सोमवार और मंगलवार फिर से पानी का स्तर बढ़ा है। इसी तरह दस दिन और पानी बढ़ता रहा तो ये गांव दरिया में समा सकता है। सतनाम, निशान व चिमन का परिवार गांव में बने सरकारी प्राइमरी स्कूल में पनाह लिए बैठा है। दो परिवार और हैं, जो ऊंची जगह पर परिवार के संग बैठे हैं। ये लोग पशुओं की देख रेख कर रहे हैं। मलकीत का कहना है कि गांव की जमीन पर दो फुट रेत जम चुकी है। दरिया तीनों तरफ से गांव का नुकसान पहुंचाने में जुटा है। यहां रहने वाले कुछेक परिवार के लोग महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित जगह पर छोड़कर पशुओं और मकान की देखरेख कर रहे हैं। पानी की रफ्तार इतनी तेज है कि नाव चलाना भी मुश्किल है। सात हजार एकड़ में लगी धान और सब्जी की फसल नष्ट हो चुकी है। ग्रामीणों की पंजाब सरकार से मांग है कि उन्हें कहीं सुरक्षित सरकारी जमीन दें, जिस पर खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। ये बाढ़ 1988 की बाढ़ से ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है।
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