{"_id":"61e3c5013f5e4b546e1c1e27","slug":"bjp-gave-importance-to-sikh-leaders-instead-of-2017-winning-mlas","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब विधानसभा चुनाव: पिछली बार जीते अपने दोनों विधायकों को भाजपा ने किया किनारे, सिख चेहरों को वरीयता ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब विधानसभा चुनाव: पिछली बार जीते अपने दोनों विधायकों को भाजपा ने किया किनारे, सिख चेहरों को वरीयता
Sun, 16 Jan 2022 03:14 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 16 Jan 2022 03:14 PM IST
सार
पंजाब में भाजपा अकाली दल के साथ चुनाव लड़ती आई है और हमेशा हिंदू सिखों का यह गठबंधन ही चुनावों में अपना परचम लहराता आया है। भाजपा को सिख चेहरों की जरूरत है ताकि चुनावों में अकाली दल की कमी महसूस न हो।
विज्ञापन
भाजपा।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब में तेज सत्ता विरोधी लहर के बावजूद 2017 में विधानसभा चुनाव जीतने वाले भाजपा के दो विधायक अरुण नारंग और दिनेश बब्बू को पार्टी पंजाब में किसी मंच पर तरजीह नहीं दे रही है। पार्टी अपने काडर को दूर कर सिख चेहरों को हर मंच पर स्थान दे रही है। ऐसे में पार्टी का ध्वज उठाने वाले नेता असहज महसूस कर रहे हैं।
विज्ञापन
पंजाब में चुनाव के लिए जो रणनीति तैयार की जा रही है उसमें कांग्रेस से आने वाले पूर्व मंत्री राणा सोढी, सुखबीर बादल के पूर्व ओएसडी परमिंदर सिंह बराड़ के अलावा विधायक फतेहजंग बाजवा को आगे किया जा रहा है। पंजाब में भाजपा अकाली दल से अलग होकर चुनाव लड़ रही है और पार्टी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस के साथ गठबंधन कर रखा है। इस गठबंधन में अकाली दल के पूर्व नेता सुखदेव सिंह ढींडसा का ग्रुप भी है। लिहाजा, पार्टी पंजाब में 117 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है और पार्टी को सिख चेहरों को आगे लाना मजबूरी बन चुका है।
विज्ञापन
पंजाब में 2017 में चुनावों में पार्टी के महज दो विधायक चुनाव जीते थे, जिसमें अबोहर के अरुण नांरग व दिनेश कुमार बब्बू थे। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक को लेकर भाजपा का शिष्टमंडल जो राज्यपाल से मिलकर आया था, उसमें कांग्रेस से आए राणा सोढी को तरजीह दी गई। पार्टी की तरफ से अपने दोनों विधायकों को बुलाया ही नहीं गया।
विज्ञापन
जालंधर में जो चुनाव का केंद्रीय कार्यालय खोला गया है, वहां पर भी केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ कांग्रेस के पूर्व मंत्री राणा सोढ़ी ही नजर आते हैं। पार्टी की तरफ से जितनी अधिकारिक प्रेस वार्ता हो रही है, उसमें भी कांग्रेस से आए विधायक फतेहजंग बाजवा साथ दिखते हैं। पार्टी के कार्यालय में भी सुखबीर बादल के पूर्व ओएसडी परमिंदर सिंह बराड़ ही सबसे आगे दिखाई देते हैं।
पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पंजाब में भाजपा अकाली दल के साथ चुनाव लड़ती आई है और हमेशा हिंदू सिखों का यह गठबंधन ही चुनावों में अपना परचम लहराता आया है। भाजपा को सिख चेहरों की जरूरत है ताकि चुनावों में अकाली दल की कमी महसूस न हो।
मनजिंदर सिंह सिरसा के भाजपा में शामिल होने के बाद, पार्टी लगातार प्रमुख सिख चेहरों को पार्टी में शामिल करती आ रही है, जिनमें पूर्व पुलिस महानिदेशक सरबदीप सिंह विर्क, पंजाब सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह जीरा, उद्योगपति हरचरण सिंह रनौता और शिअद के पूर्व नेता सरबजीत सिंह मक्कड़ के अलावा राणा सोढी, फतेहजंग बाजवा, टोहड़ा परिवार, तलवंडी परिवार शामिल हैं। वहीं पार्टी का एक गुट यह मानता है कि भाजपा को अपने कैडर को दूर नहीं करना चाहिए। पार्टी अगर पंजाब में आज खड़ी है तो इसके पीछे कैडर है जो आंतकवाद के काले दौर से पहले का पार्टी का ध्वज उठाकर पंजाब में चल रहा है। पंजाब में किसानी आंदोलन के बीच अरूण नारंग विधायक के कपड़े तक फाड़कर बीच बाजार पीटा गया लेकिन फिर भी वह पार्टी के लिए अडिग होकर खड़े रहे।