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मजीठिया पर भ्रष्टाचार का आरोप
अमर उजाला, जालंधर
Updated Sun, 12 Jan 2014 10:23 PM IST
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कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर भोला के आरोप लगाने के बाद अब पूर्व प्रिंसिपल सचिव डॉ. स्वर्ण सिंह ने भी मजीठिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
डॉ. स्वर्ण सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने मजीठिया को बचाने की खातिर उन्हें फंसाया है।
पत्रकारों के साथ बातचीत में डॉ. स्वर्ण सिंह ने कहा कि भोला ने जो मजीठिया पर आरोप लगाए हैं, वह सच्चे हो सकते हैं क्योंकि अमृतसर में पूरा साम्राज्य मजीठिया का है और पंजाब में ड्रग्स अमृतसर के रास्ते पाकिस्तान से आता है।
इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह पर भी उनसे 1994 में भर्ती में गोलमाल करने का दबाव डालने की बात कही है। बात न मानने पर बेअंत सिंह ने उनका मानसा डीसी के पद से तबादला कर दिया।
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डॉ. स्वर्ण सिंह ने कहा कि इस समय वह आम आदमी पार्टी के सदस्य हैं। वह पार्टी से टिकट नहीं मांग रहे हैं। जब वह सेवामुक्ति के बाद 2011 में कांग्रेस के साथ जुड़े तो बादल सरकार ने ढाई वर्ष पुराने एक केस को खोला और उन्हें जबरन फंसा दिया।
पूर्व प्रिंसिपल सचिव ने बताया कि सेंटर गवर्नमेंट ने 2008 के दौरान शहीद भगत सिंह के शहीदी समारोह करवाने के लिए 6 करोड़ रुपये जारी किए थे।
तीन-तीन करोड़ रुपये खर्च कर यह समारोह अमृतसर और खटकड़कलां (शहीद भगत सिंह नगर) में करवाए जाने थे।
पहला समारोह अमृतसर में करवाया गया, जिसका सारा खर्च बिक्रम सिंह मजीठिया के हाथों किया गया जबकि खटकड़कलां में आयोजित समारोह की जिम्मेदारी उनके डिपार्टमेंट कल्चरल अफेयर पर डाली गई।
वह उस विभाग के प्रिंसिपल सचिव थे। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री की सलाह पर तीन कमेटियों का गठन किया। कमेटी ने ही फैसला कर सभी प्रबंध पूरे किए।
इसके बाद किसी एक व्यक्ति ने इन समारोह में घपले की बात कर जांच करवाने के लिए कहा था। सरकार ने सिर्फ खटकड़कलां समारोह की जांच करवाई।
इस समारोह के दौरान कमेटी ने जो खर्च अप्रूव किए थे, उनमें खामियां पाई गई। उन्होंने बताया कि खुद सीएम प्रकाश सिंह बादल ने अपने हस्ताक्षरों के नीचे इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को एक एग्रीमेंट साइन कर उन्हें कलाकार बुलाने के लिए कहा था।
इसके बाद जब अदायगी की गई थी तो उसी केस में ही उन्हें फंसाया गया था। उन्होंने कहा कि इस केस के साथ अमृतसर में मजीठिया की तरफ से आयोजित करवाए गए समारोह की सीबीआई जांच करवाई जाए तो मजीठिया के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का पर्दाफाश हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अभी इस केस को विजिलेंस ने जांच की है, विजिलेंस पूरी तरह से सुखबीर बादल के हाथों की कठपुतली है, इसलिए इस केस की जांच सीबीआई से करवाई जानी चाहिए।
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डॉ. स्वर्ण सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने मजीठिया को बचाने की खातिर उन्हें फंसाया है।
पत्रकारों के साथ बातचीत में डॉ. स्वर्ण सिंह ने कहा कि भोला ने जो मजीठिया पर आरोप लगाए हैं, वह सच्चे हो सकते हैं क्योंकि अमृतसर में पूरा साम्राज्य मजीठिया का है और पंजाब में ड्रग्स अमृतसर के रास्ते पाकिस्तान से आता है।
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इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह पर भी उनसे 1994 में भर्ती में गोलमाल करने का दबाव डालने की बात कही है। बात न मानने पर बेअंत सिंह ने उनका मानसा डीसी के पद से तबादला कर दिया।
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डॉ. स्वर्ण सिंह ने कहा कि इस समय वह आम आदमी पार्टी के सदस्य हैं। वह पार्टी से टिकट नहीं मांग रहे हैं। जब वह सेवामुक्ति के बाद 2011 में कांग्रेस के साथ जुड़े तो बादल सरकार ने ढाई वर्ष पुराने एक केस को खोला और उन्हें जबरन फंसा दिया।
पूर्व प्रिंसिपल सचिव ने बताया कि सेंटर गवर्नमेंट ने 2008 के दौरान शहीद भगत सिंह के शहीदी समारोह करवाने के लिए 6 करोड़ रुपये जारी किए थे।
तीन-तीन करोड़ रुपये खर्च कर यह समारोह अमृतसर और खटकड़कलां (शहीद भगत सिंह नगर) में करवाए जाने थे।
पहला समारोह अमृतसर में करवाया गया, जिसका सारा खर्च बिक्रम सिंह मजीठिया के हाथों किया गया जबकि खटकड़कलां में आयोजित समारोह की जिम्मेदारी उनके डिपार्टमेंट कल्चरल अफेयर पर डाली गई।
वह उस विभाग के प्रिंसिपल सचिव थे। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री की सलाह पर तीन कमेटियों का गठन किया। कमेटी ने ही फैसला कर सभी प्रबंध पूरे किए।
इसके बाद किसी एक व्यक्ति ने इन समारोह में घपले की बात कर जांच करवाने के लिए कहा था। सरकार ने सिर्फ खटकड़कलां समारोह की जांच करवाई।
इस समारोह के दौरान कमेटी ने जो खर्च अप्रूव किए थे, उनमें खामियां पाई गई। उन्होंने बताया कि खुद सीएम प्रकाश सिंह बादल ने अपने हस्ताक्षरों के नीचे इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को एक एग्रीमेंट साइन कर उन्हें कलाकार बुलाने के लिए कहा था।
इसके बाद जब अदायगी की गई थी तो उसी केस में ही उन्हें फंसाया गया था। उन्होंने कहा कि इस केस के साथ अमृतसर में मजीठिया की तरफ से आयोजित करवाए गए समारोह की सीबीआई जांच करवाई जाए तो मजीठिया के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का पर्दाफाश हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अभी इस केस को विजिलेंस ने जांच की है, विजिलेंस पूरी तरह से सुखबीर बादल के हाथों की कठपुतली है, इसलिए इस केस की जांच सीबीआई से करवाई जानी चाहिए।