पनामा पेपर्स के पांच साल बाद अब पेंडोरा पेपर्स लीक ने दुनिया के कई नामी रईसों और नेताओं द्वारा विदेशों में संपत्ति छिपाने का खुलासा किया है। इन पेपर्स में 1.2 करोड़ दस्तावेज शामिल हैं, जिन्हें आईसीआईजे ने हासिल किया था। वाशिंगटन आधारित इस थिंक टैंक ने दस्तावेजों की जानकारियां प्रकाशित की हैं। इस लीक में कई विश्व नेताओं, पूर्व राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और उद्योगपतियों व खिलाड़ियों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने अपने देश की एजेंसियों से छिपकर अमेरिका समेत कई देशों में पैसा निवेश कर रखा है। इनमें 90 देशों के सैंकड़ों राजनेताओं से जुड़े आर्थिक हेरफेर के दस्तावेज उजागर हुए हैं। पुराने टैक्स हेवन पर शिकंजा कसने के बाद अमेरिका का दक्षिण डकोटा कर चोरों का नया गढ़ बन गया है... कर विशेषज्ञ बेवरली मोरन के मुताबिक ताजा खुलासे की तीन बड़ी बातें दुनिया को जाननी चाहिए... तो आइए जानते हैं...
पेंडोरा पेपर्स लीक: धन छिपाने की नई तकनीक और शेल कंपनियों की भूमिका उजागर, जानें तीन बड़ी बातें
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बदली धन छिपाने की पुरानी तकनीक
जब पनामा पेपर्स ने खुलासा किया था, तब कई देशों ने रईसों द्वारा धन छिपाने को लेकर अपनाई जाने वाली तकनीक के खिलाफ कदम उठाए थे। मसलन, कई दशकों तक रईसों के पैसे पर गोपनीयता बरतने वाले बैंकों को स्विट्जरलैंड ने ज्यादा पारदर्शिता के लिए बाध्य किया था। लेकिन पेंडोरा पेपर्स ने रईसों द्वारा तकनीक बदलकर संपत्ति छिपाने का खुलासा कर दिया है।
मौजूदा खुलासे ने यह तथ्य फिर उजागर कर दिया है कि धनी लोग कितना कम निजी कर चुकाते हैं। इसमें शैल कंपनियों के इस्तेमाल पर खास जानकारियां सामने आई हैं। पेपर्स में पता लगा है कि इन कंपनियों के चलते किस तरह ज्यादा नेटवर्थ वाले लोगों पर कर की नकेल कसना कितना मुश्किल हो गया है।
कालाधन छिपाने में शेल कंपनियों की अहम भूमिका
शेल या मुखौटा कंपनियों का अस्तित्व सिर्फ कागजों पर होता है। इनसे न तो कोई उत्पादन होता है और न ही बहुत कर्मचारी होते हैं। इसकी कीमत सिर्फ एक सर्टिफिकेट तक सीमित रहती है, जिसके जरिये शेल कंपनियों का इकलौता मकसद संपत्ति रखना और छिपाना होता है। इसके चलते कर अधिकारी इनके मालिक और छिपाई गई संपत्तियां नहीं पकड़ पाते।
कोई भी अरबपति जब चाहे अधिकारियों की नजरों से दूर इन कंपनियों में अपनी संपत्ति छिपा सकता है। इस मकसद के लिए इन कंपनियों का टैक्स हेवन जगहों पर होना जरूरी है। अतीत में टैक्स हेवन के तौर पर छोटे-छोटे देशों के नाम सामने आते थे लेकिन पेंडोरा पेपर्स में पता लगा है कि रईस अपने पैसे छिपाने के लिए खुद अमेरिका का इस्तेमाल कर रहे हैं।
रकम ठिकाने लगाने को नया टैक्स हैवन मिला
पेंडोरा पेपर्स में अमेरिकी राज्य दक्षिण डकोटा का टैक्स हेवन के रूप में खूब नाम लिया गया है। दक्षिण डकोटा पूर्व राष्ट्रपतियों की उकेरी गईं प्रतिमाओं वाले पहाड़ माउंट रशमोर के लिए प्रख्यात है। दिलचस्प बात है कि पेपर्स में अमेरिका के जिन 206 ट्रस्टों की पहचान हुई है, उनमें 81 दक्षिण डकोटा आधारित हैं। इनकी सम्मिलित संपत्ति एक अरब डॉलर से ज्यादा है।
यह प्रांत कई कारणों से एक अच्छा टैक्स हेवन राज्य है। पहला, यहां के ट्रस्ट कानूनों के कारण मजबूत गोपनीय सुरक्षा मिलती है, जिसके कारण संपत्ति की मालकियत आसानी से छिपाई जा सकती है। यहां निवेश करने वाले ट्रस्टों को दुनिया का सबसे ताकतवर कानूनी संरक्षण मिलता है। पेंडोरा पेपर्स के मुताबिक, ट्रस्टों के अनुकूल कानूनों के कारण यहां उनकी संपत्तियां बीते दशक में चार गुना बढ़कर 360 अरब डॉलर हो गई है।
अपने कर चोर मंत्रियों के बचाव में उतरी पाकिस्तान की इमरान सरकार
पाकिस्तान की इमरान खान सरकार पेंडोरा पेपर्स लीक में शामिल मंत्रियों का बचाव करती दिख रही है। सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा है कि लीक में जिन कैबिनेट मंत्रियों के नाम सामने आए है, वह दोषी साबित न होने तक पदों पर बने रहेंगे। डान अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, चौधरी ने पत्रकारों से कहा कि संबंधित मंत्री जब दोषी साबित हो जाएंगे, तभी उन पर कोई कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले, सोमवार को चौधरी ने पाक पीएम इमरान खान द्वारा पेंडोरा मामले में पाकिस्तानी नामों की जांच के लिए सेल गठित करने की जानकारी दी थी। विपक्षी दलों ने इमरान के इस कदम को धोखा करार दिया है। विपक्ष ने न्यायिक आयोग या पनामा पेपर्स की तरह एक स्वतंत्र आयोग के जरिये जांच कराने की मांग की है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि पीएम अपने मंत्रियों और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़े लोगों को बचाने की कवायद कर रहे हैं।