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RCF: ऊटी की 100 साल पुरानी ट्वाय ट्रेन को बदलेगा RCF, वर्ल्ड हैरिटेज साइट के लिए बनाए जाएंगे नए डिजाइन

Thu, 01 Jun 2023 10:29 AM IST
निवेदिता वर्मा महेश कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, कपूरथला (पंजाब)
महेश कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, कपूरथला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 01 Jun 2023 10:29 AM IST
सार

1908 में ब्रिटिश शासन की ओर से बनाए गए नीलगिरी माउंटेन रेलवे को 2005 में यूनेस्कों ने वर्ल्ड हेरिटेज साइड में शामिल किया। इस हेरिटेज ट्रैक पर दौड़ने वाली ऊटी ट्वायर ट्रेन हनीमून स्पेशल के तौर पर विख्यात फेमस है।

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RCF management ready to replace 100 year old meter gauge Ooty toy train
ooty toy train - फोटो : फाइल

विस्तार

वर्ल्ड टूरिज्म के पटल पर इंडियन रेल टूरिज्म को लाने में रेल कोच फैक्टरी(आरसीएफ) अहम रोल अदा करेगा। बिना किसी डिजीटल डाटा के कालका-शिमला हैरिटेज ट्रैक के लिए माडर्न नैरोगज (एनजी) पैनारोमिक (सेमी-विस्टाडोम) कोच बनाकर आरसीएफ ने पहले ही अपनी उच्च कार्यकुशलता साबित कर दी है।

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अब इन कोच का सफल ऑसीलेशन ट्रायल के बाद आरसीएफ प्रबंधन 100 साल पुरानी मीटरगेज ऊटी ट्वाय ट्रेन को बदलने की कवायद में जुट चुका है। बेशक, अभी कालका-शिमला हेरिटेज ट्वाय ट्रेन 38 कोच बनने शेष हैं, लेकिन आरसीएफ प्रशासन ऊटी के लिए नए अत्याधुनिक कोच का डिजाइन तैयार करने की तरफ कदम बढ़ा चुका है।
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1908 में ब्रिटिश शासन की ओर से बनाए गए नीलगिरी माउंटेन रेलवे को 2005 में यूनेस्कों ने वर्ल्ड हेरिटेज साइड में शामिल किया। इस हेरिटेज ट्रैक पर दौड़ने वाली ऊटी ट्वायर ट्रेन हनीमून स्पेशल के तौर पर विख्यात फेमस है। जिसमें यात्रियों का बेहद क्रेज रहता है और कोच की तमाम सीटें हमेशा फुल रहती हैं। इस 100 साल पुरानी ऊटी ट्वाय ट्रेन बनाने के लिए रेलवे बोर्ड की ओर से बाकायदा डिजाइन तैयार करने का आदेश आरसीएफ प्रबंधन को मिला है। लेकिन कालका-शिमला पैनारोमिक कोच की वजह से इस पर आरसीएफ की डिजाइन टीम की ओर से ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। 
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हालांकि अभी कितने कोच बनेंगे, इसका आर्डर रेलवे बोर्ड से आरसीएफ को प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन जिस तरह से रेलवे बोर्ड ने आरसीएफ पर विश्वास जताया है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है। केवल ऊटी ट्वायर ट्रेन ही नहीं, भविष्य में दार्जीलिंग, कांगड़ा वैली की पठानकोट-जोगिंदर नगर रेलवे ट्रैक के बीच दौड़ने वाली ट्वाय ट्रेन समेत भारत की सभी ट्वाय ट्रेन को आरसीएफ अपनी कार्यशैली व वर्क कल्चर से जरूरत बदलेगा। ऊटी ट्वाय ट्रेन मीटरगेज पद्धति पर दौड़ती हैं और करीब 12 से 15 साल पहले मीटरगेज कोच आरसीएफ सेनेगल-माली और म्यांमार रेलवे को भेज चुका है। इसमें आरसीएफ को महारत हासिल है। जल्द ही आरसीएफ की ओर से ऊटी ट्वाय ट्रेन का डिजाइन तैयार करके रेलवे बोर्ड को भेजे जाने की प्रबल संभावना है।


आरसीएफ के जीएम अशेष अग्रवाल ने कहा कि आरसीएफ हर ट्रेन को बनाने में सक्षम है। 100 साल पुरानी हेरिटेज ट्रैक ऊटी ट्वाय ट्रेन का भी आरसीएफ में डिजाइन बन रहा है। उन्हें उम्मीद है कि हम भारत सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के सपने को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे। वहीं वर्ल्ड टूरिज्म के पटल पर इंडियन रेल टूरिज्म का परचम लहराएंगे।

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