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चंडीगढ़ में आउटसोर्स भर्ती पर सीबीआई रेड: अधिकारियों की भूमिका पर सवाल, एक हजार करोड़ की गड़बड़ियों का आरोप
Sat, 17 Oct 2026 01:34 PM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:34 PM IST
सार
शिकायतकर्ता और यूटी चंडीगढ़ सबऑर्डिनेट सर्विस फेडरेशन के प्रधान रणजीत मिश्रा ने मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियों की भूमिका की जांच से टेंडर प्रक्रिया और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में कथित गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है।
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चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस
- फोटो : संवाद
विस्तार
चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और वेतन भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सीबीआई रेड के बाद गरमा गया है। शिकायतकर्ता और यूटी चंडीगढ़ सबऑर्डिनेट सर्विस फेडरेशन के प्रधान रणजीत मिश्रा ने मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल करने की मांग की है।
मिश्रा ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर करीब एक हजार करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियों की भूमिका की जांच से टेंडर प्रक्रिया और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में कथित गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है।
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मिश्रा ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर करीब एक हजार करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियों की भूमिका की जांच से टेंडर प्रक्रिया और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में कथित गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है।
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सालाना 200 करोड़ के टेंडरों पर सवाल
मिश्रा के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपये सालाना के टेंडरों में अनियमितताओं की आशंका है। उन्होंने जांच एजेंसियों से संबंधित कंपनियों के बीच आपसी संबंधों, टेंडर हासिल करने के लिए जमा कराए गए दस्तावेजों, अनुभव प्रमाणपत्रों और कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती की जांच करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की भी गहन पड़ताल होनी चाहिए।
मिश्रा ने आरोप लगाया कि मामले में केवल कंपनियों की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं होगी। टेंडर प्रक्रिया से लेकर कर्मचारियों की तैनाती और भुगतान तक, संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, किसी अधिकारी या कंपनी की संलिप्तता अभी जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
सीबीआई ने चार ठिकानों पर की छापेमारी
मामले में सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने और चंडीगढ़ में चार ठिकानों पर छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। छापेमारी के दौरान लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य दस्तावेज जब्त किए जाने की भी जानकारी है। इनसे मिलने वाले डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद टेंडर प्रक्रिया तथा संबंधित कंपनियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सकती है।
मिश्रा ने मांग की कि जांच एजेंसी टेंडर आवंटन, कंपनियों की पात्रता, कर्मचारियों की तैनाती और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड का मिलान करे। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कंपनी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मार्च से शिकायत लंबित रहने का दावा
मिश्रा ने दावा किया कि उन्होंने मामले में मार्च से विजिलेंस के समक्ष शिकायत दी थी, लेकिन उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, बाद में जांच एजेंसियों की कार्रवाई शुरू हुई। हालांकि, शिकायत दर्ज होने की तारीख, उस पर हुई कार्रवाई और जांच आगे बढ़ने की समय-सीमा की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
एक हजार करोड़ के आंकड़े की पुष्टि जरूरी
मिश्रा ने कथित वित्तीय अनियमितताओं का आंकड़ा करीब एक हजार करोड़ रुपये बताया है, जबकि आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े टेंडरों का सालाना मूल्य करीब 200 करोड़ रुपये होने का दावा किया है। इन दोनों आंकड़ों के बीच संबंध और कथित अनियमितताओं की कुल राशि की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मिश्रा के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपये सालाना के टेंडरों में अनियमितताओं की आशंका है। उन्होंने जांच एजेंसियों से संबंधित कंपनियों के बीच आपसी संबंधों, टेंडर हासिल करने के लिए जमा कराए गए दस्तावेजों, अनुभव प्रमाणपत्रों और कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती की जांच करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की भी गहन पड़ताल होनी चाहिए।
मिश्रा ने आरोप लगाया कि मामले में केवल कंपनियों की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं होगी। टेंडर प्रक्रिया से लेकर कर्मचारियों की तैनाती और भुगतान तक, संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, किसी अधिकारी या कंपनी की संलिप्तता अभी जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
सीबीआई ने चार ठिकानों पर की छापेमारी
मामले में सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने और चंडीगढ़ में चार ठिकानों पर छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। छापेमारी के दौरान लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य दस्तावेज जब्त किए जाने की भी जानकारी है। इनसे मिलने वाले डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद टेंडर प्रक्रिया तथा संबंधित कंपनियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सकती है।
मिश्रा ने मांग की कि जांच एजेंसी टेंडर आवंटन, कंपनियों की पात्रता, कर्मचारियों की तैनाती और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड का मिलान करे। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कंपनी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मार्च से शिकायत लंबित रहने का दावा
मिश्रा ने दावा किया कि उन्होंने मामले में मार्च से विजिलेंस के समक्ष शिकायत दी थी, लेकिन उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, बाद में जांच एजेंसियों की कार्रवाई शुरू हुई। हालांकि, शिकायत दर्ज होने की तारीख, उस पर हुई कार्रवाई और जांच आगे बढ़ने की समय-सीमा की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
एक हजार करोड़ के आंकड़े की पुष्टि जरूरी
मिश्रा ने कथित वित्तीय अनियमितताओं का आंकड़ा करीब एक हजार करोड़ रुपये बताया है, जबकि आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े टेंडरों का सालाना मूल्य करीब 200 करोड़ रुपये होने का दावा किया है। इन दोनों आंकड़ों के बीच संबंध और कथित अनियमितताओं की कुल राशि की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।