तानाशाही की अवधारणा और सत्ता में बने रहने के लिए बल का प्रयोग और राजनीतिक विरोधियों का व्यवस्थित तरीके से उत्पीड़न, प्राचीन रोमन सभ्यता से ही चले आ रहे हैं। लेकिन, आधुनिक इतिहास के तानाशाहों ने इसे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और क्रूरता का पर्याय बना दिया। वहीं, मानव इतिहास के कुछ सबसे अधिक क्रूर तानाशाहों को सत्ता संभाले बहुत अधिक समय नहीं हुआ है। इस रिपोर्ट में जानिए आधुनिक इतिहास के 10 सबसे ज्यादा निर्मम और क्रूर तानाशाहों के बारे में...
एडॉल्फ हिटलर (1889-1945)
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एडॉल्फ हिटलर
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तानाशाहों की बात हो तो सबसे पहले दिमाग में नाम हिटलर का ही आता है। जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर को 1930 के दशक में सत्ता मिली थी और वह मानव इतिहास में सबसे बड़ी क्रूरताओं के लिए जिम्मेदार था। हिटलर की विदेश नीतियों के चलते द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई थी, जिसमें पांच से सात करोड़ लोगों की मौत हुई थी। इसके साथ ही उसने लगभग 1.1 करोड़ लोगों की नस्लीय आधार पर व्यवस्थित हत्या का आदेश दिया, जिनमें से 60 लाख लोग यहूदी थे। उसने दूसरे विश्व युद्ध में हार के बाद सोवियत रेड आर्मी की गिरफ्त में आने से बचने के लिए 30 अप्रैल 1945 को आत्महत्या कर ली थी।
जोसेफ स्टालिन (1878-1953)
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जोसेफ स्टालिन
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जॉर्जिया में जन्मा सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन साल 1924 में लेनिन की मौत के बाद सत्ता में आया था। संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन का भविष्य का सहयोगी स्टालिन एक सनकी व्यक्ति था। उसने अपने राजनीतिक शत्रुओं के साथ साथ संदिग्ध विपक्षियों को भी क्रूरता से दबा दिया। माना जाता है कि स्टालिन के शासन काल में करीब 1.4 से दो करोड़ लोगों की मौत दंड श्रम शिविरों (गुलगा) में या 1930 के दशक में हुए ग्रेट पर्ज के दौरान हुई थी। इस दौरान लाखों लोग निर्वासित कर दिए गए थे। साल 1936 में 13 रूसी नेताओं पर स्टालिन को मारने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया था और उन्हें मृत्युदंड दिया गया था।
पॉल पॉट (1925-1998)
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पॉल पॉट
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खमेर रूज का नेता और 1975 से 1979 तक कंबोडिया का तानाशाह रहा पॉल पॉट आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर नरसंहारों में से एक के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार था। चार साल तक कंबोडिया की सत्ता संभालने के दौरान करीब 10 लाख लोगों की मौत भुखमरी, जेल में, जबरन श्रम और हत्याओं की वजह से हो गई थी। उसे 1979 में वियतनाम ने सत्ता से बाहर कर दिया था लेकिन अपने लाल खमेर समर्थकों के साथ उसने थाईलैंड के ग्रामीण इलाकों में काम करना जारी रखा।
ईदि अमीन (1925-2003)
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ईदि अमीन
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युगांडा का तीसरा राष्ट्रपति ईदि अमीन करीब ढाई लाख लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार था। उसके शासन के आतंक के परिणामस्वरूप इतने लोगों की मौत हुई। उसके शासनकाल में प्रताड़ना, मृत्यु दंड, भ्रष्टाचार और जातीय उत्पीड़न चरम पर पहुंच गया था। वह 1972 से 1979 तक सत्ता में रहा, फिर तंजानिया के खिलाफ हार के बाद देश छोड़कर भाग गया था, जिस पर एक साल पहले उसने हमला किया था। वह लीबिया में और फिर सऊदी अरब में रहा। साल 2003 में उसकी मौत हो गई थी।