मेरठ के लोहियानगर में विस्फोट के बाद काफी दूर तक धुएं का गुबार फैल गया। धुआं छटा तो घायलों की चीत्कार लोगों का कलेजा चीर रही थी। काफी देर तक आसपास के क्षेत्र में अफरातफरी मची रही। विस्फोट की आवाज सुनकर लोग मौके की ओर दौड़ पड़े। मौके पर मौत का ऐसा मंजर देख उनकी रूह कांप उठी।
Blast In Factory: धुआं हटा तो दिखे मजदूरों के क्षत-विक्षत शव, मौत का मंजर देख कांप उठी हर किसी की रूह
विस्फोट से उनके कपड़े और शरीर पूरी तरह जल चुके थे। कुछ के शरीर के अंग और शवों के लोथेड़े भी दूर तक बिखरे थे। घायलों में चीख-पुकार मची थी। वह अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे थे। कुछ देर तक तो लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखरी क्या हुआ है। इसी बीच सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शवों को मोर्चरी पहुंचाया और घायलों को अस्पताल भेजा। मौके पर तमाम अधिकारी पहुंचने लगे और राहत व बचाव कार्य शुरू कराया गया। एक शव उठाकर एंबुलेंस में रखने के दौरान युवकों के हाथ में उसका हाथ आ गया। यह दृश्य देख सभी का कलेजा मुंह को आ गया।
बिजली और पानी न मिलने से परेशान रहे 25 हजार लोग
सोमवार रात बारिश की वजह से लोहियानगर क्षेत्र में रातभर बिजली गुल रही। सुबह हादसे के वक्त तक भी बिजली नहीं आई थी। विस्फोट के साथ 11 हजार केवी लाइन के खंभे भी उखड़ गए। गनीमत रही उस समय बिजली नहीं आई थी। इसके बाद कई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। इस दौरान भी एहतियात के तौर पर बिजली आपूर्ति चालू नहीं की गई। इससे पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। जिसके चलते करीब 25 हजार की आबादी बिजली और पानी न मिलने से परेशान रही। एक्सईएन मुकेश कुमार भी हादसे की सूचना पर मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर बिजली आपूर्ति बंद है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने पर आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी।
स्कूल के स्टाफ और बच्चों में फैल गई दहशत
घटना स्थल से करीब 100 मीटर दूर सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल है। जिस समय विस्फोट हुआ, स्कूल में बच्चों और स्टाफ का आना शुरू हो गया था। धमाके के साथ स्कूल की खिड़कियों के शीशे टूट गए। बच्चों और स्टाफ में दहशत फैल गई। मासूम सहम गए और उनमें चीख-पुकार मच गई। स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में छोटे बच्चों को वापस घर भेजा। जबकि अन्य के अभिभावकों को मेसेज भेजकर बच्चों को स्कूल न भेजने को कहा गया। बताया गया कि सुबह स्कूल के समय आसपास बच्चों और अभिभावकों की काफी भीड़ रहती है। लेकिन मंगलवार को शिक्षक-अभिभावक मीटिंग की वजह से काफी संख्या में बच्चों और उनके अभिभावकों को कुछ देर से बुलाया गया था। यदि विस्फोट के समय आसपास ज्यादा भीड़ होती तो और बड़ा हादसा हो सकता था।
जिम में कसरत करते 12 युवकों की जा सकती थी जान
पटाखा फैक्टरी की जिस बिल्डिंग में धमाका हुआ उसका प्रेशर दूसरी मंजिल पर था, इसके चलते उसके बराबर में बने मान फिटनेस जिम की बिल्डिंग की बजाय सारा प्रेशर उससे अगले घर की दूसरी मंजिल पर पहुंच गया। जिम के संचालक फरहान ने बताया कि सुबह धमाके के वक्त 12 युवक जिम में कसरत कर रहे थे। अचानक धमाके के बाद पूरी बिल्डिंग हिल गई। उन्हें लगा कि भूकंप आ गया है। सारे बाहर दौड़े तो बराबर वाले मकान की पूरी छत उड़ी हुई थी, दूसरी तरफ देखा तो मजदूर खून में लथपथ मलबे के आसपास पड़े हुए तड़प रहे थे, तब समझ में आया कि फैक्टरी में विस्फोट हुआ है। बताया कि अगर धमाके का प्रेशर नीचे आ जाता तो सबकी जान जा सकती थी।