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पंजाब में बाल लिंगानुपात में सुधार: एक हजार बेटों पर 906 बेटियां ले रहीं जन्म... पर अब भी राष्ट्रीय दर से कम
Wed, 24 Sep 2025 09:32 AM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 24 Sep 2025 09:32 AM IST
सार
पंजाब में वर्ष 2017-2019 में एक हजार बेटों पर 891 बेटियां पैदा हो रही थी जबकि वर्ष 2021-23 में यह संख्या बढ़कर 906 हो गई है। इस दौरान लिंगानुपात में 1.68 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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आईवीएफ
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
पंजाब में बाल लिंगानुपात में सुधार हुआ है। अब एक हजार बेटों पर 906 बेटियां जन्म ले रही हैं, लेकिन अब भी यह राष्ट्रीय लिंगानुपात से कम है। राष्ट्रीय स्तर पर एक हजार बेटों पर 917 बेटियां पैदा हो रही हैं।
केंद्र सरकार की नमूना पंजीकरण प्रणाली सांख्यिकीय रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही बाल लिंगानुपात सुधारने के लिए प्रयासरत हैं। सरकार सख्ती कर रही है और साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है जिसका नतीजा मिलना शुरू हो गया है।
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अब लोगों की सोच बदल रही है। साथ ही सरकार भी लड़कियों के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है जिसमें लड़कियों को मुफ्त शिक्षा व इलाज की सुविधा दी जा रही है। लड़कियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ रही हैं। भ्रूण लिंग जांच के अवैध केंद्रों पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस सबसे बाल लिंगानुपात में सुधार हो रहा है। - श्रुति शर्मा, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, पीजीआई सैटेलाइट सेंटर संगरूर
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केंद्र सरकार की नमूना पंजीकरण प्रणाली सांख्यिकीय रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही बाल लिंगानुपात सुधारने के लिए प्रयासरत हैं। सरकार सख्ती कर रही है और साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है जिसका नतीजा मिलना शुरू हो गया है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बदल रही लोगों की सोच
ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों की सोच बदल रही है। अब लोग लड़के-लड़कियों में फर्क नहीं करते। इसी का नतीजा है कि सूबे के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बाल लिंगानुपात में तेजी से सुधार हो रहा है। गांवों में वर्ष 2017-19 के दौरान एक हजार बेटों पर 874 बेटियां पैदा हो रही थीं जबकि वर्ष 2021-23 के दौरान 894 बेटियां पैदा हो रही हैं।
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शहरों में भी पहले से सुधार
प्रदेश के शहरों में भी लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है। हालांकि शहरों में सुधार की दर गांवों जितनी नहीं है, क्योंकि यहां पहले से ही ग्रामीण के मुकाबले बाल लिंगानुपात बेहतर है। पंजाब के शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2017-19 के दौरान एक-एक हजार लड़कों पर 918 लड़कियां जन्म ले रही थीं, जबकि वर्ष 2021-23 के दौरान 922 लड़कियों ने जन्म लिया।हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी सुधार
पंजाब के साथ ही पड़ोसी राज्य हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी सुधार हुआ है लेकिन हरियाणा में स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में वर्ष 2017-19 के दौरान एक हजार बेटों पर 865 बेटियों का जन्म हो रहा था। वर्ष 2021-23 के दौरान इसमें सुधार हुआ है और एक हजार बेटों पर 884 बेटियां पैदा हुईं। हिमाचल प्रदेश में भी मामूली सुधार हुआ है लेकिन वहां पर पहले ही स्थिति बेहतर है। हिमाचल में वर्ष 2021-23 के दौरान एक हजार बेटों पर 958 बेटियों ने जन्म लिया जबकि 2017-19 में 949 बेटियां जन्म ले रही थीं।अब लोगों की सोच बदल रही है। साथ ही सरकार भी लड़कियों के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है जिसमें लड़कियों को मुफ्त शिक्षा व इलाज की सुविधा दी जा रही है। लड़कियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ रही हैं। भ्रूण लिंग जांच के अवैध केंद्रों पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस सबसे बाल लिंगानुपात में सुधार हो रहा है। - श्रुति शर्मा, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, पीजीआई सैटेलाइट सेंटर संगरूर