{"_id":"fb67e8407edca1e75efd4ba632611801","slug":"punjab-bernala-himachal-bus-accident-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मणिकर्ण बस हादसे में बरनाला के पांच लोगों का नहीं मिला सुराग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मणिकर्ण बस हादसे में बरनाला के पांच लोगों का नहीं मिला सुराग
ब्यूरो/अमर उजाला, बरनाला
Updated Fri, 24 Jul 2015 10:25 PM IST
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यहां के गांव पक्खोकलां के रहने वाले आठ लोग वीरवार को हिमाचल प्रदेश में
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कुल्लू के पास मणिकर्ण जाते समय बस हादसे का शिकार होकर पार्वती दरिया में
बह गए।
उनमें से तीन गुरदीप कौर पत्नी बलजीत सिंह, गुरविंदर सिंह पुत्र बलजिंदर सिंह व बलजिंदर सिंह पुत्र मघर सिंह निवासी गांव पक्खोकलां जिला बरनाला को दरिया में से निकाल लिया गया है। हालांकि उनकी हालत नाजुक देखते हुए उनको कुल्लू के अस्पताल में दाखिल करवाया गया है जहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।
इसके अलावा चरणजीत कौर पत्नी बलजिंदर सिंह, अर्शदीप कौर पुत्र बलजिंदर सिंह, नछतर सिंह पुत्र डारा सिंह, वीरपाल कौर पत्नी बिंदर सिंह, धर्मप्रीत कौर पत्नी बलजीत सिंह निवासी पक्खोकलां जिला बरनाला के दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लग पाया। इस हादसे के कारण शुक्रवार को पूरे गांव में शोक छाया रहा।
ज्यादातर लोग मानसा जिले के गांव जोगा, माखा, अकलिया, चहिलां इत्यादि गांवों के थे। लोग लापता लोगों की सलामती के लिए प्रार्थनाएं कर रहे थे। पीड़ित परिवारों के साथ-साथ गांव के अनेकों घरों ने शोक में चूल्हा तक नहीं जलाया।
उनमें से तीन गुरदीप कौर पत्नी बलजीत सिंह, गुरविंदर सिंह पुत्र बलजिंदर सिंह व बलजिंदर सिंह पुत्र मघर सिंह निवासी गांव पक्खोकलां जिला बरनाला को दरिया में से निकाल लिया गया है। हालांकि उनकी हालत नाजुक देखते हुए उनको कुल्लू के अस्पताल में दाखिल करवाया गया है जहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।
इसके अलावा चरणजीत कौर पत्नी बलजिंदर सिंह, अर्शदीप कौर पुत्र बलजिंदर सिंह, नछतर सिंह पुत्र डारा सिंह, वीरपाल कौर पत्नी बिंदर सिंह, धर्मप्रीत कौर पत्नी बलजीत सिंह निवासी पक्खोकलां जिला बरनाला के दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लग पाया। इस हादसे के कारण शुक्रवार को पूरे गांव में शोक छाया रहा।
ज्यादातर लोग मानसा जिले के गांव जोगा, माखा, अकलिया, चहिलां इत्यादि गांवों के थे। लोग लापता लोगों की सलामती के लिए प्रार्थनाएं कर रहे थे। पीड़ित परिवारों के साथ-साथ गांव के अनेकों घरों ने शोक में चूल्हा तक नहीं जलाया।