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किसानों ने 14 अक्तूबर तक बढ़ाया आंदोलन, 25 को 800 गांवों में फूंके जाएंगे केंद्र के पुतले

Sun, 11 Oct 2020 07:48 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Sun, 11 Oct 2020 07:48 PM IST
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Farm laws: Rail Roko Andolan of Farmers extended till 14 october in Punjab
फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन के नजदीक रेल पटरी पर धरना देते हुए किसान संगठन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

किसानों ने रेल रोको आंदोलन 14 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है। 23 अक्तूबर को अमृतसर में किसान जत्थेबंदियां मोदी सरकार और कारपोरेट घरानों के बड़े पुतले मैदानों में खड़े करके दहन करेंगी। इसके अलावा 25 अक्तूबर को भी प्रदेश के 800 गांवों में इसी तरह पुतले फूंके जाएंगे। वहीं रविवार को किसानों का 18वें दिन भी रेलवे ट्रैक पर धरना जारी रहा। किसानों ने पंजाब में लगभग 28 स्थानों पर धरना देकर रेल यातायात ठप किया हुआ है।

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किसान नेता सतनाम सिंह पन्नू, सरवन सिंह व इंद्रजीत सिंह ने कहा कि मालगाड़ियों के न चलने के कारण कोयले, खाद, डीजल, पेट्रोल व अन्य सामग्री की कोई कमी नहीं आई है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह झूठ बोल रहे हैं, कोयला छह माह तक का पड़ा है। चंडीगढ़ तक मालगाड़ियां आ रही है, वहां से ट्रकों के जरिये सामग्री आ सकती है।
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किसानों की समस्या का हल करने को पहले करें मोदी-कैप्टन
शिअद (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया है कि किसानों के मौजूदा संकट को हल करने के लिए न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रयास कर रहे हैं। किसान संगठनों के साथ बातचीत करने के लिए प्रधानमंत्री खुद पहल करें। वे किसानों की बात सुनें क्योंकि सरकारी अधिकारी इस मसले का हल नहीं निकाल पाएंगे। सुखबीर बादल रविवार को अपनी पत्नी पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और बच्चों के साथ श्री हरमंदिर साहिब में अरदास करने के बाद सूचना केंद्र कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि यदि केंद्र और पंजाब सरकार ने इस संकट के हल के गंभीर प्रयास न किए तो इसके परिणाम घातक होंगे। पंजाब सरकार द्वारा किसानों के साथ बातचीत करने के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी किसानों पर दबाव डालने के लिए है। इस कमेटी का काम किसानों की समस्या का हल करना नहीं, बल्कि उन पर दबाव डाल कर उन्हें धरना उठाने के लिए मनाना है। कैप्टन अमरिंदर जनप्रतिनिधि हैं। उनका फर्ज है कि वह किसानों के मसले पर बातचीत करने के लिए खुद दिल्ली जाएं लेकिन वे अपने फार्म हाउस से बाहर नहीं निकलते।

यदि प्रदेश के सीएम का रवैया यही रहा तो किसानों की समस्या का हल नहीं होगा। इस मामले के हल के लिए सभी पार्टियों को एकजुट होना पडे़गा। शिअद इस प्रकार के किसी भी प्रयास में पीछे चलने को तैयार है। इससे पहले बादल परिवार ने अरदास की और पवित्र परिक्रमा के दर्शन किए।
 

25 अक्तूबर को प्रदेश के गांवों में अर्थी फूंक प्रदर्शन

25 अक्तूबर को प्रदेश भर के गांवों में अर्थी फूंक प्रदर्शन किए जाएंगे। गुरदासपुर और पठानकोट में कृषि कानूनों के विरोध में धरना जारी रहा।  होशियारपुर में जालंधर पठानकोट हाईवे पर चौलान्ग टोल प्लाजा पर किसान जत्थेबंदी दोआबा किसान कमेटी की ओर से खेती कानूनों के विरोध में लगाया गया धरना रविवार को सातवें दिन भी जारी रहा। 

किसानों ने प्रधान जंगवीर सिंह चौहान के नेतृत्व में विशाल रोष मार्च निकाला। मुक्तसर में कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में रविवार को मुक्तसर विकास मिशन के पदाधिकारियों ने शामिल होकर किसानों को समर्थन दिया। वहीं गांव भलाईआणा में आयोजित किसान रैली में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान ने आरोप लगाया कि कृषि कानूनों को पास करने में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल दोनों का हाथ है। 

थर्मल प्लांट में कोयलों की कमी के मुद्दे पर मान ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली मामले में लोगों और किसानों में फूट डाल रहे हैं। पटियाला में रविवार को भी भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसानों ने गांव धबलान के रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पर धरना दिया, वहीं कल्याण रोड और पटियाला-राजपुरा रोड पर गांव धरहेड़ी जट्टां के पास टोल प्लाजा पर किसान धरने पर बैठे रहे। 

रेलवे ट्रैक और टोल प्लाजा बंद, किसानों के धरने जारी

पटियाला। केंद्र सरकार द्वारा पास किए खेती कानूनों के खिलाफ किसानों का गुस्सा थमता नजर नहीं आ रहा है। रविवार को भी भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के बैनर तले बड़ी गिनती किसानों ने गांव धबलान के रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पर धरना दिया, वहीं कल्याण रोड और पटियाला-राजपुरा रोड पर गांव धरहेड़ी जट्टां के पास टोल प्लाजा पर किसान धरने पर बैठे रहे। इस मौके पर खेती कानूनों को वापस लेने की मांग की गई।

किसान नेता अवतार सिंह कौरजीवाला, मनजीत सिंह न्याल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए खेती कानून किसानों व मजदूरों को तबाह कर देंगे। इन तीनों कानूनों से पंजाब का मंडी प्रबंध पूरी तरह से तहस-नहस हो जाएगा। राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर की सरकारी खरीद एजेंसियां मंडी से बाहर हो जाएंगी और किसानों को अपनी फसल के लिए कारपोरेट घरानों व बड़े प्राइवेट व्यापारियों के रहमो करम पर छोड़ दिया जाएगा। इसलिए इन खेती कानूनों को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा।

खेती कानूनों के विरोध में किसानों ने निकाला रोष मार्च
टांडा उड़मुड़ (होशियारपुर)। जालंधर पठानकोट हाईवे पर चौलान्ग टोल प्लाजा पर किसान जत्थेबंदी दोआबा किसान कमेटी की ओर से खेती कानूनों के विरोध में लगाया गया धरना रविवार को सातवें दिन भी जारी रहा। किसानों ने प्रधान जंगवीर सिंह चौहान के नेतृत्व में विशाल रोष मार्च निकाला।

गुरदासपुर में रेल रोको आंदोलन 12वें दिन भी जारी

तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों की ओर से रेल रोको आंदोलन रविवार को 12वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन का  नेतृत्व जसबीर सिंह, मक्खन सिंह कोहाड़, तरलोक सिंह, सुखदेव सिंह, गुरदीप सिंह, कंवलजीत सिंह, डा. अशोक भारती ने किया। किसानों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बार-बार यही बात कह रहे हैं कि एमएसपी खत्म नहीं होगी, लेकिन इस बारे में अलग कानून क्यों नहीं पास करते। नेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि पंजाब के लोग अपना हक लेने के लिए अच्छी तरह से जानते है। इस मौके पर जगजीत सिंह, हरजीत सिंह, गुलजार सिंह, तरलोक सिंह, चन्नण सिंह, वरिंदर सिंह, सविंदरजीत सिंह, सुखदेव सिंह, दलीप सिंह, कुलबीर सिंह गोराया, गुरदीप सिंह, बलविंदर सिंह, टहल सिंह, बलदेव सिंह आदि उपस्थित थे।
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