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गणतंत्र दिवस: अटारी-वाघा सीमा पर हुई 'बीटिंग द रिट्रीट' सेरेमनी, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों से गूंजा बॉर्डर
Wed, 25 Jan 2023 05:56 PM IST
भूपेंद्र सिंह
एएनआई, पंजाब
एएनआई, पंजाब
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Wed, 25 Jan 2023 05:56 PM IST
सार
पंजाब के अमृतसर में अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी करके जवानों ने देश भर को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बधाई दी। इस मौके पर भारतीय सैनिकों में गजब का जोश देखने को मिला।
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गणतंत्र दिवस से पहले अटारी-वाघा सीमा पर बीटिंग रिट्रीट समारोह
- फोटो : ANI
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विस्तार
गणतंत्र दिवस से पहले पंजाब में अटारी-वाघा सीमा पर बीटिंग द रिट्रीट समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान बॉर्डर पर देशभक्ती से ओतप्रोत माहौल देखने को मिला। अटारी-वाघा बॉर्डर पर जवानों का शौर्य देख दुश्मन खौफजदा नजर आए। इस दौरान मौजूद लोगों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के दौरान जवानों में जोश हाई दिखा।
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भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद सीमा स्तंभ संख्या 102 के पास एतिहासिक शेर शाह सूरी रोड या ग्रैंड ट्रंक रोड पर 'अटारी-वाघा', संयुक्त चेक पोस्ट 'जेसीपी' स्थापित की गई थी। भारत की तरफ वाले गांव को 'अटारी' कहा जाता है।
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यह महाराजा रणजीत सिंह की सेना के जनरलों में से एक, सरदार शाम सिंह अटारीवाला का पैतृक गांव था। पाकिस्तान की तरफ वाला द्वार, वाघा के नाम से जाना जाता है। जैसे भारत में 'अटारी बॉर्डर' कहा जाता है, उसी तरह पाकिस्तान में इसे 'वाघा बॉर्डर' के नाम से पहचाना जाता है।
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इस समारोह के आयोजन के लिए दोनों देशों की सरकारों ने सहमति जताई थी। 1947 में भारतीय सेना को दोनों देशों को मिलाने वाले एनएच-1 पर स्थित संयुक्त चेक पोस्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रारंभ में सेना की कुमाऊं रेजीमेंट ने जेसीपी के लिए पहली टुकड़ी प्रदान की थी।
11 अक्तूबर 1947 को ब्रिगेडियर मोहिंदर सिंह चोपड़ा द्वारा पहला ध्वजारोहण समारोह देखा गया था। अब अटारी में बने भव्य परिसर के निकट, सुपर किंग एयर बी-200 विमान (अब सेवा में नहीं) को स्थापित किया गया है।