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रात भर बरसात में भीगते रहे बेघर हुए मजदूर परिवार, दुधमुंहे बच्चों को आंचल में दबाए सारी रात सिसकती रहीं महिलाएं

Sat, 16 Nov 2019 10:09 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 16 Nov 2019 10:09 PM IST
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Homeless working family families were soaked during the rainy night, women kept sobbing all night to suppress the milk babies
बरसात में भीगा मजदूरों का सामान। - फोटो : ABOHAR
फाजिल्का रोड स्थित सहकारी स्पिनिंग मिल वाली पुडा की जगह पर बने प्रवासी मजदूरों के आशियानों को गिराने के साथ ही कुदरत का कहर भी टूट पड़ा। शुक्रवार शाम से लेकर शनिवार सुबह तक हुई बरसात में यह मजदूर सारी रात खुले आसमान के नीचे भीगते रहे। मजदूर परिवार की महिलाएं रात भर अपने नौनिहालों को आंचल में दबाए सिसकती रहीं। अपना सब कुछ उजड़ने के बाद भी उन्हें अब भी सर्वोच्च न्यायालय से कुछ न कुछ हासिल होने की उम्मीद है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है।
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इन कच्चे कमरों में रहने वाले गोपाल, लक्ष्मी शाह, विजय कुमार, उमाकांत व मंजू देवी आदि ने बताया कि उनके कच्चे आशियाने टूटते ही कुदरत का कहर भी उन पर टूट पड़ा। सारी रात रुक-रुककर हुई बरसात से अपने बच्चों और सामान को बचाने के प्रयास में वे रात भर नहीं सोए। महिलाएं रात भर सिसक-सिसक कर रोती रहीं तो कुछ उन्हें समझाने का प्रयास कर रही थीं। छोटे बच्चे मां-बाप से पूछ रहे थे कि क्या अब उन्हें कभी घर नहीं मिलेगा। गोपाल, लक्ष्मी शाह, विजय कुमार ने बताया के पुडा के अधिकारी रात को ही उन्हें यहां से समान लेकर भगाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन तहसीलदार ने उन्हें 19 नवंबर तक यहां पर रहने की अनुमति दी है। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में उनके रजाइयां व कंबल आदि गीले हो गए। ईंधन गीला होने के कारण वे रोटी भी नहीं बना पाए। अब उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से ही कुछ न कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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ज्ञात हो कि करीब 20 वर्ष पूर्व बंद हुई सहकारी स्पिनिंग मिल वाली जगह को पुडा ने खरीदकर यहां पर कालोनी बनाई। लेकिन पुडा की ओर से खरीदी गई जमीन के कुछ हिस्से पर मिल में कार्य करने वाले प्रवासी मजदूरों के करीब 20 परिवार रह रहे थे। पुडा ने जब इन्हें जगह खाली करने को कहा तो मजदूरों ने इस जगह के बदले रहने के लिए दूसरी जगह देने की मांग करते हुए अदालत की शरण ली। कई वर्षों तक चली अदालती कार्रवाई में स्थानीय अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक मजदूरों के खिलाफ और पुडा के पक्ष में फैसला हुआ। हालांकि इस फैसले के विरोध में मजदूरों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिस पर 18 नवंबर को सुनवाई होनी है। लेकिन उससे पूर्व ही पुडा के अधिकारियों ने शनिवार को इनके आशियाने खंडहर में बदल दिए।
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रोबिनहुड आर्मी ने पहुंचाया भोजन
प्रवासी मजदूरों की स्थिति का पता चलते ही शहर की समाज सेवी संस्था रोबिन हुड आर्मी ने इन मजदूरों के लिए लंगर तैयार करवाया और रात से भूखे बैठे लोगों को लंगर खिलाया। संस्था के सेवादार अजय तंवर ने बताया कि जब तक यह मजदूर यहां पर हैं तब उनकी हर संभव मदद की जाएगी और शाम के लिए भी लंगर की व्यवस्था उनकी संस्था की ओर से की जाएगी। वहीं बेघर हुए मजदूरों ने लोगों से सर्दी से बचने के लिए कपड़े आदि देने की अपील की है।

मलबे पर बैठी महिलाएं व बच्चे।

मलबे पर बैठी महिलाएं व बच्चे।- फोटो : ABOHAR

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