मेरठ में सलावा निवासी हुकुम सिंह के परिवार पर कहर बरपा तो कोहराम मच गया। परिवार के दो सदस्य जान की परवाह न कर नहर में कूद गए। लेकिन उन्हें बाद में पता चला कि इस कार में तो उनके अपने ही हैं।
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गंगनहर में कार की तलाश करती टीम
हुकुम सिंह के परिवार के सात सदस्य सलावा से पिलखुवा के लिए कार में चले थे। उनकी कार के पीछे हुकुम सिंह का भाई संजय और बेटा सुनील बाइक से चल रहे थे। कांवड़ मार्ग पटरी से जब वह मुरादनगर की तरफ जा रहे थे तो कार काफी आगे निकल चुकी थी। इसी बीच उन्होंने दूर से एक कार को गंगनहर में गिरते देखा तो मालूम नहीं था कि उस कार में उनके ही परिवार के सदस्य सवार हैं।
वहीं मौके पर पहुंचे संजय और सुनील ने बाइक रोकी और जान की परवाह किए बिना गंगनहर में छलांग लगा दी। जैसे ही कार की खिड़की खोलकर पानी से लोगों को बाहर निकाला तो देखा कि कोई दूसरे नहीं बल्कि डूबने वाले उनके ही परिवार के सदस्य हैं। जिस पर चाचा-भतीजे ने मदद के लिए शोर मचा दिया।
पुकार सुनते ही पहुंची मदद
पुकार सुनकर मार्ग से होकर गुजर रहे राहगीर व आसपास के खेत में गन्ने की छिलाई कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और लोगों को बाहर निकाला। कुछ देर बाद कार को भी क्रेन के द्वारा बाहर निकाल लिया गया। लेकिन इसी बीच तीन लोगों की जान चली गई और एक महिला राधा का पता नहीं चल सका।
नानू पुल पर लगाया जाम
हुकुम सिंह चार भाईयों सतप्रकाश, विनोद व संजय में सबसे बड़े थे। हुकुम सिंह के दो बेटे व एक बेटी है। बेटे अनिल की शादी पिलखुवा के अतरौली गांव में हुई। अनिल के ससुर ओमबीर की तेरहवीं में पूरा परिवार पिलखुवा जा रहा था। पता नहीं था कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। हादसे में पुत्रवधू राधा का नहर में सुराग न लगने पर ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर मेरठ-करनाल हाईवे नानू पुल पर जाम लगा दिया।