आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद अजय कुमार जितने जांबाज थे, उतना ही बहादुर उनका परिवार है। इकलौते बेटे के शहीद होने की खबर आने के बाद बेबस मां और पिता बस यही बोले, हमारा तो लाल चला गया...किसी और का न जाए।
पत्नी ने भी विलाप करते हुए बस यही कहा कि मुझसे किए गए वादे वे पूरे न कर सके। लेकिन सेना को किया वादा जरूर पूरा कर दिया। सेना में हवलदार रहे अजय के पिता चौधरी वीरपाल सिंह ने कई ऑपरेशन देखे। लेकिन बेटे ने जो बहादुरी दिखाई उस पर देश को हमेशा गर्व रहेगा। आगे जानें आखिर पति की शहादत पर कैसे बार बार बेहोश हो जाती हैं अजय की पत्नी: -
सेना में भर्ती के दौरान जो शपथ ली जाती है, देश की सुरक्षा को जो वादा किया जाता है। उसको सिपाही अजय कुमार ने शहादत देकर बखूबी निभा दिया। लेकिन अजय को कई और वादे पूरे करने थे। जो उन्होंने अपनी बहन, मां और पांच माह की गर्भवती पत्नी से किए थे।
उन्होंने अपनी पत्नी से वादा किया था, बेटे के जन्म पर छुट्टी नहीं आ सका था, लेकिन इस बार जरूर आऊंगा। पत्नी और परिजन बिलख-बिलखकर बस यही कह रहे थे, देश के प्रति वादा अपना वादा तो निभा गए अजय... हम लोगों का क्या।
22 मई 1992 को जन्मे अजय कुमार पिता के सेना में होने के चलते शुरुआत से ही सेना में जाने का सपना रखते थे। 7 अप्रैल 2012 को सेना में भर्ती होने के बाद उनका सपना पूरा हो गया। 22 साल की उम्र में नौ मार्च 2015 को अजय की शादी मुरादनगर सलेमाबाद की प्रियंका उर्फ डिंपल से हो गई। छह जुलाई को प्रियंका ने बेटे आरव को जन्म दिया। अजय उस वक्त अंडमान में तैनात थे।
उन्होंने पत्नी से आने का वादा किया था लेकिन छुट्टी नहीं मिलने के कारण उसे निभा नहीं पाए। आरव के जन्म के दो माह बाद वो घर आए तो सभी ने शिकायत की। तब उन्होंने कहा था कि सेना में हूं, इतना तो सहना ही पड़ेगा।