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बलवंत रामूवालिया के गांव में खुशी का जश्न
ब्यूरो,अमर उजाला /मोगा
Updated Sat, 31 Oct 2015 10:10 PM IST
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उत्तर प्रदेश की सपा सरकार में बलवंत सिंह रामूवालिया के मंत्री बनने से जिले में खुशी की लहर है।
रामूवालियां के गांव रामूवाला में पंचायत ने उनके स्वागत की तैयारी शुरू कर ही। लोकसभा हलका फरीदकोट एवं संगरूर से सांसद भी रहे और शिरोमणि अकाली दल छोड़ने के बाद लोक भलाई पार्टी बनाई। चार वर्ष अपनी पार्टी पहले भंग कर फिर से शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए है।
बलवंत रामूवालिया का जन्म जिला मोगा के गांव रामूवाला में 15 मार्च 1942 को हुआ हैं। उनके पिता करनैल सिंह पारस शिरोमणि कवीशर थे।
रामूवालिया ने अपना राजनीतिक कैरियर 1963 में स्टूडेंट फेडरेशन आफ इंडिया के जनरल सचिव से शुरू किया। वह 1968 से 1972 से आल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन के प्रधान रहे। उनका खुद भी कवीशर जत्था था और आम चुनाव के दौरान शिरोमणि अकाली दल ओर अन्य समागमों में पंथ और सिखी प्रचार किया।
इसपर उन्हें शिअद का प्रचार सचिव बनाया। उन्हाेंने 1985 से 1987 तक शिअद के जनरल सचिव पद रहे। उन्हाेंने 1977 में लोक सभा हलका फरीदकोट से सांसद चुने गए प्रकाश सिंह बादल ने का मुख्यमंत्री बनने के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस हलके से 1977 में हुए उपचुनाव में वह अकाली दल की टिकट पर सांसद चुने गए और 1977 से 1979 तक फरीदकोट लोकसभा हलके का प्रतिनिधित्व किया।आठवीं लोक सभा में संगरूर हलके से सांसद चुने गए और लोक सभा में पार्टी नेता भी रहे।
वह 1996 से 1998 तक राज्यसभा के मेंबर रहे और केंद्रीय मंत्री मंडल में बतौर समाज भलाई मंत्री और अल्पसंख्यक आयोग के मेंबर भी रहे।
इस दौरान पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बन गई और उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया। इस के बाद उन्हाेंने लोक भलाई पार्टी बनाई और 2011 तक पार्टी के प्रधान रहे। पार्टी को आम चुनाव में सफलता नहीं मिली। इस दौरान उन्हाेंने विदेश दूल्हे की तरफ से विवाह कर छोड़ीं और सताई गई लड़कियों व ट्रेवल एजेंटों की तरफ से ठगेे लोगों के लिए इंसाफ की लड़ाई शुरू की।
नवंबर 2011 में उन्हाेंने अपनी लोक भलाई पार्टी भंग कर दी और फिर शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। पंजाब में जनवरी 2012 विधानसभा चुनाव में उन्होंने अकाली दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और हार गए थे। कुछ दिन से फिर उनके अकाली को छोड़ने की चर्चा थी और पिछले सप्ताह ही उन्हाेंने प्रेस बयान जरिये इस चर्चा को निर्मूल बताया था।
गांव रामूवाला नवा के सरपंच जसविंदर सिंह बूटा ने बताया कि बलवंत सिंह रामूवालिया के उत्तरप्रदेश में मंत्री बनने से गांव में खुशी है और जल्द ही गांव की पंचायत की तरफ से उनका सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके लिए पंचों एवं गांव वासियों के साथ मीटिंग कर तैयारी शुरू कर दी गई है।
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रामूवालियां के गांव रामूवाला में पंचायत ने उनके स्वागत की तैयारी शुरू कर ही। लोकसभा हलका फरीदकोट एवं संगरूर से सांसद भी रहे और शिरोमणि अकाली दल छोड़ने के बाद लोक भलाई पार्टी बनाई। चार वर्ष अपनी पार्टी पहले भंग कर फिर से शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए है।
बलवंत रामूवालिया का जन्म जिला मोगा के गांव रामूवाला में 15 मार्च 1942 को हुआ हैं। उनके पिता करनैल सिंह पारस शिरोमणि कवीशर थे।
रामूवालिया ने अपना राजनीतिक कैरियर 1963 में स्टूडेंट फेडरेशन आफ इंडिया के जनरल सचिव से शुरू किया। वह 1968 से 1972 से आल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन के प्रधान रहे। उनका खुद भी कवीशर जत्था था और आम चुनाव के दौरान शिरोमणि अकाली दल ओर अन्य समागमों में पंथ और सिखी प्रचार किया।
इसपर उन्हें शिअद का प्रचार सचिव बनाया। उन्हाेंने 1985 से 1987 तक शिअद के जनरल सचिव पद रहे। उन्हाेंने 1977 में लोक सभा हलका फरीदकोट से सांसद चुने गए प्रकाश सिंह बादल ने का मुख्यमंत्री बनने के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस हलके से 1977 में हुए उपचुनाव में वह अकाली दल की टिकट पर सांसद चुने गए और 1977 से 1979 तक फरीदकोट लोकसभा हलके का प्रतिनिधित्व किया।आठवीं लोक सभा में संगरूर हलके से सांसद चुने गए और लोक सभा में पार्टी नेता भी रहे।
वह 1996 से 1998 तक राज्यसभा के मेंबर रहे और केंद्रीय मंत्री मंडल में बतौर समाज भलाई मंत्री और अल्पसंख्यक आयोग के मेंबर भी रहे।
इस दौरान पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बन गई और उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया। इस के बाद उन्हाेंने लोक भलाई पार्टी बनाई और 2011 तक पार्टी के प्रधान रहे। पार्टी को आम चुनाव में सफलता नहीं मिली। इस दौरान उन्हाेंने विदेश दूल्हे की तरफ से विवाह कर छोड़ीं और सताई गई लड़कियों व ट्रेवल एजेंटों की तरफ से ठगेे लोगों के लिए इंसाफ की लड़ाई शुरू की।
नवंबर 2011 में उन्हाेंने अपनी लोक भलाई पार्टी भंग कर दी और फिर शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। पंजाब में जनवरी 2012 विधानसभा चुनाव में उन्होंने अकाली दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और हार गए थे। कुछ दिन से फिर उनके अकाली को छोड़ने की चर्चा थी और पिछले सप्ताह ही उन्हाेंने प्रेस बयान जरिये इस चर्चा को निर्मूल बताया था।
गांव रामूवाला नवा के सरपंच जसविंदर सिंह बूटा ने बताया कि बलवंत सिंह रामूवालिया के उत्तरप्रदेश में मंत्री बनने से गांव में खुशी है और जल्द ही गांव की पंचायत की तरफ से उनका सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके लिए पंचों एवं गांव वासियों के साथ मीटिंग कर तैयारी शुरू कर दी गई है।