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नगर निगम ने ढहाया सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण
Jalandhar
Updated Fri, 01 Feb 2013 05:30 AM IST
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जालंधर। नगर निगम प्रशासन ने अमृतसर-दिल्ली नेशनल हाइवे स्थित सरकारी जमीन पर निर्माणाधीन इमारतों व दुकानों को ध्वस्त कर दिया है। इस निर्माण को लेकर काफी दिनों से विवाद चल रहा था। शिकायत के बाद विजिलेंस ब्यूरो मामले की जांच कर रहा है।
आरोप लगाया गया था कि सरकारी जमीन को माफिया ने आगे करोड़ो ंमें बेच डाला था और वहां पर धड़ल्ले से दुकानें व इमारतें तैयार हो रही थीं। इसे लेकर भाजपा के नेताओं पर भी मिलीभगत के आरोप लगे थे। इस मामले को सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी की युवा मोर्चा के प्रधान मिंटा कोछड़ ने उठाया था। उन्होंने नगर निगम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था जिसे लेकर उनकी मेयर सुनील ज्योति से ठन भी गई थी। यह मामला पार्टी प्रधान कमल शर्मा व स्थानीय निकायमंत्री भगत चुन्नी लाल के पास पहुंचा था। इस मामले की विजिलेंस जांच भी शुरू हो गई थी और विजिलेंस ने इसकी नेगटिव रिपोर्ट फाइल की थी।
इस जमीन पर सात दुकानों का निर्माण कर दिया गया था, जिसको लेकर काफी शोर शराबा मचता रहा। आरोप था कि सरकारी जमीन पर बनी दुकानों को 20-20 लाख में आगे बेचा जा रहा है। लेकिन मेयर सुनील ज्योति व नगर निगम कमिश्नर विनय बुबलानी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो जब इस मामले की शिकायत विजिलेंस के पास की गई। विजिलेंस ने जांच में पाया कि निर्माण में गड़बड़ी की गई और सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया है।
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यह है मामला
करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा कर बेचने और अवैध निर्माण पर कार्रवाई करना प्रशासन की मजबूरी बन गया था क्योंकि इसकी शिकायत स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को की गई थी। शहर के एक जागरूक नागरिक ने विजिलेंस ब्यूरो को टोल फ्री नंबर पर इस घालमेल की शिकायत की थी। इसके बाद चंडीगढ़ के विजिलेंस मुख्यालय से आदेश जारी हुए। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के आर्थिक अपराध शाखा के एसएसपी ने शिकायतकर्ता को बुलाया और बयान कलमबद्ध किए। इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी सतपाल को कार्रवाई व रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया। विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी ने सब इंस्पेक्टर भूपिंदर सिंह को ठोस कार्रवाई व रिपोर्ट के लिए कहा।
विजिलेंस की टीम ने इलाका पटवारी को जांच में शामिल किया तो कड़ियां खुलने लगीं और साफ हुआ कि यह जमीन सरकारी है, जिस पर लैंड माफिया करोड़ों के वारे न्यारे कर रहा है। इसके बाद नगर निगम की डिच मशीनों ने दिन निकलते ही संजय गांधी नगर का रुख कर लिया और इमारतों व दुकानों को मलबे में बदल दिया।
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आरोप लगाया गया था कि सरकारी जमीन को माफिया ने आगे करोड़ो ंमें बेच डाला था और वहां पर धड़ल्ले से दुकानें व इमारतें तैयार हो रही थीं। इसे लेकर भाजपा के नेताओं पर भी मिलीभगत के आरोप लगे थे। इस मामले को सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी की युवा मोर्चा के प्रधान मिंटा कोछड़ ने उठाया था। उन्होंने नगर निगम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था जिसे लेकर उनकी मेयर सुनील ज्योति से ठन भी गई थी। यह मामला पार्टी प्रधान कमल शर्मा व स्थानीय निकायमंत्री भगत चुन्नी लाल के पास पहुंचा था। इस मामले की विजिलेंस जांच भी शुरू हो गई थी और विजिलेंस ने इसकी नेगटिव रिपोर्ट फाइल की थी।
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इस जमीन पर सात दुकानों का निर्माण कर दिया गया था, जिसको लेकर काफी शोर शराबा मचता रहा। आरोप था कि सरकारी जमीन पर बनी दुकानों को 20-20 लाख में आगे बेचा जा रहा है। लेकिन मेयर सुनील ज्योति व नगर निगम कमिश्नर विनय बुबलानी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो जब इस मामले की शिकायत विजिलेंस के पास की गई। विजिलेंस ने जांच में पाया कि निर्माण में गड़बड़ी की गई और सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया है।
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यह है मामला
करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा कर बेचने और अवैध निर्माण पर कार्रवाई करना प्रशासन की मजबूरी बन गया था क्योंकि इसकी शिकायत स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को की गई थी। शहर के एक जागरूक नागरिक ने विजिलेंस ब्यूरो को टोल फ्री नंबर पर इस घालमेल की शिकायत की थी। इसके बाद चंडीगढ़ के विजिलेंस मुख्यालय से आदेश जारी हुए। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के आर्थिक अपराध शाखा के एसएसपी ने शिकायतकर्ता को बुलाया और बयान कलमबद्ध किए। इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी सतपाल को कार्रवाई व रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया। विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी ने सब इंस्पेक्टर भूपिंदर सिंह को ठोस कार्रवाई व रिपोर्ट के लिए कहा।
विजिलेंस की टीम ने इलाका पटवारी को जांच में शामिल किया तो कड़ियां खुलने लगीं और साफ हुआ कि यह जमीन सरकारी है, जिस पर लैंड माफिया करोड़ों के वारे न्यारे कर रहा है। इसके बाद नगर निगम की डिच मशीनों ने दिन निकलते ही संजय गांधी नगर का रुख कर लिया और इमारतों व दुकानों को मलबे में बदल दिया।