सियासत में भी कई किरदार ऐसे होते हैं जो अपनी छवि, शैली और लोगों के बीच अपनी पकड़ से सभी के दिलों पर राज करते हैं। दुनिया को अलविदा कह चुके पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं। सोमवार सुबह जब सपा संरक्षक के निधन की खबर आई तो सभी मर्माहत हो गए। जौनपुर जिले में जगह-जगह मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि अर्पित करने लगे। लोगों को याद आया इसी साल का मार्च का महीना।
तब विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए सपा संरक्षक का जौनपुर आगमन हुआ था। मुलायम सिंह यादव ने चार मार्च को जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट से लकी यादव के लिए वोट की अपील की थी। ये उनकी आखिरी चुनावी जनसभा थी। उनकी जनसभा के बाद सपा के कद्दावर नेता रहे पारसनाथ यादव के पुत्र लकी यादव ने भारी अंतर से बाहुबली धनंजय सिंह को हराया था।
2 of 5
चार मार्च को जौनपुर में मुलायम सिंह यादव ने की थी चुनावी जनसभा
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल में सपा ने विधानसभा में भाजपा से अधिक सीटें विधानसभा चुनाव में हासिल की थीं। इसमें मुलायम फैक्टर भी माना जाता रहा है। तबीयत नासाज होने के बावजूद जौनपुर में चुनाव प्रचार करना चर्चा का विषय बना हुआ था। तब यब चर्चा खूब हुई थी कि वो अपने दोस्त स्वर्गीय पारसनाथ यादव के बेटे को जीत दिलाने के लिए जौनपुर आए थे।
3 of 5
चार मार्च को जौनपुर में मुलायम सिंह यादव ने की थी चुनावी जनसभा
- फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह यादव और सपा के कद्दावर नेता स्वर्गीय पारसनाथ यादव के बीच गहरी दोस्ती थी। पारसनाथ समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्हें मिनी मुलायम के नाम से जाना जाता था। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने मात्र दो जगह चुनाव प्रचार किया था।
4 of 5
चार मार्च को जौनपुर में मुलायम सिंह यादव ने की थी चुनावी जनसभा
- फोटो : अमर उजाला
विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मुलायम सिंह यादव के खराब स्वास्थ्य का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भाषण के दौरान दो बार कुर्सी पर बैठना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कुर्सी पर बैठकर ही अपने संबोधन को खत्म किया। उन्हें सुनने के लिए भारी संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और लोग इकट्ठा हुए थे।
5 of 5
चार मार्च को जौनपुर में मुलायम सिंह यादव ने की थी चुनावी जनसभा
- फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह यादव ने अपने संबोधन में लोगों से संकल्प दिलवाया था कि वह समाजवादी पार्टी को वोट करें। आखरी चुनावी भाषण में उन्होंने किसान, व्यापारी और बेरोजगार युवकों के लिए हक की बात कही। उन्होंने समाजवादी पार्टी को संघर्ष की पार्टी बताया था।