इस बार शिवरात्रि सोमवार को पड़ने की वजह से इस दिन का महत्व काफी बढ़ गया है और यह संयोग करीब 12 साल बाद पड़ रहा है। सोमवार का दिन महादेव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यह तिथि अपने आप में श्रेष्ठ है।
12 साल बाद आया शुभ संयोग, भोले की पूजा में रमे भक्त
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कनखल मंदिर
- फोटो : amar ujala
एक संयोग और हैं जिसने इस महाशिवरात्रि के महत्व को कई गुना बढ़ा दिया है। सालों बाद सिंहस्थ योग निर्मित हुआ है। देव गुरु बृहस्पति, सिंह राशि में गोचर करेंगे। इस दौरान महाशिवरात्रि की पूजा करने से भगवान प्रसन्न होंगे, साथ ही भक्तों पर विशेष कृपा करेंगे।
12 साल बाद आया शुभ संयोग, भोले की पूजा में रमे भक्त
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टपकेश्वर मंदिर
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हर-हर महादेव, जय भोले, बम बम भोले के जयकारों से देहरादून के शिवालय गूंज उठे। भक्तों के दर्शनों के लिए रविवार रात 12:30 बजे ही शिव मंदिर के कपाट खोल दिए गए थे।
12 साल बाद आया शुभ संयोग, भोले की पूजा में रमे भक्त
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टपकेश्वर मंदिर
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सबसे पहले मंदिर प्रबंधन दूध, दही, शहद आदि सामग्री से भोले बाबा का भव्य अभिषेक किया गया। टपकेश्वर, सिद्धेश्वर, प्राचीन शिव मंदिर में देर रात से ही मेले सा माहौल है। रविवार शाम को श्री पृथ्वीनाथ मंदिर में 2100 दीयों से रंगोली सजाई गई है।
12 साल बाद आया शुभ संयोग, भोले की पूजा में रमे भक्त
टपकेश्वर मंदिर में रविवार रात 11 बजे से ही श्रद्धालुओं की लाइन लगने लगी थी। बारह बजे मंदिर प्रबंधन ने अभिषेक करने के बाद श्रद्धालुओं के लिए कपाट खोल दिए गए।