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वोटरों की चुप्पी से सकते में प्रत्याशी
सुशील कुमार/अमर उजाला, सुनाम (संगरूर)।
Updated Tue, 22 Apr 2014 07:30 PM IST
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लोकसभा चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है लेकिन आम मतदाताओं की खामोशी ने सभी प्रत्याशियों की चिंता बढ़ा दी है। आम वोटरों के खुलकर सामने नहीं आने के कारण जहां सियासी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो रही है, वहीं प्रत्याशी भी अपनी स्थिति का स्टीक अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं। खासतौर पर शहरी इलाकों के वोटर अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। वोटरों की खामोशी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अपने घरों, दुकानों आदि पर बैनर, पोस्टर लगाने से किनारा कर रहे हैं। वोटर भी नेताओं की भांति सभी दलों के प्रत्याशियों को वोट देने का झुनझुना दे रहे हैं। संगरूर सीट पर मतदाताओं के इस रुख से यहां अप्रत्याशित नतीजे आने के आसार बनने लगे हैं।
दिग्गजों का प्रचार तोड़ पाएगा चुप्पी
अब से पहले चुनावी मौसम में सभी गली मोहल्लों तथा बाजार बैनरों व पोस्टरों से भरे रहते थे। इस बार शहरी क्षेत्रों में बैनर व पोस्टर ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे हैं। सियासी जानकार मतदाताओं की इस खामोशी को गंभीरता से ले रहे हैं। जानकारों के मुताबिक वोटर की यह खामोशी निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि बैनरों व पोस्टरों की कमी खलने का एक अहम कारण चुनाव आयोग की सख्ती को भी माना जा रहा है। संगरूर संसदीय सीट पर बने कुछ इसी तरह के हालात किसी अप्रत्याशित नतीजे आने के संकेत देने लगे हैं। बहरहाल मतदान में अभी आठ दिन बचे हैं और प्रचार के अंतिम चरण में सभी दलों के दिग्गज नेता अपने प्रत्याशियों के हक में प्रचार के लिए आएंगे। देखना होगा कि दिग्गजों का यह प्रचार मतदाताओं की चुप्पी को तोड़ेगा अथवा मतदाताओं की खामोशी की सच्चाई जानने के लिए 16 मई तक इंतजार करना होगा।
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दिग्गजों का प्रचार तोड़ पाएगा चुप्पी
अब से पहले चुनावी मौसम में सभी गली मोहल्लों तथा बाजार बैनरों व पोस्टरों से भरे रहते थे। इस बार शहरी क्षेत्रों में बैनर व पोस्टर ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे हैं। सियासी जानकार मतदाताओं की इस खामोशी को गंभीरता से ले रहे हैं। जानकारों के मुताबिक वोटर की यह खामोशी निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि बैनरों व पोस्टरों की कमी खलने का एक अहम कारण चुनाव आयोग की सख्ती को भी माना जा रहा है। संगरूर संसदीय सीट पर बने कुछ इसी तरह के हालात किसी अप्रत्याशित नतीजे आने के संकेत देने लगे हैं। बहरहाल मतदान में अभी आठ दिन बचे हैं और प्रचार के अंतिम चरण में सभी दलों के दिग्गज नेता अपने प्रत्याशियों के हक में प्रचार के लिए आएंगे। देखना होगा कि दिग्गजों का यह प्रचार मतदाताओं की चुप्पी को तोड़ेगा अथवा मतदाताओं की खामोशी की सच्चाई जानने के लिए 16 मई तक इंतजार करना होगा।
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