चंडीगढ़ में प्रदूषण से अभी राहत, पिछले साल के मुकाबले 61 फीसदी कम
- पिछले साल 25 अक्तूबर को ही वायु गुणवत्ता सूचकांक 195 दर्ज किया गया था
- विशेषज्ञ का कहना है कि तापमान गिरते ही बढ़ेगा हवा में वायु प्रदूषण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर सहित पंजाब के कई जिलों में वायु प्रदूषण भले ही अनियंत्रित हो, मगर चंडीगढ़ की हवा इन शहरों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। रविवार 25 अक्तूबर रात 9 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 122 दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल 25 अक्तूबर को ही एक्यूआई 195 पहुंच गया था। जो इस साल के मुकाबले 61 फीसदी ज्यादा था। यदि दशहरे की तुलना करें तो तब भी प्रदूषण कम ही दर्ज किया गया है। पिछले साल दशहरा 8 अक्तूबर को मनाया गया था। उस दिन एक्यूआई 146 रिकॉर्ड किया गया था।
विशेषज्ञ का कहना है कि अभी प्रदूषण कम होने के पीछे दो मुख्य वजह है। पहली, इस बार दशहरे पर रावण दहन नहीं हुआ। दूसरा, चंडीगढ़ में अभी अधिकतम तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। तापमान के गिरने पर हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा।
पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के पर्यावरण अध्ययन के विशेषज्ञ रविंद्रा खैवाल ने बताया कि रविवार को प्रदूषण का स्तर थोड़ा बढ़ा हुआ है। क्योंकि रविवार व दशहरा होने की वजह से लोग ज्यादा निकले। मार्केट में भी चहल-पहल थी। इस वजह से हवा का स्तर बढ़ा हुआ है। रविवार से पहले चंडीगढ़ का वायु गुणवत्ता सूचकांक कभी 110 या 100 के करीब दर्ज किया जा रहा था।
अभी पराली के धुएं का असर ज्यादा नहीं
पंजाब व हरियाणा के जिलों में इस समय बड़ी संख्या में पराली जलाई जा रही है। इसका असर कई जगह देखा भी गया है लेकिन चंडीगढ़ में फिलहाल इसका असर नहीं है। दरअसल हवा इस समय पश्चिमी है। इस वजह से पराली का धुआं चंडीगढ़ में नहीं आ रहा है। पराली का धुआं हवा की गति व उसकी दिशा पर काफी हद तक निर्भर करता है।
चंडीगढ़ में फिलहाल इस वजह से बढ़ा है
चंडीगढ़ में वायु प्रदूषण एग्जास्ट (धुआं) और नॉन एग्जास्ट (कार के पहियों से सड़क पर रगड़ने से उड़ने वाली धूल) की वजह से बढ़ा हुआ है। चंडीगढ़ में वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है। एक अध्ययन के मुताबिक चंडीगढ़ में प्रत्येक एक हजार व्यक्ति पर 878 वाहन रजिस्टर्ड हैं। जब वाहन सड़क पर चलते हैं तो उनके टायर सड़क पर घिसते हैं। इस घर्षण से निकलने वाले तत्व भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। पीजीआई ने प्रदूषण के 25 साल के डाटा का आकलन कर पाया था कि चंडीगढ़ में बढ़ते प्रदूषण की एक बड़ी वजह वाहनों की बढ़ती संख्या है।
ठंड के साथ बढ़ने लगेगा वायु प्रदूषण
पीजीआई के पर्यावरण अध्ययन के एडिशनल प्रोफेसर रविंद्रा खैवाल ने बताया कि ठंड बढ़ते ही वायुमंडलीय सतह नीचे आएगी। इससे प्रदूषण के कण ऊपर जाने के बजाए नीचे रहेंगे, जो हवा को दूषित करेंगे। हालांकि, केंद्र सरकार व यूटी प्रशासन का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत एक साथ कई कदम उठा रहे हैं, जिसका असर जल्द ही दिखेगा।