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अमृतसर से उत्तराखंड के लिए रवाना हुआ रोष मार्च
अमर उजाला, अमृतसर
Updated Mon, 18 Nov 2013 10:41 PM IST
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उत्तराखंड में श्री गुरु नानक देव जी के 1984 में नेस्तनाबूद किए गुरुद्वारा साहिब ज्ञान गोदडी के पुनर्निर्माण में देरी का मामला गर्मा रहा है।
शिरोमणि पंथक सेवा लहर के प्रमुख संत बलजीत सिंह दादूवाल ने एक हजार से ज्यादा समर्थकों के साथ सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब से अरदास करके उत्तराखंड तक रोष मार्च निकाला। करीब पांच बसों और कारों में बैठकर ये सिख उत्तराखंड के लिए रवाना हुए।
सिखों ने अपने हाथों में खालसाई झंडे पकड़ कर बोले सो निहाल... के जयकारे लगाए। इस दौरान दादूवाल ने बताया कि अभी गुरुद्वारा ज्ञान गोदडी की जमीन पंथ के नाम है।
उत्तराखंड सरकार ने उस जमीन पर सरकारी कार्यालय और निजी होटल बनाकर पंथ के साथ धोखा किया है। उन्होंने बताया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अवतार सिंह, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उत्तराखंड के राज्यपाल को मांग पत्र देने पर भी कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला।
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इस कारण उनको अपने समर्थकों के साथ 2011 में इसके लिए संघर्ष करना पड़ा। पिछले वर्ष गुरु पर्व वाले दिन रोष मार्च निकाला था तो उनको उत्तराखंड में प्रवेश नहीं करने दिया था।
इस बार गुरु पर्व के बाद यह मार्च महान यात्रा के रूप में निकाला है। यदि उत्तराखंड सरकार ने उनको गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी के मूल स्थल तक जाने दिया तो वहां पर दो घंटे शांतिमय ढंग से कथा कीर्तन करके गुरु पर्व मनाएंगे।
दादूवाल ने मांग की है कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन इस मामले में उत्तराखंड सरकार से सीधा संपर्क करें।
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शिरोमणि पंथक सेवा लहर के प्रमुख संत बलजीत सिंह दादूवाल ने एक हजार से ज्यादा समर्थकों के साथ सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब से अरदास करके उत्तराखंड तक रोष मार्च निकाला। करीब पांच बसों और कारों में बैठकर ये सिख उत्तराखंड के लिए रवाना हुए।
सिखों ने अपने हाथों में खालसाई झंडे पकड़ कर बोले सो निहाल... के जयकारे लगाए। इस दौरान दादूवाल ने बताया कि अभी गुरुद्वारा ज्ञान गोदडी की जमीन पंथ के नाम है।
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उत्तराखंड सरकार ने उस जमीन पर सरकारी कार्यालय और निजी होटल बनाकर पंथ के साथ धोखा किया है। उन्होंने बताया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अवतार सिंह, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उत्तराखंड के राज्यपाल को मांग पत्र देने पर भी कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला।
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इस कारण उनको अपने समर्थकों के साथ 2011 में इसके लिए संघर्ष करना पड़ा। पिछले वर्ष गुरु पर्व वाले दिन रोष मार्च निकाला था तो उनको उत्तराखंड में प्रवेश नहीं करने दिया था।
इस बार गुरु पर्व के बाद यह मार्च महान यात्रा के रूप में निकाला है। यदि उत्तराखंड सरकार ने उनको गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी के मूल स्थल तक जाने दिया तो वहां पर दो घंटे शांतिमय ढंग से कथा कीर्तन करके गुरु पर्व मनाएंगे।
दादूवाल ने मांग की है कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन इस मामले में उत्तराखंड सरकार से सीधा संपर्क करें।