{"_id":"577a962f4f1c1b72027fa1d8","slug":"court-case-sukhbir-badal-faridkot","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुखबीर बादल की अदालत में पेशी आज ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुखबीर बादल की अदालत में पेशी आज
ब्यूरो,अमर उजाला/फरीदकोट
Updated Mon, 04 Jul 2016 10:31 PM IST
विज्ञापन
सुखबीर बादल
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साल 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान पत्रकार से मारपीट करने व कैमरे छीनने की घटना में जेएमआईसी सतीश कुमार की अदालत ने बीती 2 अप्रैल को उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
इस फैसले को शिकायतकर्ता नरेश कुमार सहगल ने जिला व सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। इस अपील को स्वीकार करते हुए दो माह पहले 5 मई को सेशन कोर्ट ने उप मुख्यमंत्री को 5 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर अदालत के समक्ष पेश होने के लिए आदेश जारी किए थे।
जिला व सेशन कोर्ट में दायर अपील में शिकायतकर्ता नरेश कुमार सहगल ने दावा किया कि निचली अदालत में केस की सुनवाई के दौरान केस के कई अहम तथ्यों को अनदेखा किया गया है।
विज्ञापन
निचली अदालत में शिकायतकर्ता पक्ष की तरफ से पेश गवाहियों व सुबूतों पर विचार नहीं किया गया। ऐसे में निचली अदालत का फैसला उसे मान्य नहीं है। इस अपील को स्वीकार करते हुए जिला अदालत ने सुखबीर बादल को निजी रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए थे।
गौरतलब है कि यह मामला घटना के करीब सात वर्षों बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों पर 30 जून 2006 को थाना सिटी कोटकपूरा में दर्ज हुआ था। इस केस पर हाईकोर्ट ने ही लंबे समय पर सुनवाई पर रोक लगा रखी थी और कुछ माह पहले ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत को केस की सुनवाई दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
इस फैसले को शिकायतकर्ता नरेश कुमार सहगल ने जिला व सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। इस अपील को स्वीकार करते हुए दो माह पहले 5 मई को सेशन कोर्ट ने उप मुख्यमंत्री को 5 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर अदालत के समक्ष पेश होने के लिए आदेश जारी किए थे।
विज्ञापन
जिला व सेशन कोर्ट में दायर अपील में शिकायतकर्ता नरेश कुमार सहगल ने दावा किया कि निचली अदालत में केस की सुनवाई के दौरान केस के कई अहम तथ्यों को अनदेखा किया गया है।
विज्ञापन
निचली अदालत में शिकायतकर्ता पक्ष की तरफ से पेश गवाहियों व सुबूतों पर विचार नहीं किया गया। ऐसे में निचली अदालत का फैसला उसे मान्य नहीं है। इस अपील को स्वीकार करते हुए जिला अदालत ने सुखबीर बादल को निजी रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए थे।
गौरतलब है कि यह मामला घटना के करीब सात वर्षों बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों पर 30 जून 2006 को थाना सिटी कोटकपूरा में दर्ज हुआ था। इस केस पर हाईकोर्ट ने ही लंबे समय पर सुनवाई पर रोक लगा रखी थी और कुछ माह पहले ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत को केस की सुनवाई दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए थे।