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पार्टीशन म्यूजियम को देख भावुक हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चितंबरम
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भारत के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम अमृतसर में बने पार्टीशन म्यूजियम को देखते हुए
- फोटो : AMRITSAR
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पार्टिशन म्यूजियम को देखने पहुंचे पी चिदंबरम
दृश्यों को देख नातिन को समझाया देश विभाजन का मंजर
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम रविवार दोपहर को अपनी नातिन के साथ देश के पहले पार्टिशन म्यूजियम पहुंचे। इस म्यूजियम में देश विभाजन के दौरान रेलगाड़ी से अमृतसर पहुंचे लोगों के साथ आए लाशों के ढेरों से भरे रेल डिब्बों को देख पी चिदंबरम ने अपनी नातिन को विभाजन की दास्तान समझाई।
उन्होंने कहा, यहां देखो! इस दृश्य को देख कर तुम्हें एहसास होगा कि देश विभाजन के जख्म कितने गहरे थे। 1947 में देश दो टुकड़ों में बंट गया। इस पार-उस पार जाने के लिए अपनों ने ही अपनों के हाथ खून से लथपथ कर लिए। विभाजन का दर्द आज भी सीमा के इस पार व उस पार महसूस कर लोग दुखी हो जाते है। पूर्व मंत्री ने म्यूजियम में रखे देश विभाजन के कई दस्तावेजों को पढ़ा। म्यूजियम की प्रबंधक राजविंदर कौर ने पूर्व मंत्री को बताया कि यहां रखे दस्तावेजों, तस्वीरों और कई वस्तुओं को देश वासियों ने उपलब्ध करवाई है। जिन लोगों ने विभाजन का दर्द झेला था, उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी पूर्व मंत्री ने सुनी। पी चिदंबरम ने वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर की उस रिकॉर्डिंग को सुना, जिसमें उन्होंने विभाजन के करने और उसके बाद के हालातों के बारे में विस्तृत जानकारी दी हुई है।
चिदंबरम ने अपनी नाती के साथ इस पार्टिशन म्यूजियम में रखी विभाजन के साथ जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं, दस्तावेजों, लोगों द्वारा विभाजन के समय पाकिस्तान से लाई गई वस्तुओं के साथ-साथ उन्मादी भीड़ द्वारा घरों को जलाने के बनाए गए दृश्यों में गहरी रुचि दिखाई। म्यूजियम की ऊपरी मंजिल में एक दीवार को आरी से चीरने के दृश्य को देख कर चिदंबरम वहां कुछ पल रुके। जब नातिन ने इस बारे में उनसे जानकारी पूछी तो उन्होंने बताया कि यह दृश्य विभाजन के उस दर्द को बयान करता है, जिसमें सदियों से एक साथ रहने वालों के बीच दो टुकड़े हो गए थे। लगभग एक घंटा से अधिक समय तक पार्टिशन म्यूजियम में रहे पी चिदंबरम ने वहां की प्रबंधक राजविंदर कौर से कहा कि देश विभाजन के साथ वह भी भावुकता से जुड़े हुए हैं। म्यूजियम में आकर विभाजन के दर्द को महसूस किया। इस म्यूजियम के बारे में देश वासियों को जानकारी देने के प्रयास होने चाहिए। इस अवसर पर पी चिदंबरम ने इस म्यूजियम को देख कर होप ऑफ ट्री में लिखा कि संघर्ष व त्याग से अंधेरे से रोशनी की तरफ जाने की दृढ़ इच्छा जन्म लेती है। कभी उम्मीद न छोड़ें।
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दृश्यों को देख नातिन को समझाया देश विभाजन का मंजर
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम रविवार दोपहर को अपनी नातिन के साथ देश के पहले पार्टिशन म्यूजियम पहुंचे। इस म्यूजियम में देश विभाजन के दौरान रेलगाड़ी से अमृतसर पहुंचे लोगों के साथ आए लाशों के ढेरों से भरे रेल डिब्बों को देख पी चिदंबरम ने अपनी नातिन को विभाजन की दास्तान समझाई।
उन्होंने कहा, यहां देखो! इस दृश्य को देख कर तुम्हें एहसास होगा कि देश विभाजन के जख्म कितने गहरे थे। 1947 में देश दो टुकड़ों में बंट गया। इस पार-उस पार जाने के लिए अपनों ने ही अपनों के हाथ खून से लथपथ कर लिए। विभाजन का दर्द आज भी सीमा के इस पार व उस पार महसूस कर लोग दुखी हो जाते है। पूर्व मंत्री ने म्यूजियम में रखे देश विभाजन के कई दस्तावेजों को पढ़ा। म्यूजियम की प्रबंधक राजविंदर कौर ने पूर्व मंत्री को बताया कि यहां रखे दस्तावेजों, तस्वीरों और कई वस्तुओं को देश वासियों ने उपलब्ध करवाई है। जिन लोगों ने विभाजन का दर्द झेला था, उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी पूर्व मंत्री ने सुनी। पी चिदंबरम ने वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर की उस रिकॉर्डिंग को सुना, जिसमें उन्होंने विभाजन के करने और उसके बाद के हालातों के बारे में विस्तृत जानकारी दी हुई है।
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चिदंबरम ने अपनी नाती के साथ इस पार्टिशन म्यूजियम में रखी विभाजन के साथ जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं, दस्तावेजों, लोगों द्वारा विभाजन के समय पाकिस्तान से लाई गई वस्तुओं के साथ-साथ उन्मादी भीड़ द्वारा घरों को जलाने के बनाए गए दृश्यों में गहरी रुचि दिखाई। म्यूजियम की ऊपरी मंजिल में एक दीवार को आरी से चीरने के दृश्य को देख कर चिदंबरम वहां कुछ पल रुके। जब नातिन ने इस बारे में उनसे जानकारी पूछी तो उन्होंने बताया कि यह दृश्य विभाजन के उस दर्द को बयान करता है, जिसमें सदियों से एक साथ रहने वालों के बीच दो टुकड़े हो गए थे। लगभग एक घंटा से अधिक समय तक पार्टिशन म्यूजियम में रहे पी चिदंबरम ने वहां की प्रबंधक राजविंदर कौर से कहा कि देश विभाजन के साथ वह भी भावुकता से जुड़े हुए हैं। म्यूजियम में आकर विभाजन के दर्द को महसूस किया। इस म्यूजियम के बारे में देश वासियों को जानकारी देने के प्रयास होने चाहिए। इस अवसर पर पी चिदंबरम ने इस म्यूजियम को देख कर होप ऑफ ट्री में लिखा कि संघर्ष व त्याग से अंधेरे से रोशनी की तरफ जाने की दृढ़ इच्छा जन्म लेती है। कभी उम्मीद न छोड़ें।
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