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Punjab: कादियान-ब्यास रेल लाइन पर फिर शुरू होगा काम, परियोजना को डीफ्रीज करने के निर्देश

Sat, 06 Dec 2025 11:33 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 06 Dec 2025 11:33 AM IST
सार

40 किलोमीटर लंबी कादियान-ब्यास रेल लाइन परियोजना का इतिहास बहुत पुराना है। इसे सबसे पहले 1929 में ब्रिटिश सरकार ने मंजूरी दी थी और नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने काम शुरू किया था। 1932 तक लगभग एक-तिहाई काम पूरा हो चुका था लेकिन अचानक परियोजना बंद कर दी गई थी।

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Work on Qadian-Beas rail line will resume with instructions to defrost project
रवनीत बिट्टू - फोटो : @RavneetBittu

विस्तार

रेलवे ने लंबे समय से लंबित 40 किलोमीटर लंबी कादियान-ब्यास रेल लाइन पर काम दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अधिकारियों को इस परियोजना को 'डीफ्रीज' करने के निर्देश दिए हैं। पहले यह परियोजना संरेखण की चुनौतियों, भूमि अधिग्रहण में बाधाओं और स्थानीय स्तर की राजनीतिक जटिलताओं के कारण 'फ्रीज' श्रेणी में डाल दी गई थी।
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रेलवे की भाषा में किसी प्रोजेक्ट को 'फ्रोजन' करना मतलब उसे ठंडे बस्ते में डाल देना है, क्योंकि विभिन्न कारणों से आगे बढ़ना संभव नहीं रह जाता। अब सभी अड़चनों को दूर करने के बाद काम फिर शुरू होगा।
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मंत्री बिट्टू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब के रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए धन की कोई कमी नहीं है।
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 वह भी लगातार नए प्रोजेक्ट शुरू करने, लंबित प्रोजेक्ट पूरे करने और अप्रत्याशित कारणों से बंद पड़े प्रोजेक्ट्स को पुनर्जीवित करने में जुटे हैं। मोहाली-राजपुरा, फिरोजपुर-पट्टी और अब कादियान-ब्यास प्रोजेक्ट को गति मिलेगी। यह लाइन महत्वपूर्ण है। लिहाजा अधिकारियों को सभी बाधाएं दूर करके निर्माण कार्य फिर से शुरू करने के निर्देश दिए हैं। 

उत्तरी रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) ने कहा कि रेलवे बोर्ड की इच्छा है कि कादियान-ब्यास लाइन को डीफ्रीज किया जाए और विस्तृत अनुमान को शीघ्र पुनः जमा कराकर स्वीकृत कराया जाए ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सके।

इस परियोजना को सबसे पहले 1929 में ब्रिटिश सरकार ने मंजूरी दी थी और नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने काम शुरू किया था। 1932 तक लगभग एक-तिहाई काम पूरा हो चुका था लेकिन अचानक परियोजना बंद कर दी गई थी।



रेलवे ने इसे 'सामाजिक रूप से वांछनीय परियोजना' का दर्जा दिया और 2010 के रेल बजट में शामिल किया था लेकिन योजना आयोग द्वारा उठाई गई वित्तीय चिंताओं के कारण काम एक बार फिर रुक गया।
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