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बहिबल गोलीकांड ः अब गवाह रेशम सिंह ने बताया जान का खतरा

Wed, 19 Feb 2020 10:48 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 10:48 PM IST
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Bahubal firing: Now witness Resham Singh said that he was in danger of life
फरीदकोट में जानकारी देते बहिबल गोलीकांड केस के गवाह रेशम सिंह। - फोटो : FARIDKOT
बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित बहिबल गोलीकांड केस के मुख्य गवाह सुरजीत सिंह की मौत के बाद उठे बवाल के बीच अब एक और गवाह गांव बहिबल खुर्द निवासी रेशम सिंह ने भी अपनी जान को खतरा होने का दावा किया है। उसने गवर्नर को शिकायत भेजकर जांच कराए गुहार लगाई है। शिकायतकर्ता रेशम सिंह, बहिबल गोलीकांड की घटना में मारे गए किशन भगवान सिंह का छोटा भाई है और उस पर करीब डेढ़ साल पहले भी जानलेवा हमला हुआ था जिसके आरोपियों की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है।
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पत्र में रेशम सिंह ने बताया कि बहिबल गोलीकांड केस का वह प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी है और घटना के समय वह अपने भाई किशन भगवान सिंह समेत अन्य संगत के साथ उस धरने में शामिल था जिस पर पुलिस नेफायरिंग की थी। इसमें उसके भाई समेत गांव सरावां के गुरजीत सिंह की मौत हो गई थी। इस घटना में कोई कार्रवाई ना किए जाने पर उसने सबसे पहले फरवरी 2017 में फरीदकोट अदालत में कथित आरोपी एसएसपी मोगा चरनजीत शर्मा, एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह, एसएसपी मोगा के रीडर प्रदीप सिंह, डीएसपी जलालाबाद हरजिंदर सिंह गिल, एडीसीपी लुधियाना परमजीत सिंह पन्नू, डीएसपी साहनेवाल तेजवीर सिंह, इंस्पेक्टर मनजिंदर सिंह बेदी, इंस्पेक्टर संदीप बढ़ेरा, इंस्पेक्टर दलबीर सिंह व लुधियाना से आई पुलिस पार्टी के खिलाफ वाद दायर किया था, जिस पर सुनवाई चल रही है।
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साथ ही वर्तमान सरकार की ओर से गठित एसआईटी के पास भी अपना बयान दर्ज करवाया था। रेशम सिंह ने आरोप लगाया कि अदालत में वाद दायर करने और बहिबल गोलीकांड केस में गवाह होने के चलते ही अक्टूबर 2018 में उस पर जानलेवा हमला करवाया गया था, जिसके संबंध में 27 अक्टूबर 2018 को थाना बाजाखाना में अज्ञात के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ। पुलिस अभी तक हमले के आरोपियों की की शिनाख्त तक नहीं कर पाई है। रेशन में गवर्नर से बहिबल गोलीकांड केस से संबंधित गवाहों को सुरक्षा प्रदान करवाने और केस की अपने स्तर पर पड़ताल करने की मांग की है।
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केस प्रभावित करने के आरोप में घिरे एक और मंत्री
गवर्नर को भेजी शिकायत में रेशम सिंह ने कहा कि केस की जांच कर रही एसआईटी ने राजनीतिक प्रभाव के चलते ही बहिबल गोलीकांड मामले में डीएसपी हरजिंदर सिंह व उनके रिश्तेदार परमजीत सिंह पन्नू को क्लीनचिट दे दी, जबकि इन दोनों के नाम तत्कालीन शिअद सरकार के कार्यकाल में वाली एफआईआर में दर्ज थे। रेशम सिंह का दावा है कि यह अधिकारी राज्य के एक सीनियर कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदार है। इसके अलावा बहिबल केस की जांच के दौरान जिस व्यक्ति के हथियार से पुलिस जिप्सी पर झूठे फायर करके कहानी गढ़ी गई और जिस व्यक्ति के घर में पुलिस जिप्सी ले जाकर कर फायर किए गए, उन्हें पुलिस ने आरोपी ही नहीं बनाया, जिससे स्पष्ट हो चुका है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार सिर्फ सिखों की भावनाओं पर राजनीति कर रही है।

गोलीकांड मामलों की सुनवाई 6 मार्च तक स्थगित
बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड मामलों की सुनवाई बुधवार को जिला व सेशन जज की अदालत में होनी थी। सेशन जज के न होने की वजह से अतिरिक्त जिला व सेशन जज हरबंस सिंह लेखी की अदालत ने दोनों ही मामलों की सुनवाई 6 मार्च तक स्थगित कर दी है। इस दौरान कोटकपूरा केस में एक आरोपी एसपी परमजीत सिंह पन्नू को छोड़कर बाकी सभी पांचों आरोपी पूर्व शिअद विधायक मनतार सिंह बराड़, आईजी परमराज उमरानंगल, पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा, एसपी बलजीत सिंह व एसआई गुरदीप सिंह हाजिर रहे जबकि पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा ने बहिबल गोलीकांड केस में भी अपनी हाजिरी लगवाई।
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