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एमबीए पास युवा ने चुनी खेतों की राह, दिल्ली तक महक रही 'मेहनत की खुशबू', कमा रहे इतना मुनाफा
Tue, 11 Jun 2019 08:24 AM IST
मुकेश कुमार
नीलेश शर्मा, अमर उजाला, मैनपुरी
नीलेश शर्मा, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 11 Jun 2019 08:24 AM IST
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प्रगतिशील किसान रवि पाल
- फोटो : Facebook/Ravi Pal
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जिनके पास अकेले चलने के हौसले होते हैं, एक दिन उन्हीं के पीछे काफिले होते हैं। ये बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव के युवा ने साबित कर दिखाई। अपनी मेहनत और लगन से खेती को एक नई राह दिखाई। ये मेहनत का ही नतीजा है कि मैनपुरी के फूल आज राजधानी दिल्ली में महक रहे हैं। फूलों की खेती से न केवल उसका जीवन खिल उठा, बल्कि दर्जनों परिवार भी इससे खिलखिलाने लगे हैं।
प्रगतिशील किसान रवि पाल
- फोटो : Facebook/Ravi Pal
ये युवा और कोई नहीं बल्कि भोगांव के गांव छिवकरिया निवासी रवि पाल हैं। जिले में रहकर ही स्नातक तक की शिक्षा लेने के बाद उन्होंने सचदेवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट मथुरा से एमबीए की डिग्री ली। कैंपस सलेक्शन में उन्हें नौकरी भी मिल गई। देखा जाए तो शुरुआत के हिसाब से ढाई लाख का पैकेज भी खराब नहीं था, लेकिन यहां उनका मन नहीं लगा।
खेत में गेंदा की फसल
- फोटो : Facebook/Ravi Pal
कुछ महीनों बाद ही उन्होंने नोएडा में टाटा मोटर्स में बिजनेस एरिया मैनेजर के पद पर नौकरी कर ली। अब उनका पैकेज बढ़कर छह लाख रुपये हो गया था। नौकरी के दौरान ही रवि एक दिन कृषि विज्ञान केंद्र दिल्ली घूमने के लिए गए। कृषि में महारथ हासिल करने वाले कृषि वैज्ञानिकों से जब रवि ने खेती के बारे में बातचीत की तो खेती के प्रति रवि का नजरिया ही बदल गया।
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गेंदा की फसल देखते किसान रवि पाल
- फोटो : Facebook/Ravi Pal
लगातार वैज्ञानिकों से मिलने के बाद छह महीने बाद ही रवि नौकरी छोड़कर घर आ गए। जब घर में फूलों की खेती करने की इच्छा जताई तो किसी ने समर्थन नहीं किया। पिता वेदराम पाल ने कहा कि नौकरी से अच्छा कुछ नहीं। सभी का विरोध झेलकर रवि ने पहली साल दो बीघा गेंदे की खेती की। फसल बेहतर हुई और दाम भी अच्छा मिला, पहली ही फसल में उन्हें 75 हजार रुपये मिले।
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खेद में गेंदा के फूलों को तोलते लोग
- फोटो : Facebook/Ravi Pal
इसके बाद साल दर साल गेंदा की खेत का ये क्षेत्रफल बढ़ता चला गया। आज जहां रवि के पास खुद की 10 बीघा से अधिक गेंदे की खेती है तो वहीं अन्य किसानों से जुड़कर लगभग सौ बीघा में उन्होंने गेंदा लगवाया है। आज उनके खेतों में उगा गेंदा राजधानी में महक रहा है। रोजाना वे फूलों को दिल्ली, कानपुर, आगरा की मंडियों में भेजते हैं।