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पावन स्वरूप प्रकाशित करने के मामले में कनाडाई सिखों में रोष, दोनों ट्रस्टियों के बहिष्कार का फैसला

Tue, 25 Aug 2020 02:26 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो अशोक नीर, अमृतसर
अशोक नीर, अमृतसर Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Tue, 25 Aug 2020 02:26 PM IST
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Sikh of Canada in Anger, Decision to Boycott Trusties
प्रतीकात्मक तस्वीर
श्री अकाल तख्त साहिब के जारी हुक्मनामे का उल्लंघन कर कनाडा की संस्था सतनाम एजुकेशन ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित पावन स्वरूप के मामले में कनाडा के सिखों में भी बवाल हो गया है। कनाडा की सिख संगत ने ट्रस्ट के दोनों ट्रस्टियों का पूर्णतया बहिष्कार करने का फैसला किया। सोमवार को दोनों के घरों के बाहर रोष प्रदर्शन किया गया।
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जानकारी के अनुसार, कनाडा के सभी गुरुद्वारा साहिबान के साथ तालमेल के लिए गठित ‘ब्रिटिश कोलंबिया गुरुद्वारा काउंसिल’ ने सतनाम ट्रस्ट के ट्रस्टियों रिपुदमन सिंह मलिक व बलवंत सिंह पंधेर को सरी के गुरु नानक सिख गुरुद्वारा में प्रकाशित सभी पावन स्वरूप व प्रकाशित करने की सारी सामग्री 22 अगस्त शाम चार बजे तक पहुंचाने के निर्देश दिए थे।
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इसके बाद दोनों ट्रस्टी काउंसिल के प्रवक्ता मनिंदर सिंह को मिले और मामले को पांच सिंह साहिबान को सौंपने की मांग की। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशन पर शुरू हुए विवाद पर फैसला लेने के सभी अधिकार पांच सिंह साहिबान को दिए जाने चाहिए। रविवार को ब्रिटिश कोलंबिया गुरुद्वारा काउंसिल द्वारा नियुक्त किए गए पंज प्यारे रिपुदमन सिंह व बलवंत सिंह से मिले।
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उन्होंने भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाशित सभी स्वरूप व प्रकाशन का सामान गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब सरी डेल्टा में पहुंचाने का आदेश दिया। दोनों ट्रस्टियों ने पंज प्यारों के आदेश मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद पंज प्यारों ने गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब में उपस्थित संगत को दोनों ट्रस्टियों के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी।

पंज प्यारों ने संगत को बताया कि रिपुदमन सिंह व बलवंत सिंह पंधेर के अनुसार वह अब तक 62 पावन स्वरूप प्रकाशित कर चुके हैं। कुछ स्वरूपों को प्रकाशित करने के दौरान हुई गलतियों के कारण उनको अग्नि भेंट कर दिया गया है। इससे पहली बैठक में दोनों ट्रस्टियों ने कहा था कि उन्होंने अब तक 11-15 स्वरूप ही प्रकाशित किए हैं।

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह 20 पावन स्वरूप प्रकाशित कर चुके हैं। गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब के साथ जुड़े अलग-अलग पदाधिकारियों ने इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। धार्मिक भावनाओं के साथ जुड़े इस संवेदनशील मामले में दोनों ट्रस्टियों के आचरण पर दुख जताया गया।

चार्टर्ड प्लेन से कनाडा लाए जाते हैं पावन स्वरूप

अमर उजाला से बातचीत में रिपुदमन सिंह ने कहा कि एसजीपीसी को सभी महाद्वीपों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप प्रकाशित करने की आज्ञा देनी चाहिए। जब जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ अध्यक्ष थे, तब कनाडा में पावन स्वरूप प्रकाशित करने पर फैसला हो गया था। बाद में सियासी दबाव के चलते उस पर अमल नहीं हुआ।

एसजीपीसी पावन स्वरूप एक चार्टर जहाज में भारत से कनाडा लाने के लिए अनुमति देती है जिसका कुल खर्च साढ़े आठ लाख डॉलर है। अगर इस मामले पर उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया गया तो वह एक विनम्र सिख की भांति पेश होकर सारी स्थिति से पांच सिंह साहिबान को अवगत करवाएंगे।

उन्हें जो भी धार्मिक सजा मिलेगी, वह स्वीकार करेंगे। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश घर-घर होना चाहिए तभी तो सिखी का प्रचार-प्रसार होगा। कनाडा में रहने वाली नई पीढ़ी पहले ही मां बोली पंजाबी से विमुख हो रही है।

एक महीने में स्पष्टीकरण दें दोनों ट्रस्टी: जत्थेदार
श्री अकाल तख्त साहिब में पांच सिंह साहिबान की बैठक के बाद जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दोनों ट्रस्टियों को एक माह में अपना स्पष्टीकरण देने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही कहा कि अब तक जितने भी पावन स्वरूप प्रकाशित किए गए हैं, छापाखाना, प्रकाशन सामग्री, गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब में गणमान्य सिखों की हाजिरी में सुशोभित किए जाएं।

गुरुद्वारा प्रबंधन इन पावन स्वरूपों के दर्शन ग्रंथी सिंहों को करवाकर अक्षरों, ततकारे व रागमाला की अच्छी तरह जांच करवाकर छह महीने में इसकी रिपोर्ट अकाल तख्त साहिब को भेजे।
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