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बॉर्डर पर डिजिटल फेंसिंग से बढ़ेगी सुरक्षा: रुकेगी घुसपैठ और तस्करी, एंटी-ड्रोन सिस्टम से लैस हो रही बाड़बंदी

Sun, 18 Oct 2026 10:24 AM IST
शाहिल शर्मा अनिल कुमार/गुरदेव सिंह, संवाद
अनिल कुमार/गुरदेव सिंह, संवाद Published by: शाहिल शर्मा Updated Sun, 18 Oct 2026 10:24 AM IST
सार

सरहद पर उक्त फेंसिंग लगाने से पूर्व जमीन पर कंक्रीट का बेस तैयार किया जाता है। उसके बाद कंक्रीट पर लगभग दस फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग खड़ी की जाती है। उसके ऊपर कोबरा तार का जाल बिछाया जाता है।

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Digital fencing at the border will enhance security
पंजाब बॉर्डर पर डिजिटल फेंसिंग का काम शुरू - फोटो : अमर उजाल ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब से सटी भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर डिजिटल फेंसिंग का कार्य शुरू हो गया है। यह कदम घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। सीमा पार से होने वाली घुसपैठ गतिविधियों पर भी इससे लगाम लगेगी। पंजाब से सटी दोनों देशों की सरहद पर कई जगहों पर यह फेंसिंग लग चुकी है। यह एक मजबूत लोहे की दीवार है, जिसमें छेद हैं और ऊपर कोबरा तार लगाई गई है। 

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खुफिया सूत्रों के अनुसार, इसका उद्देश्य पारंपरिक बाड़बंदी के साथ अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी मजबूत करना है। इसमें सेंसर, थर्मल कैमरे, लेजर तकनीक और एंटी-ड्रोन सिस्टम लगे हैं। पंजाब से सटी भारत-पाकिस्तान की करीब साढ़े 500 किलोमीटर की सरहद के कई हिस्सों में उक्त फेंसिंग लगाई गई है। ये दुश्मन की प्रत्येक गतिविधियों को भी भांप लेगी।

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निगरानी व्यवस्था की खासियत
इस फेंसिंग में विभिन्न प्रकार के सेंसर लगे हैं। ये जमीन की हलचल, फेंसिंग से छेड़छाड़ या संदिग्ध गतिविधियों का संकेत देते हैं। थर्मल इमेजिंग और नाइट-विजन कैमरे रात के अंधेरे में भी नजर रखते हैं। ये सर्दी में घने कोहरे और खराब मौसम में भी मददगार होंगे। लेजर अलार्म और एंटी-ड्रोन तकनीक भी इसमें शामिल है।

ऐसे लगाई जाती है डिजिटल फेंसिंग
सरहद पर उक्त फेंसिंग लगाने से पूर्व जमीन पर कंक्रीट का बेस तैयार किया जाता है। उसके बाद कंक्रीट पर लगभग दस फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग खड़ी की जाती है। उसके ऊपर कोबरा तार का जाल बिछाया जाता है। उक्त फेंसिंग में छोटे-छोटे छेद होते हैं। दूर से फेंसिंग पार कुछ भी साफ दिखाई नहीं पड़ता है। ये जमीन से आसमान की तरफ सीधी दीवार है। पुरानी फेंसिंग (कंटीली तार) चार से छह फीट चौड़ी और आठ फीट ऊंची लगी होती थी, इसके आर-पार साफ दिखाई देता है। इसमें प्लास्टिक पाइप डालकर हेरोइन के पैकेट भारतीय सीमा में फेंके जा सकते हैं। डिजिटल फेंसिंग में प्लास्टिक पाइप आर-पार नहीं हो सकती।

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