PGI Report: बोतलबंद पानी, दूध, शहद से शरीर में घुल रहा प्लास्टिक, बन रहा हार्मोनल असंतुलन का कारण
स्टडी के अनुसार धीरे-धीरे ये माइक्रो प्लास्टिक हमारे खाने-पीने के रास्ते शरीर में दाखिल हो रहे हैं और पाचन तंत्र को खराब करने के साथ ही अन्य बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। स्टडी के अनुसार माइक्रो प्लास्टिक 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं, जो विभिन्न स्रोतों से हमारे शरीर में प्रवेश करके पाचन तंत्र में जमा होते हैं।
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बोतलबंद पानी, दूध, शहद, बीयर, चीनी और नमक के जरिये हमारे शरीर में माइक्रो प्लास्टिक घुल रहा है, जो गई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है।
यह प्लास्टिक हार्मोनल असंतुलन का कारण बन रहा है और साथ ही पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंच रहा है। माइक्रो प्लास्टिक से ही पेट और आंतों में जलन और सूजन के रोग बढ़ रहे हैं।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) के विशेषज्ञों की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर रविंद्र खैवाल, प्रोफेसर सुमन मोर और मनप्रीत कौर ने यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके खतरों को लेकर एक विस्तृत स्टडी पर भी जोर दिया गया है।
माइक्रो प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ रसायन शरीर के हार्मोनल संतुलन को बाधित कर सकते है, जो आगे विभिन्न बीमारियों को जन्म देते हैं। इससे प्रजनन क्षमता पर प्रभाव, विकास संबंधी समस्याएं साथ ही शरीर में सूजन भी पैदा हो रही है। इसी तरह प्लास्टिक कोलन कैंसर और लिवर संबंधी रोग का कारण भी बन सकता है।
स्टडी में वैज्ञानिकों ने चूहों, मछलियों और केंचुओं जैसे एनिमल मॉडल्स पर रिसर्च को भी शामिल किया है। इसमें सामने आया कि जहां भी माइक्रो प्लास्टिक की मात्रा ज्यादा थी, वहां पेट से जुड़ी बीमारियां बढ़ गईं। स्टडी के अनुसार धीरे-धीरे ये माइक्रो प्लास्टिक हमारे खाने-पीने के रास्ते शरीर में दाखिल हो रहे हैं और पाचन तंत्र को खराब करने के साथ ही अन्य बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। स्टडी के अनुसार माइक्रो प्लास्टिक 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं, जो विभिन्न स्रोतों से हमारे शरीर में प्रवेश करके पाचन तंत्र में जमा होते हैं। यह सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे पेट दर्द, दस्त और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं। यह प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी करने के अलावा आंतों को भी नुकसान पहुंचाता है।
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पानी व सीफूड में मिली माइक्रो प्लास्टिक की मात्रा
रिपोर्ट के अनुसार अनुसंधान निष्कर्षों से यह पता चला है कि दूषित सीफूड और बोतलबंद पानी से मानव शरीर के अंदर माइक्रो प्लास्टिक जा रहा है। उदाहरण के लिए मछली व अन्य सीफूड में 0.2 से 8.5 कण प्रति ग्राम माइक्रो प्लास्टिक पाया गया है। इसी तरह बोतलबंद पानी के कुछ ब्रांडों में प्रति लीटर 10 कण तक माइक्रो प्लास्टिक पाया गया है।
खतरे को कम करने के लिए सिफारिश
-प्लास्टिक वेस्ट को कम करने व सही निपटान के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत।
-सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की जरूरत। ।
-प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल और इसे पर्यावरण में प्रवेश करने से रोकने पर जोर।
माइक्रो प्लास्टिक हमारे पाचन तंत्र के लिए खतरा है। साथ ही यह हार्मोनल असंतुलन का कारण भी बन रहा है। प्लास्टिक वेस्ट के उचित निपटारे के साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए काम किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके। -प्रोफेसर रविंद्र खैवाल, प्रोफेसर, पीजीआई