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गिरफ्तार आरोपियों के अपमानजनक वीडियो: हाईकोर्ट ने डीजीपी से मांगा जवाब, जनहित याचिका पर दिखाई सख्ती

Fri, 16 Oct 2026 08:08 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 16 Oct 2026 08:08 AM IST
सार

कुछ वीडियो में गिरफ्तार आरोपियों को चोटों के निशान, शारीरिक परेशानी, चलने में कठिनाई या असहाय अवस्था में दिखाया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकारी सोशल मीडिया खातों पर ऐसी सामग्री प्रसारित करने से पुलिस कार्रवाई में शारीरिक हिंसा और हिरासत में दुर्व्यवहार को स्वीकार्य मानने का संदेश जा सकता है।  

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Humiliating videos of arrested accused High Court seeks response from Punjab DGP
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब पुलिस के आधिकारिक इंस्टाग्राम खातों पर गिरफ्तार आरोपियों को घायल और अपमानजनक परिस्थितियों में दिखाने वाले वीडियो का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। 
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जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से जवाब मांगा है। याचिका में विवादित वीडियो हटाने, इन्हें तैयार करने और प्रसारित करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
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अधिवक्ता निखिल थम्मन की ओर से दायर याचिका में पंजाब पुलिस के आधिकारिक इंस्टाग्राम खाते के अलावा लुधियाना ग्रामीण, एसएएस नगर, पटियाला, मोगा, फाजिल्का, जालंधर, फरीदकोट और फिरोजपुर पुलिस के खातों पर पोस्ट किए गए वीडियो का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता ने इन वीडियो की प्रस्तुति, संपादन और प्रसार के तरीके पर सवाल उठाए हैं। 
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याचिका के अनुसार, कुछ वीडियो में गिरफ्तार आरोपियों को चोटों के निशान, शारीरिक परेशानी, चलने में कठिनाई या असहाय अवस्था में दिखाया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकारी सोशल मीडिया खातों पर ऐसी सामग्री प्रसारित करने से पुलिस कार्रवाई में शारीरिक हिंसा और हिरासत में दुर्व्यवहार को स्वीकार्य मानने का संदेश जा सकता है। हालांकि, चोटें किन परिस्थितियों में लगीं, यह जांच का विषय है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
याचिका में आशंका जताई गई है कि इस तरह के वीडियो जनता में भय पैदा कर सकते हैं और आपराधिक न्याय व्यवस्था में लोगों के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं। याचिकाकर्ता ने गिरफ्तार व्यक्तियों के साथ कथित शारीरिक हिंसा के आरोपों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। इसके अलावा, वीडियो रिकॉर्ड करने, संपादित करने, स्वीकृति देने और आधिकारिक खातों पर प्रकाशित करने की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल करने का आग्रह किया गया है।


सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर दिशा-निर्देश मांगे
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से पंजाब पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों के इस्तेमाल को लेकर राज्यव्यापी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गिरफ्तार व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने या कथित हिंसा का महिमामंडन करने के लिए इन मंचों का इस्तेमाल न हो।
 
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