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एनआरआई की तीन करोड़ की जमीन धोखे से हड़पी
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा
Updated Sat, 07 Nov 2015 10:34 PM IST
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एनआरआई की 3 करोड़ रुपये की 10 एकड़ जमीन धोखे से नाम कराने का मामला सामने आया है।
इस धोखाधड़ी की पोल उस समय खुली जब जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश हुई। शिकायत पर उपमंडल मजिस्ट्रेट ने भूमाफिया की तरफ से धोखे से कराए हिबानामा (उपहार) रजिस्टरी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
यूके में रहने वाले एनआरआई मनजीत सिंह गिल ने बताया कि उसके पिता दया सिंह (86) की तकरीबन 10 एकड़ जमीन है। वह सिंगापुर पुलिस की नौकरी से सेवानिवृत्ति होने बाद जद्दी गांव चुगावा (मोगा) में रह रहे हैं। एनआरआई ने आरोप लगाया कि दूर के रिश्तेदार जसवीर सिंह ने भूमाफिया से मिलकर 9 सितंबर को उसके पिता से धोखे के साथ 10 एकड़ जमीन का हिबानामा रजिस्टरी कराने के एक सप्ताह बाद 16 सितंबर को ही जमीन आगे बेच दी। उन्हाेंने बताया कि इस धोखाधड़ी का उस समय पता लगा जब उनकी जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिश की गई। इस पर उसे यूके से आना पड़ा।
दूसरी तरफ उप मंडल मजिस्ट्रेट कम प्रिजाइडिंग अफसर ट्रिब्यूनल आफ सीनियर सिटीजन सुरिंदर कौर ने पीड़ित बुजुर्ग को अर्जी की सुनवाई की। उन्होंने पीड़ित बुजुर्ग के अलावा गांव के पूर्व सरपंच और अन्य लोगों के बयान दर्ज करने और तथ्यों को पढ़ने के बाद धोखे से करवाए हिबानामा रजिस्टरी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
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इस धोखाधड़ी की पोल उस समय खुली जब जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश हुई। शिकायत पर उपमंडल मजिस्ट्रेट ने भूमाफिया की तरफ से धोखे से कराए हिबानामा (उपहार) रजिस्टरी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
यूके में रहने वाले एनआरआई मनजीत सिंह गिल ने बताया कि उसके पिता दया सिंह (86) की तकरीबन 10 एकड़ जमीन है। वह सिंगापुर पुलिस की नौकरी से सेवानिवृत्ति होने बाद जद्दी गांव चुगावा (मोगा) में रह रहे हैं। एनआरआई ने आरोप लगाया कि दूर के रिश्तेदार जसवीर सिंह ने भूमाफिया से मिलकर 9 सितंबर को उसके पिता से धोखे के साथ 10 एकड़ जमीन का हिबानामा रजिस्टरी कराने के एक सप्ताह बाद 16 सितंबर को ही जमीन आगे बेच दी। उन्हाेंने बताया कि इस धोखाधड़ी का उस समय पता लगा जब उनकी जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिश की गई। इस पर उसे यूके से आना पड़ा।
दूसरी तरफ उप मंडल मजिस्ट्रेट कम प्रिजाइडिंग अफसर ट्रिब्यूनल आफ सीनियर सिटीजन सुरिंदर कौर ने पीड़ित बुजुर्ग को अर्जी की सुनवाई की। उन्होंने पीड़ित बुजुर्ग के अलावा गांव के पूर्व सरपंच और अन्य लोगों के बयान दर्ज करने और तथ्यों को पढ़ने के बाद धोखे से करवाए हिबानामा रजिस्टरी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।