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पंजाब: रोपड़ में आरएसएस के रक्तदान कैंप के विरोध में भड़के किसान, तनातनी के बाद शिविर रद्द
Thu, 20 May 2021 03:32 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, रोपड़ (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, रोपड़ (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 20 May 2021 03:32 PM IST
सार
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों की तरफ से भारतीय जनता पार्टी का लगातार विरोध किया जा रहा है। इसी कड़ी में रोपड़ में आरएसएस का भी विरोध किया गया।
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रोपड़ में प्रद्रर्शन करते किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पंजाब के नूरपुर बेदी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित किए गए रक्तदान शिविर में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब सैकड़ों किसानों ने वहां पहुंच कर हंगामा खड़ा कर दिया। नारेबाजी करते हुए किसानों ने जमकर तोड़फोड़ की और संघ कार्यकर्ताओं की घेराबंदी कर ली। काफी देर तक दोनों तरफ से नारेबाजी चलती रही। काफी जद्दोजहद के बाद डीएसपी आनंदपुर साहिब ने किसानों को शिविर स्थल से बाहर निकाला। जबकि विरोध के चलते संघ कार्यकर्ताओं को शिविर बीच में ही बंद करना पड़ा।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कोरोना काल में खून की आ रही कमी के चलते गुरुवार को नूरपुरबेदी में बाल बाबाजी ऊनावालों के आश्रम में रक्तदान शिविर लगाया था। इसकी भनक संयुक्त किसान मोर्चे को लगी तो श्रवण पैलेस में मोर्चे की आपात बैठक बुलाई गई और इसमें पहुंचने के लिए किसानों से अपील की गई, ताकि शिविर को रोका जा सके। इसे लेकर जिला पुलिस भी गंभीर हो गई और शिविर स्थल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
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बैठक में जिम्मेदारियां बांटते हुए मोर्चे ने शिविर को जानेवाले सभी रास्तों में भारी संख्या में किसान तैनात कर दिए। वे किसी भी व्यक्ति को कैंप में न जाने देने के लिए अड़े हुए थे। इसी दौरान एक दर्जन से ज्यादा नौजवान रक्तदान करने के लिए एक बीच रास्ते से शिविर में जाने लगे तो वहां लगाए पुलिस नाके के बैरिकेड को तोड़कर किसान उनके पीछे दौड़े और आश्रम को चारों तरफ से घेर लिया।
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इन किसानों ने शिविर में घुसकर वहां लगी कुर्सियों से तोड़फोड़और नारेबाजी शुरू कर दी। इनमें कुछ किसान अपने हाथों में डंडे भी लिए हुए थे। स्थिति को बिगड़ते देख मौके पर मौजूद डीएसपी आनंदपुर साहिब रमिंदर काहलों और थाना प्रभारी नूरपुर बेदी ब्रिकम सिंह काहलों ने वहां अतिरिक्त पुलिस बल बुला लिया। उन्होंने संघ कार्यकर्ताओं की घेराबंदी कर शिविर में घुसे किसानों को बाहर खदेड़ा। संघ कार्यकताओं की संख्या किसानों के मुकाबले काफी कम थी, फिर भी दोनों तरफ से जमकर नारेबाजी हुई। इसके बाद किसानों ने पुलिस प्रशासन को कहा कि 10 मिनट में संघ कार्यकर्ताओं को शिविर खत्म कर चले जाने के लिए कहें, अन्यथा टकराव बढ़ सकता है। स्थिति को गंभीर होते देख मौके पर पहुंचे एसपी केसर सिंह और डीएसपी आनंदपुर साहिब रमिंदर सिंह काहलों के समझाने पर संघ कार्यकर्ताओं ने शिविर समाप्त करने का निर्णय लिया और वहां से चले गए।
उनके जाते ही किसानों ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी, वहीं खून लेने को आई ब्लड बैंक की टीम को रास्ते में रोक दिया और शिविर स्थल तक नहीं जाने दिया। डीएसपी रमिंदर सिंह काहलों ने कहा कि मामला रक्तदान करने आए नौजवानों के कारण बढ़ा है। दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शांत करवा दिया गया है। इसी दौरान किसानों की ओर से कामरेड मोहन सिंह धमाणा, गुरनैब सिंह जेतेवाल, रूपिंदर सिंह संदोआ, अश्वनी चड्डा, दविंदर सरथली और संघ की ओर से जिला प्रचारक दीपक, राजेश चौधरी नंगल, विजय पुरी, रजनीश शर्मा, महिंदर वर्मा, बृज मोहन आदि मौके पर मौजूद रहे। दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। किसान नेताओं का कहना है कि जब पूरे सूबे में संघ और भाजपा के कार्यक्रमों के विरोध का एलान किया हुआ है तो यह शिविर लगाने की क्या जरूरत थी, जबकि संघ से जुड़े लोगों का तर्क है कि इस समय अस्पतालों में रक्त की भारी कमी हो गई है, ऐसे में शिविर लगाकर खून जुटाया जा रहा था।