एसएसपी नितिन तिवारी आखिरकार मेरठ के मिजाज को भांपने में चूक कर गए। पहले प्रह्लाद नगर प्रकरण हो गया, जिसमें भाजपा नेताओं ने उन पर निशाना साधा। रविवार को बिना अनुमति के फैज-ए-आम में मीटिंग और बखेड़े ने आखिरकार उन पर गाज गिरा दी। साथ में आईजी रामकुमार का भी ट्रांसफर हो गया। उन्हें लखनऊ पीएसी भेजा गया है।
2 of 6
meerut police, meerut news
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को कमिश्नर कैंप कार्यालय पर हुई बैठक में भाजपा विधायकों ने एसएसपी को निशाने पर ले लिया। भाजपा नेताओं ने सीधे कहा कि फैज-ए-आम में हुई मीटिंग और बिना अनुमति के जुलूस निकालना एसएसपी की चूक रही है।
3 of 6
लोगों को समझाते शहरकाजी
- फोटो : अमर उजाला
इतनी भीड़ कैसे जुटी और जुलूस को क्यों नहीं रोका गया। इस बैठक में भाजपा नेताओं ने एसएसपी नितिन तिवारी पर निशाना साधा। वहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी सोमवार दिन में ही मुख्यमंत्री को मेरठ में हुए बखेड़े की जानकारी देते हुए एसएसपी और एसपी सिटी पर निशाना साधा। सीधे कहा कि शहर में जब धारा 144 लागू थी तो गुंडागर्दी क्यों हुई, इसके जिम्मेदार पुलिस अफसर हैं।
4 of 6
पुलिस बल
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, यह भी माना जा रहा है कि एसएसपी ने ज्ञापन लेने के लिए भी जिले के एक प्रशासनिक अधिकारी को कॉल की। लेकिन इस प्रशासनिक अधिकारी ने साफ कह दिया कि रविवार है। धारा 144 लागू है। कोई ज्ञापन नहीं लिया जाएगा।
5 of 6
हंगामा कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
इस जुलूस का नतीजा यह हुआ कि अराजक तत्वों ने धार्मिक नारे लगाते हुए पुलिस पर पथराव कर सीओ और इंस्पेक्टरों से हाथापाई की। जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। जिस तरह से भाजपा नेताओं ने घेराबंदी की थी, उसे लग रहा था कि पुलिस अफसरों पर गाज गिर सकती है। आखिरकार एसएसपी नितिन तिवारी और आईजी रेंज रामकुमार पर गाज गिर ही गई। अभी कुछ और अफसरों पर भी गाज गिर सकती है।