एमबी इंटर कॉलेज में आयोजित ईजा बैणी महोत्सव में राज्य की महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं ने हस्तशिल्प, हथकरघा, मिलट्स और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। नैनीताल समेत अन्य जिलों से करीब 40 स्वयं सहायता समूहों ने स्टॉल लगाकर उत्पाद बेचे। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न उत्पाद तैयार कर खुद को आत्मनिर्भर बना रही हैं, वहीं कई महिला उद्यमी अपने हुनर से लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं।
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मातृशक्ति को सलाम: स्टॉल में महिलाओं के सृजन देख रह जाएंगे दंग, तस्वीरों में देखें ईजा-बैंणी महोत्सव की झलक
Fri, 01 Dec 2023 12:55 PM IST
हीरा मेहरा
मयंक जोशी, संवाद
मयंक जोशी, संवाद
Published by: हीरा मेहरा
Updated Fri, 01 Dec 2023 12:55 PM IST
सार
ईजा-बैणीं महोत्सव में मातृशक्ति की सृजनशीलता और सामाज के प्रति समर्पण एक मंच पर नजर आया। राज्य के विभिन्न हिस्सों से आईं महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने स्टॉल लगाकर लोकसंस्कृति समेत स्थानीय उत्पादों के विविध रंग बिखेर दिए।
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ईजा-बैंणी महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
ईजा-बैंणी महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, द पहाड़ी स्टोर, बेटी ब्वारी शक्ति स्वायत्त सहकारिता अल्मोड़ा, ससबनी ग्राम्याहाट (नेहा शाह) मुक्तेश्वर, पदार्थ हेंडीक्राफ्ट (शिवांग वर्मा) अल्मोड़ा, निशा हेंडकढ़ाई देहरादून, एकांशिव हस्तकला हेंडपेंट हल्द्वानी-अल्मोड़ा, कलबी बाय आर्ट ट्री स्टूडियो (जायरा खान) अल्मोड़ा, बैणी क्रोसिया प्रोडक्ट पंगूट (नैनीताल), हिमाद्री हंस हैंडलूम, नैना देवी ग्रोथ सेंटर, गिरिजा बुटीक एवं महिला विकास संस्था तल्ली बमौरी, कैन सार्थक स्वयं सहायता समूह, निर्मला सोशल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी, सारा क्राफ्ट पौड़ी गढ़वाल, नुपुर क्रिएशन नवाबी रोड, हिल प्योर ऑर्गेनिक, हिमालय स्वायत्त सहकारिता, लक्ष्मी और प्रेरणा स्वयं सहायता समूह गोरापड़ाव, कालिका स्वयं सहायता समूह हल्दूपोखरा, पेम्पर्ड कैनवास, आपर्ण हैंडमेड (चेतना धवन, शिवांगी वर्मा) ने मिलट्स उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई।
इसके साथ ही धवन कंफेशनर, मां नंदा सुनंदा स्वयं सहायता समूह (लीला शाह), मेग्स ट्रेड्स एंड नीडल्स काठगोदाम, वैष्णवी स्वयं सहायता समूह कनियाली, भूवेदा हर्बल काशीपुर, चोकोबाउंस काशीपुर, बुआजी मशरुम रानीबाग ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। ताज कॉर्बेट ढिकुली, क्लब महेंद्रा कॉर्बेट रामनगर, आहना रिजॉर्ट और आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों ने मिलट्स उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई।
इसके साथ ही धवन कंफेशनर, मां नंदा सुनंदा स्वयं सहायता समूह (लीला शाह), मेग्स ट्रेड्स एंड नीडल्स काठगोदाम, वैष्णवी स्वयं सहायता समूह कनियाली, भूवेदा हर्बल काशीपुर, चोकोबाउंस काशीपुर, बुआजी मशरुम रानीबाग ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। ताज कॉर्बेट ढिकुली, क्लब महेंद्रा कॉर्बेट रामनगर, आहना रिजॉर्ट और आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों ने मिलट्स उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई।
ईजा-बैंणी महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
13 जिलों के 26 जीआई टैग उत्पादों की लगी प्रदर्शनी
मेले में एक जिला दो उत्पाद योजना के तहत राज्य के 13 जनपदों के 26 जीआई टैग उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। नैनीताल जिले से ऐपण कला और फल प्रसंस्करण, अल्मोड़ा से बाल मिठाई और हथकरघा सामग्री (उत्तराखंड ट्वीड), पिथौरागढ़ से वूलन कालीन और मुनस्यारी राजमा, चंपावत के लौह शिल्प और शहद, बागेश्वर से ताबा और कीवी, पौड़ी के लकड़ी फर्नीचर और हर्बल उत्पाद, रुद्रप्रयाग में निर्मित मंदिर स्मारिका और मंदिर प्रसाद, चमोली के हैंडलूम और हेंडीक्राफ्ट और गुलाब जल, टिहरी की नथ और पनीर, उत्तरकाशी के सेब और लाल चावल समेत सभी जनपदों के दो जीआई टैग उत्पादों की प्रदर्शनी लगी।
गरीब बच्चों और महिलाओं को रोजगार दे रही मीरा
मीरा यूथ डेवलपमेंट फाउंडेशन की मीरा कापड़ी ने महोत्सव में टेरीकोटा मिट्टी से बने बर्तन उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। इन बर्तनों को पेंटिंग से सजाया गया है। मीरा गरीब बच्चों और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। 2,000 से अधिक महिलाएं और बच्चे उनके स्वरोजगार से जुड़े हैं। उधर, बामणीय माता स्वयं सहायता समूह, कोटाबाग ने मिट्टी और पत्थर के पाउडर से नेचुरल ब्लैक कप की प्रदर्शनी लगाई।
मेले में एक जिला दो उत्पाद योजना के तहत राज्य के 13 जनपदों के 26 जीआई टैग उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। नैनीताल जिले से ऐपण कला और फल प्रसंस्करण, अल्मोड़ा से बाल मिठाई और हथकरघा सामग्री (उत्तराखंड ट्वीड), पिथौरागढ़ से वूलन कालीन और मुनस्यारी राजमा, चंपावत के लौह शिल्प और शहद, बागेश्वर से ताबा और कीवी, पौड़ी के लकड़ी फर्नीचर और हर्बल उत्पाद, रुद्रप्रयाग में निर्मित मंदिर स्मारिका और मंदिर प्रसाद, चमोली के हैंडलूम और हेंडीक्राफ्ट और गुलाब जल, टिहरी की नथ और पनीर, उत्तरकाशी के सेब और लाल चावल समेत सभी जनपदों के दो जीआई टैग उत्पादों की प्रदर्शनी लगी।
गरीब बच्चों और महिलाओं को रोजगार दे रही मीरा
मीरा यूथ डेवलपमेंट फाउंडेशन की मीरा कापड़ी ने महोत्सव में टेरीकोटा मिट्टी से बने बर्तन उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। इन बर्तनों को पेंटिंग से सजाया गया है। मीरा गरीब बच्चों और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। 2,000 से अधिक महिलाएं और बच्चे उनके स्वरोजगार से जुड़े हैं। उधर, बामणीय माता स्वयं सहायता समूह, कोटाबाग ने मिट्टी और पत्थर के पाउडर से नेचुरल ब्लैक कप की प्रदर्शनी लगाई।
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ईजा-बैंणी महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
कुसुम की पेंटिंग देख लोग हुए अभिभूत
हस्तकला प्रदर्शनी में ललित कला अकादमी पुरस्कार (2022) से सम्मानित उत्तराखंड की पहली महिला आर्टिस्ट कुसुम पांडे ने पेंटिंग और प्रिंटिंग प्रदर्शनी लगाई। रंगगीत आर्ट्स सेंटर संचालित करने वाली कुसुम की पेंटिंग ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी पेंटिंग में पहाड़ी लोकजीवन और संस्कृति की झलक देखने को मिली।
हस्तकला प्रदर्शनी में ललित कला अकादमी पुरस्कार (2022) से सम्मानित उत्तराखंड की पहली महिला आर्टिस्ट कुसुम पांडे ने पेंटिंग और प्रिंटिंग प्रदर्शनी लगाई। रंगगीत आर्ट्स सेंटर संचालित करने वाली कुसुम की पेंटिंग ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी पेंटिंग में पहाड़ी लोकजीवन और संस्कृति की झलक देखने को मिली।
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ईजा-बैंणी महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
बबीता ने बंजर जमीन को किया आबाद, गुलाब की खेती कर बनाया रोज वाटर
पिथौरागढ़ जिले के कनालीछीना ब्लॉक के पसमा गांव की बबीता सामंत ने अपनी बंजर जमीन को गुलाब की खेती से आबाद करते हुए स्वरोजगार की मिशाल पेश की है। गुलाब की खेती के जरिए वह हिमग्रेस ब्रांड का गुजाब जब तैयार कर रही हैं। उनके इस प्रयास ने गांव के अन्य ग्रामीण भी गुलाब की खेती कर रहे हैं। बबीता ने बताया कि गांव से पलायन करने के बजाए उन्होंने गुलाब की खेती के जरिए स्वरोजगार का रास्ता चुना। वह गुलाब से शहद और गुलाब जल जैसे हर्बल उत्पाद तैयार कर रही हैं। इससे उन्होंने नौ लोगों को रोजगार भी दिया है। उन्होंने बताया कि गुलाब के तेल का समर्थन मूल्य प्रति किलो साढ़े पांच लाख रुपये तक है। एक किलो तेल के लिए 40 से 50 क्विंटल तक फूलों की जरुरत होती है।
बर्ड हाउस बनाकर लोकल बर्ड को संरक्षित कर रहे अर्जुन
ईजा-बैणी महोत्सव में प्रदर्शनी लगाने वाले गंगुवाचौर, भटेलिया (मुक्तेश्वर) निवासी अर्जुन सिंह बिष्ट स्वरोजगार की मिशाल पेश कर रहे हैं। पाइन कॉर्न और लकड़ी से बर्ड और ट्री हाउस बनाकर अर्जुन लोकल बर्ड बचाने की मुहीम में भी जुटे हैं। अपने जतन और इनोवेटिव आइडिया के दम पर आज उनके बनाए उत्पादों की नैनीताल, पूणे, दिल्ली और देहरादून में भी अच्छी मांग है।
अर्जुन बताते हैं कि छह साल पहले प्राइवेट नौकरी छोड़कर जब उन्होंने बर्ड हाउस और ट्री हाउस बनाकर स्वरोजगार करना शुरु किया तब उन्हें लोगों का खास समर्थन नहीं मिल पाया, लेकिन सोशल मीडिया के कारण उनके उत्पाद को नई पहचान मिली। आज वह अपने साथ चार महिलाओं और सात पुरुषों को भी रोजगार दे रहे हैं। उन्होंने तीन साल पहले बारबेट हेंडक्राफ्ट नाम से अपनी संस्था को पंजीकृत किया है। वे आरबीआई (रूरल बिजनेस इंक्यूबेटर) से भी जुड़े हैं। अर्जुन का कहना है कि पारंपरिक मकान के स्थान पर कंक्रीट के मकान बनने से लोकल बर्ड विलुप्त होने की कगार पर है। बर्ड हाउस बनाकर वह पहाड़ी संस्कृति को बचाने के साथ ही लोकल चिड़ियाओं को भी संरक्षित कर रहे हैं। अर्जुन के बनाए ट्री हाउस 450 से 900 रुपये और बर्ड हाउस 300 से 700 रुपये कीमत में बिक रहे हैं। कुरियर के माध्यम से पूरे भारत में अर्जुन के हेंडीक्राफ्ट खरीदे जा रहे हैं।
पिथौरागढ़ जिले के कनालीछीना ब्लॉक के पसमा गांव की बबीता सामंत ने अपनी बंजर जमीन को गुलाब की खेती से आबाद करते हुए स्वरोजगार की मिशाल पेश की है। गुलाब की खेती के जरिए वह हिमग्रेस ब्रांड का गुजाब जब तैयार कर रही हैं। उनके इस प्रयास ने गांव के अन्य ग्रामीण भी गुलाब की खेती कर रहे हैं। बबीता ने बताया कि गांव से पलायन करने के बजाए उन्होंने गुलाब की खेती के जरिए स्वरोजगार का रास्ता चुना। वह गुलाब से शहद और गुलाब जल जैसे हर्बल उत्पाद तैयार कर रही हैं। इससे उन्होंने नौ लोगों को रोजगार भी दिया है। उन्होंने बताया कि गुलाब के तेल का समर्थन मूल्य प्रति किलो साढ़े पांच लाख रुपये तक है। एक किलो तेल के लिए 40 से 50 क्विंटल तक फूलों की जरुरत होती है।
बर्ड हाउस बनाकर लोकल बर्ड को संरक्षित कर रहे अर्जुन
ईजा-बैणी महोत्सव में प्रदर्शनी लगाने वाले गंगुवाचौर, भटेलिया (मुक्तेश्वर) निवासी अर्जुन सिंह बिष्ट स्वरोजगार की मिशाल पेश कर रहे हैं। पाइन कॉर्न और लकड़ी से बर्ड और ट्री हाउस बनाकर अर्जुन लोकल बर्ड बचाने की मुहीम में भी जुटे हैं। अपने जतन और इनोवेटिव आइडिया के दम पर आज उनके बनाए उत्पादों की नैनीताल, पूणे, दिल्ली और देहरादून में भी अच्छी मांग है।
अर्जुन बताते हैं कि छह साल पहले प्राइवेट नौकरी छोड़कर जब उन्होंने बर्ड हाउस और ट्री हाउस बनाकर स्वरोजगार करना शुरु किया तब उन्हें लोगों का खास समर्थन नहीं मिल पाया, लेकिन सोशल मीडिया के कारण उनके उत्पाद को नई पहचान मिली। आज वह अपने साथ चार महिलाओं और सात पुरुषों को भी रोजगार दे रहे हैं। उन्होंने तीन साल पहले बारबेट हेंडक्राफ्ट नाम से अपनी संस्था को पंजीकृत किया है। वे आरबीआई (रूरल बिजनेस इंक्यूबेटर) से भी जुड़े हैं। अर्जुन का कहना है कि पारंपरिक मकान के स्थान पर कंक्रीट के मकान बनने से लोकल बर्ड विलुप्त होने की कगार पर है। बर्ड हाउस बनाकर वह पहाड़ी संस्कृति को बचाने के साथ ही लोकल चिड़ियाओं को भी संरक्षित कर रहे हैं। अर्जुन के बनाए ट्री हाउस 450 से 900 रुपये और बर्ड हाउस 300 से 700 रुपये कीमत में बिक रहे हैं। कुरियर के माध्यम से पूरे भारत में अर्जुन के हेंडीक्राफ्ट खरीदे जा रहे हैं।