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सैन्य सम्मान से हुआ बीएसएफ जवान का अंतिम संस्कार
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पठानकोट। जम्मू कश्मीर के आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्र राजौरी सेक्टर के सुंदरबनी क्षेत्र में तैनात बीएसएफ की 69 बटालियन के कांस्टेबल राकेश डोगरा का मंगलवार को ड्यूटी के दौरान ह्रदयगति रुकने से निधन हो गया। स्थानीय चक्की पुल स्थित श्मशानघाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
माधोपुर से आई बीएसएफ की 121 बटालियन के जवानों ने कांस्टेबल राकेश कुमार को सलामी दी। स्थानीय बैंक कालोनी अंगूरा वाली गली में दिवंगत सैनिक की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह उनके निवास स्थान पर पहुंचीं तो माहौल अत्यंत गमगीन हो गया। मृतक सैनिक की मां ऊषा देवी और पत्नी रीटा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था।
मृतक कांस्टेबल राकेश कुमार के 15 वर्षीय बेटे युगराज ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी तो श्मशानघाट पर मौजूद हर आंख नम हो गई। इस मौके पर 121 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट एन बक्सल, दिवंगत सैनिक की पार्थिव देह को लेकर आए उनकी यूनिट के इंस्पेक्टर गंभीर सिंह, हेड कांस्टेबल बलदेव सिंह, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी शर्मा, मृतक सैनिक की माता ऊषा देवी, पत्नी रीटा देवी, बेटा युगराज सिंह, भाई बिक्रमजीत सिंह ने कांस्टेबल राकेश की तिरंगे में लिपटे पार्थिव देह को अश्रुपूर्ण अंतिम विदाई दी।
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पत्नी बोली, साढ़े सात बजे फोन पर हुई बात, एक घंटे बाद मौत की खबर
कांस्टेबल राकेश कुमार की पत्नी रीटा देवी ने नम आंखों से बताया कि मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे उनकी अपने पति से फोन पर बात हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि वह ठीक हैं। उन्होंने बताया कि वह ड्यूटी पर तैनात हैं। एक घंटे बाद उनकी मौत की खबर ने उन्हें स्तब्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति गत माह 11 जुलाई को ही छुट्टी से लौटे थे। मां ऊषा देवी ने सजल नेत्रों से बताया कि राकेश का छोटा भाई संदीप सिंह भी भारतीय सेना में कारगिल में तैनात है, जो छुट्टी न मिलने के कारण बड़े भाई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका।
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माधोपुर से आई बीएसएफ की 121 बटालियन के जवानों ने कांस्टेबल राकेश कुमार को सलामी दी। स्थानीय बैंक कालोनी अंगूरा वाली गली में दिवंगत सैनिक की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह उनके निवास स्थान पर पहुंचीं तो माहौल अत्यंत गमगीन हो गया। मृतक सैनिक की मां ऊषा देवी और पत्नी रीटा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था।
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मृतक कांस्टेबल राकेश कुमार के 15 वर्षीय बेटे युगराज ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी तो श्मशानघाट पर मौजूद हर आंख नम हो गई। इस मौके पर 121 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट एन बक्सल, दिवंगत सैनिक की पार्थिव देह को लेकर आए उनकी यूनिट के इंस्पेक्टर गंभीर सिंह, हेड कांस्टेबल बलदेव सिंह, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी शर्मा, मृतक सैनिक की माता ऊषा देवी, पत्नी रीटा देवी, बेटा युगराज सिंह, भाई बिक्रमजीत सिंह ने कांस्टेबल राकेश की तिरंगे में लिपटे पार्थिव देह को अश्रुपूर्ण अंतिम विदाई दी।
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पत्नी बोली, साढ़े सात बजे फोन पर हुई बात, एक घंटे बाद मौत की खबर
कांस्टेबल राकेश कुमार की पत्नी रीटा देवी ने नम आंखों से बताया कि मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे उनकी अपने पति से फोन पर बात हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि वह ठीक हैं। उन्होंने बताया कि वह ड्यूटी पर तैनात हैं। एक घंटे बाद उनकी मौत की खबर ने उन्हें स्तब्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति गत माह 11 जुलाई को ही छुट्टी से लौटे थे। मां ऊषा देवी ने सजल नेत्रों से बताया कि राकेश का छोटा भाई संदीप सिंह भी भारतीय सेना में कारगिल में तैनात है, जो छुट्टी न मिलने के कारण बड़े भाई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका।