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सहारा प्रमुख को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत राय की पेशी पर लगाई रोक, पटना हाई कोर्ट ने दिया था आदेश 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 13 May 2022 05:27 PM IST
सार

हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली सहारा प्रमुख की याचिका पर न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने नोटिस जारी किया।

सुब्रत राय
सुब्रत राय - फोटो : social media
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को राहत देते हुए गिरफ्तार करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने शुक्रवार सुबह ही गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। शीर्ष अदालत ने राय के खिलाफ धोखाधड़ी के उस मामले में कार्रवाई पर भी रोक लगा दी, जिसमें उन्हें अपने समूह की कंपनियों के छोटे निवेशकों को जमा राशि वापस करने की योजना के बारे में बताने को कहा गया था।



जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सहारा प्रमुख की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल और वी गिरि की दलीलों को सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान राय के वकीलों ने कहा कि सहारा समूह का मूल आपराधिक शिकायत के साथ कोई संबंध नहीं है और सहारा प्रमुख मामलों के पक्षकार भी नहीं थे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने मनमाने तरीके से आदेश जारी किया था। दरअसल हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद शुक्रवार सुबह अदालत में उपस्थित नहीं होने पर राय के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। राय को बृहस्पतिवार को पेश होना था, लेकिन उन्हें एक दिन और दिया गया था।


हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बिहार, यूपी के डीजीपी और दिल्ली के कमिश्नर को 16 मई को सुबह 10:30 बजे राय को पेश करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामलों में दायर विभिन्न अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा था, ऐसा लगता है कि राय को इस अदालत के आदेशों का कोई सम्मान नहीं है। इस अदालत के पास अधिकारियों को रय को पेश करने का आदेश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। सहारा कंपनी के पास रकम पाने की उम्मीद लगाए 600 से अधिक निवेशकों के आवेदन पड़े हैं।

पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई 19 मई को निर्धारित की। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को सूचित किया कि इससे पहले हाई कोर्ट ने बिहार के डीजीपी को 16 मई को सुबह 10.30 बजे राय को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। सिब्बल ने पीठ को बताया कि हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए थे, जिसका याचिकाकर्ता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि कुछ निवेशकों ने हाई कोर्ट का रुख किया और कहा कि सहारा समूह ने उन्हें पैसा नहीं दिया और हाई कोर्ट ने फरवरी में आदेश पारित किया था। 
 

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