अमृतसर पहुंचा ब्रिटिश आर्मी का शिष्टमंडल, बोले- सारागढ़ी युद्ध में 21 सिखों की शहादत बेमिसाल
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सिख एक ऐसी कौम है जो विश्व में अपनी दरियादिली, बेमिसाल बहादुरी व कुर्बानी के लिए जानी जाती है। सिखों ने जहां मजलूमों, लाचार व अन्य धर्मों की रक्षा के खातिर हंसते हंसते बलिदान दिया है। वहीं विदेश में बसे पंजाबियों को वहां के मुल्कों की उन्नति व खुशहाली में अहम योगदान दिया है।
विश्व में प्रसिद्ध ब्रिटिश सरकार के लिए आखिरी सांस तक सारागढ़ी किले पर डटकर युद्ध में भाग लेने वाले 21 सिख योद्धाओं को याद करते हुए बुधवार को कालेज कैंपस स्थित सिख इतिहास खोज सेंटर में सारागढ़ी से लाए गए पत्थर को स्थापित करने के बाद ब्रिटिश फौज के ब्रिगेडियर सेलिया जेन हरवी ने ये बातें कहीं।
ब्रिगेडियर हरवी जोकि कर्नल जान कैंडल, कैप्टन काइज बिकटरन, कैप्टन जगजीत सिंह सोहल, वारंट अधिकारी अशोक चौहान, लेफ्टिनेंट कर्नल निक वुड व अन्य अपनी टीम सहित सारागढ़ी फाउंउेशन इंक के प्रयास से खालसा कॉलेज पहुंचे। सिख इतिहास खोज केंद्र में पत्थर स्थापित करने के बाद ब्रिटिश शिष्टमंडल ने कॉलेज का दौरा भी किया। खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल डा. महल सिंह ने कॉलेज की इमारत व 127 वर्षीय इतिहास के बारे में जानकारी दी।
इस अवसर पर खालसा कॉलेज पब्लिक स्कूल में सारागढ़ी युद्ध से संबंधित सेमिनार प्रिंसिपल अमरजीत सिंह गिल के सहयोग से करवाया गया। ब्रिगेडियर सेलिया हरवी व कर्नल जान कैंडल ने सारागढ़ी युद्ध में 21 सिखों की दलेरी की बेमिसाल शहादत पर प्रकाश डाला और कहा कि सिख कौम ने कई ऐतिहासिक युद्ध लड़े हैं जो इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हैं।
अगर सिख इतिहास को देखा जाए तो गुरु साहिबान, जरनैल व योद्धाओं ने कई महान युद्ध लड़े हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में बदलाव करने की हिम्मत योद्धा में होती है, जो सिखों में कूट कूट कर भरी है। इस अवसर पर ब्रिगेडियर केएस काहलो ने स्टाफ व विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सिखों के शानदार इतिहास व देश की तरक्की व उन्नति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान अन्य भाषाओं पर ज्ञान के अलावा अपने गौरवमयी सिख इतिहास के बारे प्रकाश डालना जरूरी है।
इस अवसर पर खालसा कॉलेज गवर्निंग कौंसिल के सदस्य व ग्लोबल एलुमनी आर्गनाइजेशन के अंतर्राष्ट्रीय प्रधान दविंदर सिंह छीना ने अपने संबोधन में सिखों के बलिदान व इतिहास के बारे में अवगत कराया।
इस अवसर पर प्रिंसिपल गिल ने आए मेहमान का धन्यवाद करते हुए कहा कि बड़े गर्व की बात है कि ब्रिटिश सेना का शिष्टमंडल शहीद हुए सिखों को श्रद्धांजलि भेंट करने के लिए पहुंचा। इस अवसर पर उनके साथ फाउंडेशन के सदस्य कमलजीत कौर गिल, भुपिंदर सिंह हालेंड, डा जीएस वालिया, गुरिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह भटटी, अशोक चौहान, अंडर सचिव डीएस रटौल आदि मौजूद थे। गुरु नगरी पहुंचा यह शिष्टमंडल आज श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्तक होने के बाद जलियांवाला बाग वार मेमोरियल भी गया।