अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज लगातार चर्चा में बना हुआ है। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल गुजरता है। युद्ध के दौरान ईरान द्वारा इस जलमार्ग को ब्लॉक किए जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर नकारात्मक असर पड़ा। भारत, चीन और जापान जैसे देशों की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक इसी रूट पर निर्भर हैं।
हाल ही में अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। सीजफायर के बाद ईरान ने दो हफ्तों तक इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की बात कही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो हफ्तों के सीजफायर के दौरान जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी।
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Strait of Hormuz
- फोटो : amarujala.com
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस समय स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से प्रति जहाज लगभग 20 लाख अमेरिकी डॉलर का टोल वसूल रहा है। हालांकि, किन देशों के जहाजों से यह शुल्क लिया जा रहा है इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य
- फोटो : FreePik
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि इस दो हफ्ते के सीजफायर के दौरान ईरान और ओमान मिलकर इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल सकते हैं। ईरान इस रकम का इस्तेमाल युद्ध में हुए नुकसान के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण में कर सकता है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य
- फोटो : Google Earth
ईरान की कोशिश है कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर उसका प्रभाव और नियंत्रण वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जाए। रिपोर्ट्स के अनुसार वह टोल वसूली से हर महीने अरबों डॉलर की कमाई करना चाहता है, जो उसके लिए आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य
- फोटो : Amar Ujala
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट माना जाता है। यह संकरा समुद्री रास्ता पर्शियन गल्फ को गल्फ ऑफ ओमान से जोड़ता है। इसके एक ओर ईरान और दूसरी ओर ओमान स्थित है।
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