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पंजाब में ड्रोन से तस्करी: एंटी-ड्रोन सिस्टम भी नाकामयाब नहीं, नाै माह में 850 किलो हेरोइन और 261 हथियार बरामद

Mon, 26 Oct 2026 12:52 PM IST
Nivedita राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 26 Oct 2026 12:52 PM IST
सार

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत-पाकिस्तान सीमा का पश्चिमी गलियारा हेरोइन की तस्करी का प्रमुख रास्ता बना हुआ है। इसमें पंजाब के साथ राजस्थान और जम्मू-कश्मीर भी तस्करी के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं।

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Smuggling via drones in Punjab Anti-drone systems prove ineffective 850 kg heroin 261 weapons seized
पंजाब में नशा-हथियार तस्करी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत-पाकिस्तान सीमा पर तस्करी के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। नशे की खेप से लेकर हथियारों तक की सप्लाई के लिए ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा रहा है। 

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एंटी-ड्रोन सिस्टम और कड़ी निगरानी के बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर सुरक्षा घेरे को भेदने की कोशिश कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि इंडो-पाक बॉर्डर हाई रिस्क जोन बन गया है और ड्रोन के जरिये तस्करी के मामले पूरे देश में सबसे अधिक पंजाब में सामने आए हैं। तस्करों के बदलते तौर-तरीकों के बीच बीएसएफ और पुलिस के सामने न केवल ड्रोन की दिशा का पता लगाने, बल्कि सीमा पार से नशे और हथियारों की खेप आने से रोकने की भी बड़ी चुनौती है।
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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत-पाकिस्तान सीमा का पश्चिमी गलियारा हेरोइन की तस्करी का प्रमुख रास्ता बना हुआ है। इसमें पंजाब के साथ राजस्थान और जम्मू-कश्मीर भी तस्करी के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं। रिपोर्ट में पंजाब की सीमा पर ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को गंभीर चुनौती बताया गया है। ड्रोन के माध्यम से हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों के अलावा हथियारों तथा नकली करेंसी की आपूर्ति का खतरा भी बढ़ा है। इससे सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और तस्करी रोकने वाली एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
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एनसीबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर में ड्रोन के जरिये तस्करी के 305 मामले पकड़े गए थे, जिनमें से 298 मामले अकेले पंजाब में सामने आए। इसी तरह, पूरे साल देशभर में 3567 किलो हेरोइन पकड़ी गई थी, जिसमें से अकेले पंजाब में 2086 किलो बरामद हुई। यह कुल जब्त हेरोइन का 58 प्रतिशत है। इससे प्रदेश में हेरोइन तस्करी की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

चार सीमावर्ती जिले तस्करी से अधिक प्रभावित 
पंजाब के सीमावर्ती जिलों में लगातार हेरोइन की खेप पकड़ी जा रही है। इनमें अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और गुरदासपुर सबसे अधिक प्रभावित हैं। अमृतसर जिले में नशा तस्करी के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। हेरोइन के अलावा दूसरे मादक पदार्थों की तस्करी भी लगातार जारी है। इन जिलों में गांजा, अफीम, डोडा, इंजेक्शन और नशीली गोलियां भी भारी मात्रा में बरामद की जा रही हैं।

इसी तरह, पिछले साल के दौरान प्रदेश में कोडीन आधारित कफ सिरप की 8.95 लाख बोतलें जब्त की गईं, जो देशभर में सबसे अधिक हैं। कई फार्मेसी से बुप्रेनार्फिन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी सस्ती दवाएं आसानी से मिल जाती हैं, जिससे इनके गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ रहा है। यह भी सूबे के सामने नई चुनौती बन गया है।

सीमा पर नौ एंटी-ड्रोन सिस्टम 
राज्य सरकार ने हथियारों और नशे की तस्करी रोकने के लिए सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किए हैं। सरकार ने 51.41 करोड़ रुपये की लागत से नौ अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदे थे। ये सिस्टम ड्रोन के साथ उसके नियंत्रण केंद्र की सटीक स्थिति का पता लगाने में सक्षम हैं। इनमें वास्तविक समय के नक्शे पर खतरे की सूचना देने और खतरे की स्वत: चेतावनी देने की क्षमता भी है। सीमा पर इन प्रणालियों की मदद से ड्रोन के जरिये होने वाली तस्करी पर नजर रखने और उसे रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद ड्रोन से तस्करी जारी है।

नौ माह में 850 किलो हेरोइन और 261 हथियार बरामद 
वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पंजाब सीमा पर 850 किलो हेरोइन और 261 हथियार बरामद किए। बीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 तक पंजाब सीमा पर 182 ड्रोन बरामद किए गए। इस दौरान 44 किलो अफीम और करीब 14 किलो आईसीई (क्रिस्टल मेथामफेटामाइन) भी पकड़ी गई।

तस्करों ने बदले तरीके, रात में कम ऊंचाई पर उड़ रहे ड्रोन
सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि तस्करी करने वाले नेटवर्क लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले ड्रोन, रात के समय गतिविधियां और तय स्थानों पर खेप गिराने की रणनीति निगरानी को चुनौती दे रही है। कई बार ड्रोन से सामान गिराने के बाद उसे उठाने के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को लगाया जाता है। ऐसे में केवल ड्रोन का पता लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खेप उठाने वालों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना भी जरूरी है। बीएसएफ और पंजाब पुलिस ने इसी वजह से तकनीकी निगरानी के साथ खुफिया जानकारी के आधार पर संयुक्त कार्रवाई बढ़ाई है। सीमा से पांच से आठ किलोमीटर अंदर तक संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और गांवों में सूचना तंत्र मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।


पंजाब पुलिस नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों के नेटवर्क को खत्म करने तथा सुरक्षित और नशा-मुक्त पंजाब सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। यही कारण है कि ड्रोन के जरिये नशे और हथियारों की तस्करी के बड़ी संख्या में मामले पकड़े जा रहे हैं। - गौरव यादव, डीजीपी, पंजाब।

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