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अनोखी मुहिम: बेटी-बहुओं ने वो किया जो सिर्फ बेटे करते हैं
जगदीश जोशी गिद्दड़बाहा (मुक्तसर)
Updated Tue, 10 Sep 2013 12:20 AM IST
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समाज में बेटों को ज्यादा महत्व दिया जाता रहा है। यह आम धारणा बनी है कि बुढ़ापे में मरणोपरांत बेटा ही मां-बाप की अर्थी को कंधा देता है। मगर यह धारणा डेरा सच्चा सौदा सिरसा द्वारा चलाई मुहिम के आगे दम तोड़ती नजर आई।
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गिद्दड़बाहा के भारू रोड स्थित डेरा बाबा छज्जू नाथ स्मृति आश्रम के निकट रहने वाली उषा रानी की बेटी और बहुओं ने अर्थी को कंधा दिया। राम जी दास इंसा की पत्नी उषा रानी (57) का रविवार को निधन हो गया था।
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सोमवार को उनकी शवयात्रा में बेटों सुरिंदर कुमार तथा दीपक कुमार के साथ-साथ बेटी नीलम रानी इंसा, बहुओं सलोनी और सोनी ने भी अर्थी को कंधा देने से लेकर संस्कार की रस्में निभाईं।
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इससे पूर्व पारिवारिक सदस्यों की मौजूदगी में डेरे की नेत्रदान समिति के डा. विजय जिंदल के सहयोग से मृतक उषा रानी की आंखों को निकाला गया और समिति को सौंप दी गईं। डेरा सच्चा सौदा सिरसा ने कुछ समय पहले मुहिम चलाई है।
इसमें डेरा प्रेमियों के पारिवारिक सदस्यों के निधन के बाद शवयात्रा तथा संस्कार तक की रस्मों में बहु-बेटियां भी शामिल होती हैं।