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रोटी खाने से परिवार के पांच सदस्य बीमार
अमर उजाला (जैतो/फरीदकोट)
Updated Wed, 23 Apr 2014 10:42 PM IST
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राज्य सरकार की आटा-दाल स्कीम के तहत डिपुओं पर घटिया क्वालिटी की गेहूं सप्लाई हो रही है। एक रुपये किलो वाले इस गेहूं की रोटी खाने से जैतो में एक परिवार के पांच सदस्यों के बीमार होने का मामला सामने आया है।
इन्हें बुधवार को सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया है। पीड़ित परिवार का बयान लेने के बावजूद न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की है और न ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है।
सिविल अस्पताल में दाखिल मुक्तसर रोड के कोठे देहाती निवासी रेशम सिंह ने बताया कि उन्होंने चार-पांच दिन पहले बस स्टैंड के पास सरकारी राशन डिपो से गेहूं लिया था। मंगलवार शाम उन्होंने उस गेहूं के आटे से रोटी तैयार की थी। रात को उनके समेत पत्नी कुलविंदर कौर, बेटे गुरप्रीत सिंह, बेटी बलविंदर कौर व पौत्री हरमन रोटी खा कर सो गए। बुधवार सुबह उठते ही सबको चक्कर आने लगे। रेशम सिंह व बलविंदर कौर को उलटियां आने लगीं।
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हालत बिगड़ने पर इन सबको सिविल अस्पताल भर्ती करवाया गया है। थाना जैतो पुलिस ने पीड़ित परिवार का बयान दर्ज कर लिया है लेकिन देर शाम तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
थाना प्रभारी के अनुसार उनकी ड्यूटी बठिंडा में लग गई है और वे यहां से वापस लौट कर ही पड़ताल करेंगे। एसएमओ वरिंद्र कुमार का कहना है कि खानपान की वजह से ही परिवार की हालत बिगड़ी है। यदि हालत में सुधार न हुआ तो उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर किया जाएगा। वहीं सिविल सर्जन डॉ. सुरिंदर कुमार ने भी मामले से अभिज्ञानता जताते हुए बताया कि उनके पास इस घटना के बारे में अभी तक एसएमओ जैतो से कोई रिपोर्ट नहीं आई है।
सैंपल भी हो चुके हैं फेल
फरीदकोट। आटा-दाल स्कीम के तहत जिला फरीदकोट में बंट रही एक रुपये किलो वाली गेहूं से तैयार रोटी खाने से लोगों के बीमार होने का सिलसिला लगातार जारी है और इस गेहूं के सैंपल भी फेल हो चुके है। एक माह पहले फरीदकोट में मुख्यमंत्री की रैली के दौरान गांव मचकी मल्ल सिंह के एक व्यक्ति में डिपो की गेहूं के आटे से तैयार रोटियों लहराते हुए गेहूं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे।
यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने न सिर्फ गेहूं से तैयार आटे के सैंपल भरे बल्कि उससे तैयार रोटियों की भी जांच के लिए कब्जे में लिया था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उस मामले में आटे व उससे तैयार रोटियों के सैंपल फेल पाए गए हैं। मामले की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जा चुकी है।
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इन्हें बुधवार को सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया है। पीड़ित परिवार का बयान लेने के बावजूद न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की है और न ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है।
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सिविल अस्पताल में दाखिल मुक्तसर रोड के कोठे देहाती निवासी रेशम सिंह ने बताया कि उन्होंने चार-पांच दिन पहले बस स्टैंड के पास सरकारी राशन डिपो से गेहूं लिया था। मंगलवार शाम उन्होंने उस गेहूं के आटे से रोटी तैयार की थी। रात को उनके समेत पत्नी कुलविंदर कौर, बेटे गुरप्रीत सिंह, बेटी बलविंदर कौर व पौत्री हरमन रोटी खा कर सो गए। बुधवार सुबह उठते ही सबको चक्कर आने लगे। रेशम सिंह व बलविंदर कौर को उलटियां आने लगीं।
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हालत बिगड़ने पर इन सबको सिविल अस्पताल भर्ती करवाया गया है। थाना जैतो पुलिस ने पीड़ित परिवार का बयान दर्ज कर लिया है लेकिन देर शाम तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
थाना प्रभारी के अनुसार उनकी ड्यूटी बठिंडा में लग गई है और वे यहां से वापस लौट कर ही पड़ताल करेंगे। एसएमओ वरिंद्र कुमार का कहना है कि खानपान की वजह से ही परिवार की हालत बिगड़ी है। यदि हालत में सुधार न हुआ तो उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर किया जाएगा। वहीं सिविल सर्जन डॉ. सुरिंदर कुमार ने भी मामले से अभिज्ञानता जताते हुए बताया कि उनके पास इस घटना के बारे में अभी तक एसएमओ जैतो से कोई रिपोर्ट नहीं आई है।
सैंपल भी हो चुके हैं फेल
फरीदकोट। आटा-दाल स्कीम के तहत जिला फरीदकोट में बंट रही एक रुपये किलो वाली गेहूं से तैयार रोटी खाने से लोगों के बीमार होने का सिलसिला लगातार जारी है और इस गेहूं के सैंपल भी फेल हो चुके है। एक माह पहले फरीदकोट में मुख्यमंत्री की रैली के दौरान गांव मचकी मल्ल सिंह के एक व्यक्ति में डिपो की गेहूं के आटे से तैयार रोटियों लहराते हुए गेहूं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे।
यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने न सिर्फ गेहूं से तैयार आटे के सैंपल भरे बल्कि उससे तैयार रोटियों की भी जांच के लिए कब्जे में लिया था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उस मामले में आटे व उससे तैयार रोटियों के सैंपल फेल पाए गए हैं। मामले की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जा चुकी है।