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पंजाब: क्या है छह हजार करोड़ का ड्रग्स केस, अब बिक्रम मजीठिया पर दर्ज हुआ मामला, पढ़ें सियासी मायने

Tue, 21 Dec 2021 10:12 PM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 21 Dec 2021 10:12 PM IST
सार

पंजाब भाजपा कार्यकारिणी के सदस्य अमित तनेजा का कहना है कि पंजाब की जवानी को बर्बाद करने वालों का चेहरा बेनकाब होना जरूरी है। भाजपा नशे के मुद्दे को लेकर कांग्रेस व अकाली दल दोनों को घेरेगी। कांग्रेस सरकार ने भी नशे पर क्या किया है, आज भी नशा बिक रहा है।

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Drug smuggling worth thousands of crores again became an election issue in Punjab
बिक्रम सिंह मजीठिया। - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब में विधानसभा चुनाव सिर पर आ गए हैं और छह हजार करोड़ का नशे का कारोबार सूबे में चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है। 2017 में भी ड्रग पंजाब का सबसे अहम चुनावी मुद्दा था। अकाली दल के माझा के जरनैल बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ ड्रग का मामला दर्ज होने के बाद अकाली दल बुरी तरह से बैकफुट पर आ गया है और 2022 के विधानसभा चुनावों में अकाली दल को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ेगी। 

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अभी तक अकाली दल के बिक्रम सिंह मजीठिया जहां माझा में पूरा ताकत झोंक रहे थे वहीं दोआबा में अकाली दल के लिए पूरा खाका तैयार कर बैठे थे। मजीठिया जहां स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एसओआई) का आईकॉन बने थे, वहीं युवा अकाली दल की रीढ़ की हड्डी बनकर युवाओं को आगे ला रहे थे।
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सियासी मायने:  शिअद की चुनावी रणनीति बनाने वाले अहम नेता, पार्टी को लगा झटका
दअसल, सुखबीर बादल व हरसिमरत कौर बादल मालवा से हैं और माझा में उनकी कमान मजीठिया ने संभाल रखी थी। अकाली दल के कई दिग्गज माझा में अकाली दल से निकल चुके थे, जिसमें ब्रह्मपुरा के अलावा सेखवां व बुलारिया का परिवार का शामिल है। पंजाब के दोआबा में 23 व माझा में 25 सीट हैं। जिन पर अकाली दल के मजीठिया अपनी रणनीति तैयार करके बैठे थे। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि 2012 के चुनाव में मजीठिया ने दोआबा व माझा में अकाली दल के लिए रणनीति तैयार की थी, जिसकी बदौलत लगातार दूसरी बार अकाली दल की सरकार बनी थी। अब माझा में विरसा सिंह वल्टोहा व दोआबा में बीबी जागीर कौर हैं जो चुनावी मुहिम को आगे ले जा सकते हैं लेकिन दिक्कत यह है कि दोनों खुद चुनाव मैदान में हैं। 

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राजनीति में मजीठिया की एंट्री 2007 में हुई थी, इससे पहले शिअद की माझा में कमान सेवा सिंह सेखवां, रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा, रतन सिंह अजनाला, सुच्चा सिंह लंगाह, विरसा सिंह वल्टोहा और कैरों परिवार के हाथ में थी। 2007 में मजीठिया की शिअद में एंट्री दमदार तरीके से हुई तो तमाम पुराने टकसाली दमदार नेता दरकिनार होने लगे। 

सत्ता का केंद्र बिंदू मजीठिया बन गए। 2012 में मजीठिया अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 47581 वोट से हराकर चुने गए तो उनको कैबिनेट मंत्री का पद दे दिया गया। मजीठिया शक्तिशाली होते चले गए और जो मजीठिया के रास्ते में आया, उसको शिअद से बाहर का रास्ता दिखाया जाता रहा। मजीठिया ने अकाली दल की दोनों युवा इकाई में पूरी जान फूंक रखी थी। दोआबा के तमाम एसओआई के नेता मजीठिया के यहां हाजिरी भरने जाते हैं, वहीं युवा अकाली दल के नेता भी मजीठिया के बिना एक कदम नहीं चलते। 

कैसे आया मजीठिया का नाम
पंजाब पुलिस के बर्खास्त डीएसपी जगदीश भोला के साथ करोड़ों रुपयों की ड्रग तस्करी संबंधी बनूड़ पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर नंबर-56 स्टेट बनाम सतिंदर धामा केस में मंगलवार सीनियर अकाली नेता डॉ. रतन सिंह अजनाला के पुत्र अमरपाल सिंह बोनी अजनाला की गवाही हुई जिन्होंने अपने बयान में अकाली नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की पोल खोलकर रख दी। इससे पहले ड्रग रैकेट का सरगना भोला पुलिस कस्टडी में मजीठिया के नाम का खुलासा कर चुका था। 

अजनाला इस केस में आरोपी मनिन्द्र सिंह बिट्टू औलख के गवाह के तौर पर पेश हुए थे। अपने बयान में बोनी अजनाला ने कहा कि वह गत अकाली सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2013 से 2017 तक चीफ संसदीय सचिव रह चुका है। उसने बयान में बताया था कि वर्ष 2005 में उसने बिट्टू औलख को मजीठिया से मिलवाया था जिस दौरान मजीठिया और बिट्टू के अच्छे संबंध बन गए थे।

जांच में बोनी अजनाला व बिट्टू एंगल के अलावा कनाडा के रहने वाले सतप्रीत सत्ता और परबिंदर पिंदी का नाम आया जो आइस ड्रग के कारोबार में लिप्त थे। इन दोनों की ही मजीठिया से नजदीकी थी। दोनों मजीठिया की शादी में शामिल होने भारत भी आए थे। सत्ता जब भी भारत आता तो मजीठिया ही उसको गनर, गाड़ी और चालक उपलब्ध करवाते थे। ड्रग के कारोबार में एक बार पैसे के लेनदेन को लेकर तस्करों में कड़वाहट आई थी, जिसे बिट्टू ने मजीठिया से कहकर सुलझाया था।

फतेहगढ़ साहब में ड्रग रैकेट पकड़ा तो मचा शोर शराबा
पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में मार्च 2013 में कनाडा के एनआरआई अनूप सिंह कहलो की गिरफ्तारी से छह हजार करोड़ के अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी रैकेट का खुलासा हुआ था। ड्रग तस्करी में गिरफ्तार बर्खास्त डीएसपी जगदीश भोला ने नवंबर में इस रैकेट में मजीठिया के शामिल होने का आरोप लगाकर सनसनी मचा दी। भोला के खुलासे के आधार पर अमृतसर के फार्मा कंपनी चलाने वाले नेता बिट्टू औलख और जगदीश सिंह चहल को भी पूछताछ कर गिरफ्तार किया गया था।

चहल के अनुसार, मजीठिया ने भारत यात्रा के दौरान एनआरआई सत्ता को दो सुरक्षाकर्मी और एक ड्राइवर मुहैया कराया था। सूत्रों के मुताबिक मजीठिया को हवाला के जरिए 70 लाख रुपये दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। चहल मादक पदार्थ बनाने के लिए एफेड्रिन और स्यूडोफेड्रिन केमिकल की आपूर्ति करता था।

पंजाब में हर साल करीब एक हजार किलो हेरोइन की बरामदगी होती है। यह खेप पाक से भेजी जाती है और आगे पंजाब में जहां बिक्री होती है, वहीं विदेश में भी सप्लाई की जाती है। 

चुनाव के दौरान जनता हिसाब मांगेगी
आप के पंजाब प्रभारी जरनैल सिंह का कहना है कि 2018 की रिपोर्ट पर 2021 में कार्रवाई वह भी चुनाव से पहले, जनता सब जानती है, यह अकाली दल कांग्रेस का फिक्स मैच है। सब खानापूर्ति है और हम चुनाव में यह बात जोर शोर से उठाएंगे और जनता हिसाब भी मांगेगी। 

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