देश में पेट्रोल और डीजल को लेकर हाल के दिनों में कई तरह की खबरें और अफवाहें सामने आ रही हैं। कहीं कहा जा रहा है कि भारत के पास सिर्फ 6 दिन का तेल बचा है, तो कहीं 74 दिन का दावा किया जा रहा है। ऐसे में आम लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सच में देश में तेल रिजर्व खत्म होने वाला है? वहीं विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार स्थिति इतनी गंभीर नहीं है जितनी सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही है। भारत के पास रणनीतिक और व्यावसायिक दोनों तरह के तेल भंडार मौजूद हैं, जो फिलहाल देश की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।
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petrol pump
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पेट्रोलियम रिजर्व का मतलब होता है कच्चे तेल या तैयार ईंधन का वह स्टॉक, जिसे भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जाता है। भारत में दो तरह के रिजर्व होते हैं। पहला रणनीतिक भंडार, जिसे आपात स्थिति जैसे युद्ध या सप्लाई रुकने पर इस्तेमाल किया जाता है। दूसरा व्यावसायिक भंडार, जिसे तेल कंपनियां रोजमर्रा की सप्लाई बनाए रखने के लिए रखती हैं। इन दोनों का संयुक्त उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने का काम करता है।
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petrol pump
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भारत के रणनीतिक तेल भंडार की कुल क्षमता करीब 53.3 लाख मीट्रिक टन है। देश में हर दिन करीब 6.7 लाख मीट्रिक टन तेल की खपत होती है। इस हिसाब से रणनीतिक रिजर्व अकेले करीब 8 से 9 दिन तक चल सकता है। इस हिसाब से देखें तो भारत के स्ट्रैटेजिक रिजर्व में कुल 9 दिन के खर्च का तेल होना चाहिए। वहीं राज्यसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने इस बारे में जानकारी दी है कि ये रिजर्व अपनी क्षमता से करीब 64 प्रतिशत भरे हैं।
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मुरादाबाद के पेट्रोल पंपों पर भीड़
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इस हिसाब से भारत के पास करीब 33.7 लाख मीट्रिक टन स्ट्रैटजिक कच्चा तेल स्टोर है। ये करीब 5 से 6 दिन के खर्च में उपयोग में आ सकता है। उन्होंने इस बारे में भी बताया है कि भारत के रणनीतिक और व्यवसायिक ऑयल रिजर्व करीब 74 दिन का तेल स्टोर करके रख सकते हैं। वहीं 26 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी इस बारे में जानकारी दी थी कि भारत में 60 दिन का स्ट्रैटजिक और कॉमर्शियल रिजर्व है। इसमें क्रूड ऑयल और पेट्रोल डीजल शामिल हैं। सरकार और तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। सभी रिफाइनरी पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार से लगातार कच्चा तेल खरीदा जा रहा है। हाल के दिनों में लोगों ने अफवाहों के कारण ज्यादा ईंधन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे कुछ जगहों पर अस्थायी कमी जैसी स्थिति दिखी। लेकिन यह घबराहट की वजह से था, न कि असली सप्लाई संकट।
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मुरादाबाद के पेट्रोल पंपों पर भीड़
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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा रणनीति मजबूत है और अलग अलग देशों से तेल आयात कर जोखिम को कम किया जाता है। लंबे समय के लिए सरकार रिजर्व बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा पर भी काम कर रही है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि देश में कुछ ही दिनों में पेट्रोल खत्म हो जाएगा। आम लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।