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लेफ्टिनेंट गुरबिंदर सिंह को दी श्रद्धांजलि
Jalandhar
Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
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जालंधर। 23 साल की उम्र में ही लेफ्टिनेंट बने गुरबिंदर सिंह ने 10 दिसंबर 2001 को पुंछ में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहादत का जाम पी लिया। आवह कर दिखाया था, जिसके लिए आने वाली पीढ़ियां भी उनको भुला नहीं पाएंगी। उनकी याद में गुरुद्वारा तल्हण साहब में अखंड पाठ का भोग डाला गया। लेफ्टिनेंट गुरबिंदर सिंह के पिता अजीत सिंह बार्डर सिक्योरिटी फोर्स में तैनात थे। जवान बेटे की मौत ने उनको हिलाकर रख दिया, लेकिन एक सच्चे फौजी की तरह उनके कदम डगमगाए नहीं और अपने दूसरे बेटे कर्नल खुशविंदर सिंह को भी सहारा व हौसला दिया। अजीत सिंह को इंस्पेक्टर के पद से प्रोमोशन देकर सहायक कमांडेंट बीएसएफ बनाने के आदेश हुए, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और बीएसएफ से रिटायरमेंट ले ली। देश के लिए शहीद हुए गुरबिंदर सिंह की 11वीं बरसी पर उनको श्रद्धांजलि देने के लिए भारी तादाद में सोमवार को लोग तल्हण साहब गुरुद्वारा में नतमस्तक हुए।
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