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Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Iinside story of private meeting between PM Modi and Sant Niranjan Das in Dera Ballan

Punjab: डेरा बल्लां के संत ने PM को दिया तोहफा, SPG ने पहले मना किया; मोदी-निरंजनदास मुलाकात की इनसाइड स्टोरी

Wed, 04 Feb 2026 06:08 AM IST
अंकेश ठाकुर सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 04 Feb 2026 06:08 AM IST
सार

प्रधानमंत्री रविवार को संत श्री गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के उपलक्ष्य में जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां में माथा टेकने पहुंचे थे। डेरे के मंच से पीएम मोदी ने आध्यात्म, विकास, आत्मनिर्भरता और समान अवसर की बात करते हुए पंजाबियों को यह बताया कि पंजाब कभी केंद्र की प्राथमिकताओं से परे नहीं रहा है। 

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Iinside story of private meeting between PM Modi and Sant Niranjan Das in Dera Ballan
डेरा सच्चखंड बल्ला में पीएम मोदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डेरा सचखंड बल्लां में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संत निरंजनदास के बीच एक संक्षिप्त लेकिन निजी मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री मोदी और संत निरंजनदास के बीच बातचीत अनौपचारिक माहौल में हुई। इस दौरान संत ने अपनी जेब से कुछ रुपये निकालकर प्रधानमंत्री को प्रसाद के रूप में भेंट किए। प्रधानमंत्री ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि इस राशि का उपयोग किसी पुण्य कार्य में किया जाएगा। इसके बाद संत निरंजनदास ने प्रधानमंत्री को चाय का एक कप भेंट किया जिस पर संत निरंजनदास की तस्वीर अंकित थी।

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सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर कुछ क्षण की असमंजस की स्थिति बनी। एसपीजी ने कप देने से मना किया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं आगे बढ़कर वह कप स्वीकार किया और संत के प्रति आभार व्यक्त किया। कप को ध्यान से देखते हुए उन्होंने कहा, सुबह इसी कप में चाय पियूंगा और आपकी तस्वीर से दर्शन कर लूंगा। डेरा ट्रस्ट से जुड़े अविनाश चंद्र क्लेर ने बताया कि यह मुलाकात पूरी तरह निजी थी और इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक चर्चा या घोषणा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का संत निरंजनदास के प्रति सम्मान और विनम्रता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

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यह भेंट धार्मिक सम्मान व आपसी सौहार्द्र का प्रतीक रही

मुलाकात के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने संत निरंजनदास से विदा ली और उनके साथ सीढ़ियों तक आए। डेरा प्रशासन के अनुसार, यह भेंट धार्मिक सम्मान और आपसी सौहार्द का प्रतीक रही, जिसे औपचारिक कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया। मुलाकात के दौरान डेरा ट्रस्ट की ओर से क्लेर सहित दो सदस्य उपस्थित रहे। क्लेर का कहना है कि इस मुलाकात में न कोई घोषणा थी, न कोई राजनीतिक संकेत, लेकिन जो कुछ घटा वह शब्दों से कहीं अधिक गहरा था। संत की जेब से निकला साधारण प्रसाद और प्रधानमंत्री की स्वीकृति दोनों ने मिलकर उस विश्वास को रूप दिया, जो औपचारिकताओं से परे होता है। यह वह क्षण था जहां सत्ता, सुरक्षा और प्रोटोकॉल पीछे छूट गए और सामने रह गया केवल इंसानी जुड़ाव। डेरा बल्लां की उस दोपहर ने यह साबित किया कि कभी-कभी इतिहास बड़े मंचों पर नहीं, बल्कि शांति से थामे गए हाथों और सादगी से दिए गए प्रसाद में लिखा जाता है।

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