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नैनीताल कांड: दर्दनाक कहानी, भागती दुनिया में 10 दिन घुटनों के बल रेंगती रही वो; डॉक्टरों ने तड़पने को छोड़ा
Sat, 03 May 2025 11:28 AM IST
शाहरुख खान
राजीव कुमार पांडेय, अमर उजाला, नैनीताल
राजीव कुमार पांडेय, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 03 May 2025 11:28 AM IST
सार
नैनीताल मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। हल्द्वानी के डॉक्टरों ने बिना इलाज के ही पीड़िता को लौटाकर तड़पने के लिए छोड़ दिया था। भागती दुनिया में पीड़िता 10 दिन घुटनों के बल रेंगती रही।
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nainital incident
- फोटो : अमर उजाला
जिस बालिका से दुष्कर्म पर पूरा नैनीताल आक्रोश में है, उसकी दास्तां आंसुओं में डूबी है। दरिंदगी का शिकार हुई बच्ची ऐसे दर्द की गिरफ्त में है, जहां उसका दिलो-दिमाग सुन्न है। उसके शरीर की अथाह पीड़ा ऐसी कि 10 दिन तक वह लगभग रेंगती हुई चली और अब भी उसकी ठीक से बैठने की स्थिति नहीं है।
नैनीताल के मल्लीताल चीना बाबा चौराहे पर तैनात पुलिस कर्मी
- फोटो : संवाद
10 दिनों तक बच्ची घुटनों के बल रेंगकर चली
12 अप्रैल को एक महिला की छोटी बेटी शाम को बाजार से सामान खरीदने गई थी। इस दौरान रुकुट कंपाउंड निवासी 72 साल के बुजुर्ग ठेकेदार उस्मान मासूम को 200 रुपये देने का लालच देकर अपने घर ले गया और घृणित कृत्य कर डाला। इसके बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई। एक तरफ आरोपी की धमकी से वह बदहवास हो गई थी, दूसरी ओर शरीर के असहनीय दर्द ने उसे लगभग मृतप्राय सा कर दिया था। करीब 10 दिनों तक बच्ची घुटनों के बल रेंगकर चलती रही। वह ठीक से बैठ भी नहीं पा रही थी।
12 अप्रैल को एक महिला की छोटी बेटी शाम को बाजार से सामान खरीदने गई थी। इस दौरान रुकुट कंपाउंड निवासी 72 साल के बुजुर्ग ठेकेदार उस्मान मासूम को 200 रुपये देने का लालच देकर अपने घर ले गया और घृणित कृत्य कर डाला। इसके बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई। एक तरफ आरोपी की धमकी से वह बदहवास हो गई थी, दूसरी ओर शरीर के असहनीय दर्द ने उसे लगभग मृतप्राय सा कर दिया था। करीब 10 दिनों तक बच्ची घुटनों के बल रेंगकर चलती रही। वह ठीक से बैठ भी नहीं पा रही थी।
मल्लीताल कोतवाली के समीप विरोध प्रदर्शन के दौरान वहां से गुजरते आयुक्त का वाहन
- फोटो : संवाद
25 अप्रैल को मां उसे लेकर हल्द्वानी के महिला अस्पताल पहुंची
नानी के पूछने पर भी जब बच्ची ने कुछ नहीं बताया तो बड़ी बहन ने मां को फोन कर संभल (यूपी) से बुला लिया। 23 अप्रैल को मां नैनीताल पहुंची। दो दिन तक मासूम मां को भी आपबीती नहीं बता पाई। हालत में सुधार नहीं होने पर 25 अप्रैल को मां उसे लेकर हल्द्वानी के महिला अस्पताल पहुंची। यहां ओपीडी का पर्चा भी बनाया गया। आरोप है कि यहां चिकित्सक ने बच्ची की हालात देख कह दिया कि पहले पुलिस के पास जाओ... उसके बाद ही इलाज होगा। ऐसे में मां अपनी बेटी को बिना इलाज कराए ही घर लौट गई।
नानी के पूछने पर भी जब बच्ची ने कुछ नहीं बताया तो बड़ी बहन ने मां को फोन कर संभल (यूपी) से बुला लिया। 23 अप्रैल को मां नैनीताल पहुंची। दो दिन तक मासूम मां को भी आपबीती नहीं बता पाई। हालत में सुधार नहीं होने पर 25 अप्रैल को मां उसे लेकर हल्द्वानी के महिला अस्पताल पहुंची। यहां ओपीडी का पर्चा भी बनाया गया। आरोप है कि यहां चिकित्सक ने बच्ची की हालात देख कह दिया कि पहले पुलिस के पास जाओ... उसके बाद ही इलाज होगा। ऐसे में मां अपनी बेटी को बिना इलाज कराए ही घर लौट गई।
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मल्लीताल कोतवाली के समीप विरोध प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोग
- फोटो : संवाद
मोहल्ले में आम हो गई थी अनहोनी की चर्चा
परिवार वालों को भले ही बालिका ने कुछ नहीं बताया लेकिन उसकी हालत देखकर मोहल्ले में उसके साथ अनहोनी की चर्चा आम हो गई थी। इस बीच क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस के पास जाने की सलाह दी। वही मासूम की मां को लेकर महिला समाजसेवी के पास पहुंची। महिला समाजसेवी और मां के पूछने पर बच्ची ने पूरी घटना बता दी और मां से लिपटकर खूब रोई।
परिवार वालों को भले ही बालिका ने कुछ नहीं बताया लेकिन उसकी हालत देखकर मोहल्ले में उसके साथ अनहोनी की चर्चा आम हो गई थी। इस बीच क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस के पास जाने की सलाह दी। वही मासूम की मां को लेकर महिला समाजसेवी के पास पहुंची। महिला समाजसेवी और मां के पूछने पर बच्ची ने पूरी घटना बता दी और मां से लिपटकर खूब रोई।
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मल्लीताल कोतवाली के पास विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को समझाती संयुक्त मजिस्ट्रेट वरुणा अग्रवाल
- फोटो : संवाद
चाकू होता तो आरोपी को मार देती
30 अप्रैल को बेटी से दुष्कर्म को पूरी कहानी सुनने के बाद मां भी गुस्से से लाल हो गई थी। मां का कहना था कि अंदर इतना गुस्सा भरा है कि अगर चाकू होता, तो मैं उस्मान को मार देती।
30 अप्रैल को बेटी से दुष्कर्म को पूरी कहानी सुनने के बाद मां भी गुस्से से लाल हो गई थी। मां का कहना था कि अंदर इतना गुस्सा भरा है कि अगर चाकू होता, तो मैं उस्मान को मार देती।